डेटा की दुनिया में नई महाशक्ति कौन? Sovereign AI से बदलेगा भारत का टेक भविष्य

Global AI Race: दुनिया में एक खामोश मुकाबला चल रहा है. हथियार नहीं, डेटा और एल्गोरिदम दांव पर हैं. सवाल है...AI की इस दौड़ में कौन बना रहा है भविष्य की तकदीर?

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AI की जंग में कौन आगे? अमेरिका, चीन, यूरोप और भारत का अलग अंदाज

Sarvam AI Features: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया की बड़ी ताकतें अपनी-अपनी चाल चल रही हैं. चीन, यूरोप और भारत की रणनीति अमेरिका से बिल्कुल अलग है. हर देश अपने तरीके से AI सुपरपावर बनने की कोशिश में है.

चीन का केंद्रीकृत AI मॉडल (China's State-Led AI Strategy)

चीन की AI strategy पूरी तरह सरकार के नेतृत्व में चलती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजिंग अब तक 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश कर चुका है. फोकस है एप्लाइड AI, मैन्युफैक्चरिंग, रोबोटिक्स, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और governance पर. चीन अपनी बड़ी आबादी और विशाल डाटा रिसोर्स का फायदा उठाता है. इससे तेज deployment और रिसर्च आउटपुट देखने को मिलता है. हालांकि, यहां ओपन मार्केट से ज्यादा स्टेट कंट्रोल और राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राथमिकता दी जाती है.

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यूरोप का 'पहले नियम' वाला रास्ता (European Union's Regulation-First Approach)

यूरोपीय यूनियन ने अलग राह चुनी है. EU AI Act अगस्त 2024 से लागू है, जिसका मकसद AI विनियमन, पारदर्शिता और नागरिक अधिकार की सुरक्षा है. अक्टूबर 2025 में 1 बिलियन यूरो निवेश योजना भी लाई गई.यूरोप इनोवेशन को पूरी छूट देने के बजाय guardrails के भीतर आगे बढ़ाना चाहता है. हालांकि, टेक कंपनियों के दबाव के चलते AI Act के कुछ हिस्सों को रोकने का प्रस्ताव भी सामने आया है.

भारत की उभरती AI ताकत (India's Emerging AI Vision)

भारत अभी रिसर्च वॉल्यूम में अमेरिका या चीन जितना बड़ा नहीं है, लेकिन तेजी से तीसरी ताकत के रूप में उभर रहा है. Stanford Global AI Vibrancy Tool के अनुसार भारत AI प्रतिभा, व्यावसायीकरण और नीति संलग्नता (policy engagement) में तीसरे स्थान पर है. IndiaAI Mission का मकसद एआई को लोकतांत्रिक बनाना करना, मल्टीपल लैंग्वेज के लिए पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) बनाना और सोशल इकोनॉमिक चैलेंज हल करना है. Google aur Microsoft जैसे ग्लोबल दिग्गज भारत में data centre और cloud infrastructure में अरबों डॉलर निवेश कर रहे हैं.

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Sarvam AI जैसे स्टार्टअप sovereign AI और Indic language models पर काम कर रहे हैं. Bulbul V3 जैसे टूल 22 भाषाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ने का दावा करते हैं. AI की यह जंग सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक भविष्य की लड़ाई है. भारत का संतुलित और समावेशी मॉडल आने वाले समय में गेमचेंजर बन सकता है.

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Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.

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