ट्रंप के चीन दौरे पर 'कूड़ादान' क्यों बटोर रहा सुर्खियां? जानिए शी जिनपिंग से अमेरिका को क्या मिला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ताइवान को औपचारिक स्वतंत्रता की मांग करने के खिलाफ चेतावनी दी है. उन्होंने बीजिंग में अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा की थी.

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ट्रंप का चीन दौरा अब तक तो महज फोटो सेशन ही कहा जाएगा जब तक चीन कोई घोषणा नहीं करता.
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  • चीन-अमेरिका के बीच व्यापार समझौतों के बावजूद साइबर जासूसी को लेकर सुरक्षा खतरा बना हुआ है
  • डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान की औपचारिक स्वतंत्रता की मांग के खिलाफ चेतावनी दी और युद्ध टालने की बात कही
  • ट्रंप ने बताया कि बोइंग कंपनी चीन को लगभग 750 विमानों का बड़ा सौदा करने की योजना बना रही है
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2026 बीजिंग शिखर सम्मेलन की अंतिम तस्वीर हाथ मिलाने की नहीं, बल्कि कूड़ेदान की है. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के एयरफोर्स वन में सवार होने की तैयारी करते ही, अमेरिकी कर्मचारियों ने चीनी अधिकारियों द्वारा दी गई हर वस्तु (जिसमें पहचान पत्र, पिन और बर्नर फोन शामिल थे) को व्यवस्थित रूप से इकट्ठा किया और सीढ़ियों के नीचे रखे कूड़ेदान में फेंक दिया. संदेश साफ था कि चीन से आने वाली किसी भी चीज को राष्ट्रपति के विमान में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है.

चीन-अमेरिका में भरोसे की कमी

यह "डिजिटल शुद्धिकरण" पूर्ण अविश्वास का सीधा परिणाम है. अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने पूरी यात्रा के दौरान सख्त डिजिटल लॉकडाउन का पालन किया, और होटल के हर वाई-फाई कनेक्शन और दिए गए हर उपकरण को सीसीपी की निगरानी के लिए एक संभावित ट्रोजन हॉर्स के रूप में देखा. उड़ान भरने से पहले उपकरणों को फेंककर, व्हाइट हाउस ने संकेत दिया कि व्यापार समझौते भले ही हो जाएं, लेकिन बीजिंग की साइबर जासूसी से उत्पन्न सुरक्षा खतरा पहले की तरह ही बना हुआ है.

चीन से नजदीकी भी, दूरी भी

2026 की भू-राजनीति की इस महत्वपूर्ण दुनिया में, कूटनीति और संशय अब साथ-साथ हैं. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) खुद को ग्लोबल पार्टनर के रूप में देखना चाहती है, लेकिन अमेरिका की प्रतिक्रिया से पता चलता है कि उसे अभी भी एक प्रमुख खुफिया खतरे के रूप में देखा जाता है. हालांकि ग्रेट हॉल में कैमरे ने मुस्कुराते चेहरों को कैद कर लिया, लेकिन असलियत में सुरक्षा टीमों द्वारा यह सुनिश्चित करना था कि चीन का एक भी हार्डवेयर वाशिंगटन वापस नहीं पहुंचे.

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Photo Credit: White House/X

कैसा रहा ट्रंप का चीन दौरा

कुल मिलाकर देखें तो ट्रंप का चीन दौरा तस्वीरों और हेडलाइंस से ज्यादा कुछ नहीं दिखा. चीन की तरफ से अब तक कोई भी घोषणा नहीं की गई. हालांकि, ट्रंप जरूर बयान देते रहे. कुलमिलाकर ट्रंप चीन को ये संदेश देते दिखे कि उन्हें चीन से कोई दिक्कत नहीं अगर वो अमेरिका का साथ दे. वहीं चीन ने भी साफ कर दिया कि वो ताइवान के मसले पर अमेरिका की बिल्कुल नहीं सुनेगा. हां, और मुद्दों पर चीन अपना रुख अपने फायदे के हिसाब से नरम कर सकता है. ट्रंप के इन बयानों से इस बात को आसानी से समझा जा सकता है.

ताइवान पर ट्रंप का अब स्टैंड

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ताइवान को औपचारिक स्वतंत्रता की मांग करने के खिलाफ चेतावनी दी है. उन्होंने बीजिंग में अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा की थी. फॉक्स न्यूज के ब्रेट बेयर को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, "हम युद्ध नहीं चाहते हैं, और अगर आप इसे यथास्थिति में रखते हैं, तो मुझे लगता है कि चीन को इससे कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि कोई कहे, 'चलो स्वतंत्र हो जाते हैं क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका हमारा समर्थन कर रहा है.'"

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बोइंग विमानों का सौदा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर सम्मेलन से लौटते समय पत्रकारों को बताया कि विमान निर्माता कंपनी बोइंग लगभग एक दशक में चीन को अपना पहला बड़ा सौदा करेगी, जिसमें 200 विमानों का ऑर्डर शामिल है. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि शिखर सम्मेलन के दौरान हुए समझौते के तहत चीन को 750 बोइंग विमान खरीदने का अधिकार सुरक्षित है. व्हाइट हाउस ने विमानों के प्रकार या अन्य किसी भी जानकारी का खुलासा नहीं किया. हालांकि, ना तो चीनी सरकार और ना ही बोइंग ने खरीद समझौते की पुष्टि करते हुए कोई बयान जारी किया.

ईरान पर क्या चीन का रुख?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह जल्द ही ईरान से तेल खरीदने वाली चीनी तेल कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाने का फैसला करेंगे. पिछले महीने, अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने वाली कई स्वतंत्र तेल रिफाइनरियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे, जिनमें डालियान स्थित चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी भी शामिल है. ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ईरान पर चर्चा की और वे नहीं चाहते कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों और वे "जलडमरूमध्य को खुला रखना चाहते हैं." हालांकि, इस पर भी चीन की तरफ से कोई बयान नहीं आया.

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