पाकिस्तान सरकार और सेना अफगानिस्तान में 'युद्ध अपराध' करने की हद तक क्यों उतर आई है?

Pakistan Airstrike on Kabul Hospital: पाकिस्तानी एयर फोर्स ने काबुल के रीहैब सेंटर पर हमला किया. इसमें 400 से ज्यादा मरीज मारे गए, 250 घायल हैं.

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Pakistan Airstrike on Kabul Hospital: काबुल रिहैब हॉस्पिटल पर पाकिस्तान के हमले में 400 मरीजों की मौत
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  • पाकिस्तान ने तालिबान को दशकों तक समर्थन दिया था लेकिन अब उसे अपना बड़ा दुश्मन मानता है
  • काबुल के पुनर्वास अस्पताल पर पाकिस्तान के हमले में कम से कम चार सौ लोग मारे गए हैं
  • पाकिस्तान को एहसास हो गया है कि तालिबान 2021 के बाद एक अलग और अधिक स्वतंत्र समूह बन गया है
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पाकिस्तान दशकों से अफगानिस्तान पर अब शासन कर रहे तालिबान का सबसे करीबी दोस्त रहा है. यह इस्लामाबाद ही था जिसने 1990 के दशक की शुरुआत में तालिबान को जन्म देने में मदद की. लेकिन अब पाकिस्तान उसी तालिबान को अपना इतना बड़ा दुश्मन मान रहा है कि उसे चोट पहुंचाने के लिए वॉर क्राइम (युद्ध अपराध) की हद तक कदम उठाने से गुरेज नहीं कर रहा है. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने ‘‘सटीक हवाई हमले'' कर अफगानिस्तान भर में आतंकवादियों और उनके ठिकानों को निशाना बनाया है. हालांकि अफगान सरकार ने इस्लामाबाद पर काबुल में एक पुनर्वास अस्पताल पर बमबारी करने का आरोप लगाया, जिसमें कम से कम 400 लोग मारे गए हैं. सवाल है कि पाकिस्तान इस हद तक जाने को मजबूर क्यों हो गया?

पाकिस्तान ऐसा क्यों कर रहा?

न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार लंदन यूनिवर्सिटी में ईरानी और पाकिस्तान स्टडीज के एक्सपर्ट बुर्जिन वाघमार ने कहा कि पाकिस्तान को इस बात का गंभीर एहसास हो गया है कि नया तालिबान (2021 में अफगानिस्तान शासन में वापसी) पिछले तालिबान की तुलना में एकदम अलग समूह है. काबुल में ओमिड एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर पाकिस्तान के हवाई हमले पर वाघमार ने कहा कि पाकिस्तान को अब एहसास हो गया है कि अफगानिस्तान उसके लिए एक दबकर रहने वाला देश नहीं रहेगा.

पाकिस्तान के हमले में तबाह काबुल का रिहैब हॉस्पिटल

उन्होंने ANI को बताया, "पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते चीनी सरकार से स्पष्ट रूप से कहा था कि काबुल में बैठी तालिबान सरकार के साथ किसी भी तरह की चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि काबुल हमारी बुनियादी मांगों को भी पूरा करने से इनकार करता है... तालिबान 2.0 तालिबान 1.0 से बिल्कुल अलग है, जिसे पाकिस्तान ने बहुत गंभीर रूप से महसूस किया है. यह अफगानिस्तान पाकिस्तान का जागीरदार राज्य (जो दबकर रहे) या ग्राहक राज्य नहीं बनने जा रहा है. पाकिस्तान ने सोचा था कि वह अफगानिस्तान में तालिबान के आने से रणनीतिक पहुंच हासिल करेगा, यह एक ऐसी नीति है जिसे उसने दशकों से विकसित किया है, वास्तव में 1950 के दशक के बाद से ही.

लेकिन स्पष्ट रूप से, पाकिस्तान के लिए ठीक इसका उलट हुआ. रणनीतिक पहुंच लेने का पूरा सवाल ही ध्वस्त हो गया है...अभी के लिए, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान इससे छुटकारा पाने में विश्वास करता है, चाहे परिणाम कुछ भी हों. निश्चित रूप से पाकिस्तान जानता है कि वह सैन्य रूप से और आर्थिक रूप से भी अफगानिस्तान से बेहतर है.''

पाकिस्तान के हमले में तबाह काबुल का रिहैब हॉस्पिटल

इसी तरफ द गार्डियन में सईद शाह ने लिखा है कि अधिकारियों और एक्सपर्ट्स के अनुसार, अफगानिस्तान में ठिकानों के खिलाफ पाकिस्तान के बढ़ते हवाई हमलों का उद्देश्य तालिबान अधिकारियों को पाकिस्तानी आतंकवादियों के लिए अपना समर्थन छोड़ने के लिए मजबूर करना है. रणनीति यह है कि तालिबान सरकार को इतनी बड़ी चोट दी जाए कि वे अफगानिस्तान से होने वाले हमलों को रोकने के लिए कार्रवाई करें. हालांकि फिर भी इसमें हिंसा बढ़ने का खतरा है.

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