US-Israel Iran War : जिनेवा में शांति की बात और अब हमला, 48 घंटे में ऐसा क्या हुआ कि छिड़ गया महायुद्ध?

अमेरिका और ईरान के बीच दो दिन पहले जिनेवा में वार्ता हुई. मध्यस्थों ने 'महत्वपूर्ण प्रगति' और 'सकारात्मक बातचीत' के दावे किए. ट्रंप भी एक दिन पहले तक ईरान को और वक्त देने की बात कर रहे थे, फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि अमेरिका-इजरायल ने जंग छेड़ दी.

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  • मिडिल ईस्ट में युद्ध रोकने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की मध्यस्थता में जिनेवा में वार्ता हुई थी
  • अमेरिका ने ईरानी परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करने और मिसाइल प्रोग्राम खत्म करने जैसी कड़ी शर्तें रखीं
  • बैठक में सकारात्मक प्रगति के दावे किए जा रहे थे, ट्रंप ने खुद ईरान को और वक्त देने की बात कही थी
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अमेरिका और ईरान दो दिन पहले तक जिनेवा में बातचीत की टेबल पर बैठे थे. जंग से बचने का रास्ता निकालने के लिए माथापच्ची हो रही थी. मध्यस्थ दावा कर रहे थे कि बातचीत में 'महत्वपूर्ण प्रगति' हुई है, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप एक दिन पहले तक ईरान को और वक्त देने की बात कर रहे थे, लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि अमेरिका और इजरायल ने शनिवार की सुबह हमला बोल दिया. 

जिनेवा में हुई तीसरे दौर की वार्ता

अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच जिनेवा में तीसरे दौर की वार्ता गुरुवार को हुई थी. ये बैठक ओमान की मध्यस्थता में हुई. इस बैठक का एक ही मकसद था कि किस तरह मिडिल ईस्ट में जंग को टाला जाए. खबरें बताती हैं कि गुरुवार को जब बैठक शुरू हुई थी, अमेरिका के प्रतिनिधि ने अपनी नई शर्तों की लिस्ट ईरानी प्रतिनिधि को थमाई थी. 

अमेरिका ने क्या शर्तें सामने रखीं?

अमेरिका लगातार जोर दे रहा था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद कर दे. अपने तीनों एक्टिव परमाणु केंद्रों पर ताला लगा दे. इतना ही नहीं, उसने जो यूरेनियम एनरिच किया है, उसे भी अमेरिका को सौंप दे. इसके साथ ही अमेरिका ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को भी बंद करने का दबाव डाल रहा था. अमेरिका चाहता था कि ईरान हमास जैसे संगठनों को जो सपोर्ट कर रहा है, उसे भी बंद कर दे.

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ईरान ने क्या जबाव दिया?

अमेरिका की इन कड़ी शर्तों पर ईरान राजी नहीं हुआ. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के एक सलाहकार ने कहा भी था कि यदि जिनेवा वार्ता का विषय सिर्फ परमाणु हथियार न बनाने तक सीमित रहता है तो दोनों देशों के बीच तुरंत समझौता हो सकता है. ईरान हमेशा से परमाणु हथियारों से इनकार करता रहा है. उसका कहना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद नहीं कर सकता, क्योंकि ऊर्जा जरूरतों को पूरी करने के लिए ये जरूरी हैं. 

बिना डील के खत्म हुई वार्ता

ईरान ने ये भी साफ कर दिया था कि वह अपने लंबी दूरी के मिसाइल प्रोग्राम या हमास और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन के मुद्दों पर बैठक में चर्चा नहीं करेगा. टकराव के ऐसे ही मुद्दों पर जिनेवा वार्ता को करीब 3 घंटे की माथापच्ची के बाद एक बार बीच में रोकना पड़ा था. उसके बाद प्रतिनिधि फिर से बातचीत के लिए बैठे, लेकिन डील पर सहमति नहीं बन सकी. 

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मध्यस्थ ओमान बोला, पॉजिटिव संकेत

वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसादी ने कहा था कि बैठक में सकारात्मक संदेश दिख हैं. अगर सबकुछ सही रहा तो आगे चलकर डील की उम्मीद नजर आ रही है. उन्होंने अगले हफ्ते वियेना में टेक्निकल लेवल की बातचीत होने का भी इशारा किया था. उधर  ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा था कि अब तक जितनी भी वार्ता हुईं, उनमें ये बातचीत सबसे गंभीर थी. उन्होंने सकारात्मक उम्मीद जताते हुए दावा किया था कि आगे भी डिटेल में बातचीत करते रहेंगे, इस पर दोनों पक्षों में आपसी सहमति थी. 

ट्रंप के आगे वार्ता के संकेत, फिर हमला

शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा कि ईरान का मुद्दा सुलझाने के लिए आगे भी बातचीत होंगी. उनका कहना था कि हमें जो चाहिए, ईरान उसे देने के लिए तैयार नहीं है. इससे मैं बहुत खफा हूं. देखते हैं, आगे क्या होता है. ट्रंप ने धमकी भी दी कि अगर ईरान डील के लिए तैयार नहीं हुआ तो मिलिट्री एक्शन लिया जाएगा. ट्रंप ने ईरान को लेकर अपने इरादे काफी पहले जाहिर कर दिए थे. इसी के चलते वह मिडिल ईस्ट में ईरान की घेराबंदी कर रहे थे. उन्होंने मध्य पूर्व में अपनी सबसे बड़ी सैन्य तैनाती कर दी. अब शनिवार को उन्होंने दिखा दिया कि वह जो सोचते हैं, कर डालते हैं. 

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