चीन का वो खतरनाक प्लान, जो 5 साल में उसे बना देगा 'सुपरपावर'... बिना गोली चलाए ही रुक जाएगा अमेरिका का F-35!

दुनिया जब ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट के संकट पर नजरें टिका कर बैठी है, तब चीन ने एक ऐसा प्लान पेश किया है जो उसे 5 साल में सुपरपावर बना देगा.

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डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग.
AFP
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  • चीन ने अपना 15वां फाइव-ईयर प्लान जारी किया है, जिसमें AI और ह्यूमैनॉइड रोबोटिक्स पर जोर दिया गया है
  • इसमें स्पेस क्वांटम कम्युनिकेशन, न्यूक्लियर फ्यूजन और ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस को विकसित करने का लक्ष्य रखा है
  • चीन का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में AI से जुड़ी इंडस्ट्री की वैल्यू को 10 ट्रिलियन युआन से अधिक बढ़ाना है
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नई दिल्ली:

क्या अमेरिका गलत जगह युद्ध लड़ रहा है? सवाल इसलिए क्योंकि अमेरिका जहां ईरान में लड़ने के लिए अरबों डॉलर खर्चा कर रहा है और दुनिया की नजरें तेल की कीमतों और मिसाइलों के रास्तों पर है, तब चीन ने चुपचाप एक ऐसा दस्तावेज जारी किया है जो दशकों तक पावर बैलेंस को बदल सकता है. चीन का 141 पन्नों का 15वां फाइव-ईयर प्लान उन टेक्नोलॉजी, मटैरियल और इंडस्ट्री पर हावी होने की एक बड़ी स्ट्रैटजी बताता है जिनसे नेक्स्ट जेनरेशन की इकनॉमिक और मिलिट्री ताकत तय होने की उम्मीद है. इस डॉक्यूमेंट को 5 मार्च को नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में पेश किया गया है.

इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट और राइटर शनाका एंसलेम पेरेरा ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'कोई ध्यान नहीं दे रहा है. यही बात है.' यह ब्लूप्रिंट एक रूटीन इकनॉमिक पॉलिसी डॉक्यूमेंट से कम और एक नेशनल टेक्नोलॉजिकल मोबिलाइजेशन जैसा ज्यादा लगता है.

क्या है चीन का प्लान?

इस दस्तावेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल किया गया है, जिसमें चीन अगले दशक में अपनी इकनॉमी के बड़े हिस्से में AI को शामिल करने की कोशिश का संकेत दे रहा है.

इसमें ह्यूमैनॉइड रोबोटिक्स को एक पिलर इंडस्ट्री बनाया गया है, जिसका प्रोडक्शन 5 साल के अंदर दोगुना होने की उम्मीद है. इस प्लान में चीन को स्पेस-अर्थ क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क बनाने, न्यूक्लियर फ्यूजन रिसर्च में तेजी लाने और ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने के लिए कमिट किया गया है.

इसमें अकेले AI से जुड़ी इंडस्ट्रीज की वैल्यू 5 साल में 10 ट्रिलियन युआन से ज्यादा होने की उम्मीद है, जो आज के एक्सचचेंज रेट के हिसाब से लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर होती है. यह पैमाना एक कोऑर्डिनेटेड नेशनल इंडस्ट्रियल पुश जैसा है जो फ्रंटियर टेक्नोलॉजी को मैन्युफैक्चरिंग और स्टेट पॉलिसी से जोड़ता है ताकि शॉर्ट-टर्म बैटलफील्ड एडवांटेज के बजाय लॉन्ग-टर्म आर्थिक ताकत बनाई जा सके.

पेरेरा का तर्क है कि स्ट्रैटेजी का दायरा ही इसे स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है. उन्होंने लिखा, 'यह कोई इकोनॉमिक प्लान नहीं है. यह एक ऐसे युद्ध का वॉर प्लान है जिसे अमेरिका नहीं लड़ रहा है.'

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अमेरिका क्या कर रहा है?

चीन की टेक्नोलॉजिकल बढ़त का अमेरिका के पास जवाब के रूप में चिप्स और साइंस एक्ट रहा है, जिस पर 2022 में साइन किया गया था. इस कानून ने घरेलू सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए 52.7 अरब डॉलर दिए, जिसमें 39 अरब डॉलर डायरेक्ट ग्रांट और लिबरल टैक्स इंसेंटिव शामिल हैं. इसने 140 से ज्यादा घोषित प्रोजेक्ट्स में सैकड़ों अरब डॉलर का प्राइवेट इन्वेस्टमेंट शुरू किया है और पूरे अमेरिका में बड़ी संख्या में हाई-स्किल्ड नौकरियां पैदा की हैं.

