वर्क फ्रॉम होम से मना करना पड़ा भारी! बॉस का हुआ इतना बड़ा नुकसान, कि बदलनी पड़ी पूरी पॉलिसी

दुबई के एक उद्यमी ने वर्क फ्रॉम होम से इनकार करने के बाद अपने टॉप कर्मचारी को खो दिया. लिंक्डइन पर शेयर की गई इस घटना ने मैनेजमेंट और कर्मचारियों के भरोसे को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

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वर्क फ्रॉम होम से मना करना पड़ा भारी!

कॉर्पोरेट दुनिया में एक छोटी-सी मैनेजमेंट गलती कभी-कभी बड़ा नुकसान कर सकती है. दुबई के एक उद्यमी का ऐसा ही अनुभव सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि वर्क फ्रॉम होम की एक साधारण मांग ठुकराने की वजह से उन्होंने अपने सबसे अच्छे कर्मचारी को खो दिया. यह कहानी दुबई स्थित कंपनी Virtualpartner के को-फाउंडर मलिक ए. की है, जिन्होंने लिंक्डइन पर अपनी गलती और उससे मिले सबक को शेयर किया है.

एक ‘ना' और छोड़ दी नौकरी

मलिक ने बताया, कि उनकी एक टॉप परफॉर्मिंग कर्मचारी ने सप्ताह में एक दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुमति मांगी थी. हालांकि, उसका काम काफी हद तक स्वतंत्र था, लेकिन उन्होंने यह सोचकर अनुरोध ठुकरा दिया कि अगर एक को अनुमति दी, तो बाकी कर्मचारी भी मांग करने लगेंगे और ऑफिस खाली हो जाएगा. उन्होंने लिखा, मुझे लगा अगर मैंने हां कहा, तो हर कोई यही मांगेगा. शुक्रवार को ऑफिस खाली हो जाएगा और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी. कर्मचारी ने उस समय कोई बहस नहीं की और सिर्फ ओके कह दिया.

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दो महीने बाद पता टली असली वजह

करीब दो महीने बाद उस कर्मचारी ने नौकरी छोड़ दी. एग्जिट इंटरव्यू में उसने बताया कि वर्क फ्रॉम होम से इनकार मुख्य कारण नहीं था, लेकिन उसी पल उसे लगा कि उस पर भरोसा नहीं किया जा रहा. दरअसल, वह रोजाना ऑफिस आने-जाने में करीब चार घंटे का समय खर्च करती थी और शुक्रवार का ट्रैफिक सबसे ज्यादा कठिन होता था. अगर उसे सप्ताह में एक दिन घर से काम करने की अनुमति मिल जाती, तो स्थिति अलग हो सकती थी.

अब बदली सोच और पॉलिसी

इस घटना के बाद मलिक ने अपनी सोच बदल दी. उन्होंने कहा, कि कभी-कभी जिस चीज से हम अव्यवस्था का डर रखते हैं, वही कर्मचारियों की निष्ठा बढ़ा सकती है. उन्होंने लिखा, मैंने एक ऐसी समस्या के डर से ना कहा, जो अस्तित्व में ही नहीं थी. अब मैं हर उचित फ्लेक्सिबिलिटी रिक्वेस्ट को मंजूर करता हूं. ऑफिस नहीं टूटा, किसी ने इसका गलत फायदा नहीं उठाया. लोग अब बेहतर काम करते हैं.

सोशल मीडिया पर चर्चा

यह पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भी अपनी राय दी. कई यूजर्स ने कहा, कि कंपनियां अक्सर कर्मचारियों की अहमियत तब समझती हैं, जब वे संगठन छोड़ देते हैं. एक यूजर ने लिखा, नेता लोग कर्मचारियों को पॉलिसी की वजह से नहीं, बल्कि उस संदेश की वजह से खोते हैं जो पॉलिसी देती है. वहीं एक ने कहा, कंपनियां अक्सर तब सुनती हैं जब कर्मचारी इस्तीफा दे देते हैं, जबकि समस्याएं पहले ही बताई जा चुकी होती हैं. यह घटना बताती है कि आज के समय में कर्मचारियों के लिए सिर्फ वेतन ही नहीं, बल्कि भरोसा, लचीलापन और वर्क-लाइफ बैलेंस भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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