यमन: सऊदी और UAE समर्थित गुटों में खूनी संघर्ष, STC के 80 लड़ाके मारे गए, जेल तोड़ भागे अल-कायदा के आतंकी

मुकल्ला के एक प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि शहर के एक स्थानीय हिरासत केंद्र से अल-कायदा से जुड़े कम से कम 18 संदिग्ध आतंकवादी फरार होने में सफल रहे हैं.

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यमन: सऊदी और UAE समर्थित गुटों में खूनी संघर्ष में STC के 80 लड़ाके मारे गए, जेल तोड़ फरार हुए अल-कायदा के आतंकी 


अदन/रियाद: यमन में जारी गृहयुद्ध ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है. यहां हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक साथ लड़ने वाले दो खाड़ी सहयोगी, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) आमने-सामने हैं. शुक्रवार से शुरू हुए भीषण संघर्ष में अब तक UAE समर्थित 'सदन ट्रांजिशनल काउंसिल' (STC) के कम से कम 80 लड़ाके मारे गए हैं. यह जानकारी STC के एक सैन्य अधिकारी ने समाचार एजेंसी AFP को दी है.

सऊदी अरब की बड़ी सैन्य कार्रवाई सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों ने शुक्रवार को उन इलाकों को वापस लेने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया, जिन पर दिसंबर में अलगाववादी समूह STC ने कब्जा कर लिया था. सबसे भीषण हमले हद्रामौत प्रांत के अल-खाशा और बरशीद सैन्य शिविरों पर हुए. रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई हमलों में STC को भारी नुकसान हुआ है. अब तक STC के 152 लड़ाके घायल हुए हैं और करीब 130 को बंदी बना लिया गया है. दूसरी ओर, सऊदी समर्थित गुट के भी 14 लड़ाकों की मौत हुई है.

हद्रामौत और महरा पर सरकारी नियंत्रण 

यमन के राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को संसाधन संपन्न हद्रामौत प्रांत को वापस लेने की घोषणा की. सैन्य अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी महरा प्रांत के अधिकारियों ने भी बिना किसी प्रतिरोध के अपनी वफादारी वापस सरकार के प्रति घोषित कर दी है. रविवार को सरकारी बल हद्रामौत की राजधानी मुकल्ला में अपनी स्थिति मजबूत करते देखे गए.

जेल तोड़कर भागे अल-कायदा आतंकी 

इस भीषण अराजकता और युद्ध के बीच एक सुरक्षा चूक भी सामने आई है. मुकल्ला के एक प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि शहर के एक स्थानीय हिरासत केंद्र से अल-कायदा से जुड़े कम से कम 18 संदिग्ध आतंकवादी फरार होने में सफल रहे हैं. यह घटना क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बन सकती है.

सहयोगियों के बीच दरार यमन सरकार 

वास्तव में उन समूहों का एक गठबंधन है जिनका साझा दुश्मन ईरान समर्थित हूती विद्रोही हैं. लेकिन दिसंबर में STC द्वारा हद्रामौत और महरा पर कब्जे ने सऊदी अरब को नाराज कर दिया था, जिससे रियाद और अबू धाबी के बीच की दरार दुनिया के सामने आ गई. फिलहाल दोनों गुटों के बीच छिटपुट झड़पें जारी हैं और यमन में मानवीय संकट गहराता जा रहा है.

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