France Maa Kali worship: इतिहास और सभ्यता पर बोलने वाले अभिजीत छावडा ने अपने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि फ्रांस में मां काली की पूजा होती है. उनके मुताबिक यह कहानी मध्यकाल से जुड़ी है, जब तुर्कों ने भारत पर आक्रमण किए और बड़ी संख्या में लोगों को गुलाम बनाकर बाहर ले जाया गया. समय के साथ इन गुलामों को पश्चिम की ओर भेज दिया गया और वे यूरोप पहुंचे. यह कहानी जिप्सी समुदाय, उनके इतिहास और फ्रांस के एक तटीय शहर में होने वाली एक खास धार्मिक परंपरा से जुड़ी बताई जा रही है.
जिप्सी समुदाय और भारत का रिश्ता (Gypsy Community and Indian Roots)
छावडा बताते हैं कि यूरोप में इन लोगों को मिस्र से आया मान लिया गया और यही से Gypsy (Gypsies) शब्द चलन में आया. आज भी फ्रांस और यूरोप के कुछ हिस्सों में जिप्सी समुदाय रहता है.
दावा है कि इसी समुदाय ने अपनी पुरानी आस्था को अलग रूप में बचाकर रखा.
इतिहासकार मानते हैं कि Gypsy समुदाय की जड़ें भारत से जुड़ी हैं, लेकिन मां काली की पूजा वाला दावा एक थ्योरी है, जिसे अकादमिक स्तर पर पूरी तरह साबित नहीं किया गया है, फिर भी यह चर्चा दिखाती है कि संस्कृति और आस्था कैसे सीमाओं से आगे जाकर नए रूप ले लेती है.
Saintes Maries de la Mer की परंपरा (history mystery)
फ्रांस के तटीय शहर Saintes Maries de la Mer में हर साल जो यात्रा (pilgrimage) होती है, वह Saint Sarah नाम की प्रतिमा के चारों ओर केंद्रित है. एक काली रंग की प्रतिमा की पूजा होती है, जिसे St Kali Sara भी कहा जाता है.
यह मूर्ति चर्च में रखी जाती है और साल में एक बार इसे समुद्र तक ले जाया जाता है. कुछ देर पानी में डुबोकर फिर वापस चर्च में स्थापित किया जाता है.
अभिजीत छावडा का कहना है कि जिप्सी समुदाय इस मूर्ति को मां काली के रूप में देखता है, जबकि ईसाई परंपरा में इसे वर्जिन मैरी से जोड़ा जाता है.
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, यह रूढ़िवादी रूमा/जिप्सी समुदाय (Roma/Gypsy) के लिए एक विशेष परंपरा है, जहां वे Saint Sarah की पूजा करते हैं और statue को समुद्र तक ले जाते हैं.
ये भी पढ़ें:- साल 2055 में फंस गया ये टाइम ट्रैवलर, पेरिस में अचानक गायब हो गए लोग, रहस्यमयी VIDEO से हर कोई दंग
ये भी पढ़ें:- नाली के नीचे दफन था पुराना राज, सीवर की सफाई में मिला 500 साल पुराना इतिहास