चीन की स्ट्रैटेजी बहुत बड़े एरिया में फैली हुई है। AI का मकसद पूरी इकनॉमी में फैलाना है, हेवी इंडस्ट्री से लेकर सर्विसेज तक. रोबोटिक्स का मकसद इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन को बढ़ाना है. यह प्लान क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर और सबसे जरूरी एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स खासकर रेयर अर्थ्स के लिए जरूरी रॉ-मटैरियल और प्रोसेसिंग कैपेसिटी में पैरेलल इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देता है.

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चीन की तुलना में अमेरिका के पास कुछ नहीं?

पेरेरा इस अंतर को आसान शब्दों में बताते हैं: 'CHIPS एक्ट एक राइफल है. फाइव-ईयर प्लान एक हथियारों का जखीरा है.'

रेयर-अर्थ मिनरल्स उस हथियारों के जखीरे के सेंटर में हैं. चीन अभी दुनिया के ज्यादातर रेयर-अर्थ एलिमेंट्स को प्रोसेस करता है. ये इलेक्ट्रिक गाड़ियों से लेकर गाइडेंस सिस्टम और कटिंग-एज रडार तक हर चीज के लिए जरूरी हैं. हर F-35 फाइटर जेट को अपने इंजन, सेंसर और वेपन सिस्टम में सैकड़ों पाउंड रेयर-अर्थ मेटल्स की जरूरत होती है. मिसाइल-डिफेंस बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक-वॉरफेयर सूट और प्रिसिजन-गाइडेड हथियार भी इन पर निर्भर करते हैं.

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उल्टी दिशा में चल रहा अमेरिका?

हाल के सालों में चीन ने लगातार अपनी पकड़ मजबूत की है. उसने ज्यादा रेयर-अर्थ एलिमेंट्स और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी को कवर करने के लिए एक्सपोर्ट-कंट्रोल सिस्टम को बढ़ाया है, लाइसेंस की जरूरतें और नए कम्प्लायंस नियम जोड़े हैं जो उसे ग्लोबल सप्लाई पर बारीक पकड़ देते हैं. वहीं, अमेरिका के डिफेंस प्रोक्योरमेंट नियम उल्टी दिशा में जा रहे हैं. जनवरी 2027 से पेंटागन कॉन्ट्रैक्ट्स में चीनी रेयर-अर्थ कंटेंट को धीरे-धीरे खत्म किया जाना है, जिससे अमेरिकी सप्लायर्स को दूसरे सोर्स ढूंढने या बनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

अमेरिका एक ही समय में ईरान जैसे झगड़ों में रेयर-अर्थ-हैवी हथियारों को जला रहा है और नई माइंस, प्रोसेसर और मैग्नेट प्लांट्स बनाने की कोशिश कर रहा है जो अभी बड़े पैमाने पर मौजूद नहीं हैं. 

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पेरेरा ने लिखा, 'ईरान युद्ध इंटरसेप्टर्स को खत्म कर रहा है. चीन उस सप्लाई चेन को मजबूत कर रहा है जिससे इंटरसेप्टर्स बनते हैं. फाइव-ईयर प्लान वह डॉक्यूमेंट है जो उस सख्ती को नेशनल स्ट्रैटेजी में बदल देता है.'

शी जिनपिंग के 141 पेज के रोडमैप का मकसद यह पक्का करना है कि आग और गुस्से को पहुंचाने के लिए ज़रूरी कई सामान अगले पंद्रह सालों तक चीन के कंट्रोल में रहें. एनालिस्ट का कहना है कि अगर चीन सामान, रोबोटिक्स और AI स्टैक को एक ही सरकार के कंट्रोल वाले सिस्टम में लॉक करने में कामयाब हो जाता है, तो अगली ग्लोबल सुपरपावर का मुकाबला खाड़ी में डॉगफाइट में नहीं, बल्कि सप्लाई चेन और फैक्ट्रियों के अंदर तय हो सकता है, F-35 के उड़ान भरने से बहुत पहले.

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