सावधान! बेंगलुरु में घर लेने से पहले देख लें ये खबर, कहीं कपड़े सुखाना आपको भी न पड़ जाए महंगा

बेंगलुरु की आईटी सिटी में एक किराएदार की 'धूप' की चाहत ऐसी भारी पड़ी कि महज 15 दिन में ही मकान मालिक ने बेदखली का फरमान सुना दिया. 80 हजार रुपये पानी की तरह बहाने के बाद अब यह परिवार अपने हक और गीले कपड़ों के बीच फंसा है, जहां पड़ोसियों की हमदर्दी भी मकान मालिक के गुस्से को ठंडा नहीं कर पाई.

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बेंगलुरु का 'अजीब' मकान मालिक! कपड़े सुखाने पर मचा ऐसा बवाल कि 15 दिन में थमा दिया घर खाली करने का नोटिस
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Bengaluru Tenant Issue: क्या आपने कभी सुना है कि गीले कपड़े किसी के बेघर होने की वजह बन सकते हैं? आईटी सिटी बेंगलुरु में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने सबको सख्ते में डाल दिया है. एक किराएदार ने अपनी जेब से 80,000 रुपये ढीले किए, घर शिफ्ट किया और महज 15 दिन बाद उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. वजह जानकर आप अपना सिर पकड़ लेंगे. सारा फसाद सिर्फ कपड़ों को धूप दिखाने को लेकर शुरू हुआ.

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बेंगलुरु की भागदौड़ भरी जिंदगी में घर ढूंढना किसी जंग जीतने से कम नहीं है, लेकिन यहां के एक शख्स के लिए यह जंग 'त्रासदी' बन गई. 4 मार्च को बड़ी उम्मीदों के साथ यह परिवार नए आशियाने में शिफ्ट हुआ था. घर छोटा था, न बालकनी थी और न ही धूप का नामोनिशान. जब घर में छोटे बच्चे के कपड़े सुखाने की नौबत आई, तो असली ड्रामा शुरू हुआ. मकान मालिक ने छत इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया. अब मजबूरन किराएदार ने पड़ोसी की छत का सहारा लिया, जो मकान मालिक को 'नागवार' गुजरा और उसने सीधा घर खाली करने का फरमान सुना दिया.

80 हजार का चूना और बेघर होने का डर (Tenant Spent 80,000 Rupees Before Eviction Notice)

किरायेदार का दर्द सोशल मीडिया पर छलक पड़ा है. उसने बताया कि सिक्योरिटी डिपॉजिट के 50 हजार, ब्रोकर की 20 हजार की फीस और शिफ्टिंग के 10 हजार रुपये, यानी कुल 80 हजार रुपये पानी की तरह बह गए. महज 15 दिन में मिली इस बेदखली की धमकी ने परिवार की रातों की नींद उड़ा दी है. मकान मालिक की जिद ऐसी कि वह किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है, जबकि पड़ोसी ने खुद खुशी-खुशी अपनी छत देने की इजाजत दी थी.

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सोशल मीडिया पर कानूनी जंग की सलाह (Legal Advice and Public Reaction on Social Media)

जैसे ही यह दास्तां इंटरनेट पर वायरल हुई, लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. कुछ वकीलों ने इसे 'जबरन वसूली' का तरीका बताया है और किराएदार को सुझाव दिया है कि वह अपने पूरे 80 हजार रुपये वापस मांगे बिना घर न छोड़े. जानकारों का कहना है कि रेंट एग्रीमेंट की शर्तों के बिना किसी को 15 दिन में निकालना गैर-कानूनी है. अब यह मामला बेंगलुरु के 'रेंट कल्चर' पर एक नई बहस छेड़ चुका है कि क्या किराएदार सिर्फ पैसा देने वाली मशीन हैं? यह वाकया सबक है कि नया घर लेते वक्त सिर्फ दीवारों का पेंट न देखें, बल्कि धूप और हवा के हक पर भी बात साफ कर लें. फिलहाल, यह बेबस किराएदार इंसाफ और नए घर के बीच झूल रहा है.

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(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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