ट्रंप को किसी कीमत पर ग्रीनलैंड क्यों चाहिए? NATO सहयोगियों को ही देने लगे सैन्य धमकी- 4 वजहें

Why Donald Trump want Greenland: ग्रीनलैंड से लेकर यूरोपीय देश, जो खुद NATO सैन्य संगठन में अमेरिका के सहयोगी हैं, ट्रंप की सनक को देखकर डरे हुए हैं, खुलकर उनकी धमकियों की आलोचना कर रहे हैं.

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ग्रीनलैंड में ऐसा क्या है कि ट्रंप और उनकी टीम NATO सहयोगियों को ही सैन्य धमकी देने लगी?
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  • ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा दोहराई, जिससे डेनमार्क और यूरोपीय देशों में तनाव बढ़ा है
  • डेनमार्क के PM ने चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड पर बलपूर्वक कब्जा ट्रान्साटलांटिक सुरक्षा संबंधों को खत्म कर देगा
  • ग्रीनलैंड की भू-रणनीतिक स्थिति और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे के कारण यह अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में मिलिट्री ऑपरेशन चलाया. वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को उठाकर अमेरिका ले आया, उनकर संगीन आरोपों में केस चलाया जा रहा है. लेकिन इनसबके बावजूद उनकी सांसें फूली नहीं हैं, वो थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. अचानक से डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की जिद्द को दोहराना शुरू कर दिया है. ग्रीनलैंड से लेकर यूरोपीय देश, जो खुद NATO सैन्य संगठन में अमेरिका के सहयोगी हैं, ट्रंप की सनक को देखकर डरे हुए हैं, खुलकर उनकी धमकियों की आलोचना कर रहे हैं. ट्रंप की टीम भी इन NATO देशों को सैन्य धमकी दे रही है. 

सवाल है कि आखिर ग्रीनलैंड में ऐसा क्या है कि ट्रंप उसे अमेरिका में शामिल करने के लिए इस हद तक जा रहे हैं. यह जानने से पहले आपको बताते हैं कि ग्रीनलैंड पर कैसे पिछले 2 दिन में तनाव बढ़ गया है.

ग्रीनलैंड पर बढ़ा तनाव

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खनिज से समृद्ध आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी इच्छा दोहराए जाने के बाद, डेनमार्क के प्रधान मंत्री ने सोमवार को चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड को बलपूर्वक लेने का कोई भी अमेरिकी कदम 80 वर्षों के ट्रान्साटलांटिक सुरक्षा संबंधों को नष्ट कर देगा. यानी NATO नहीं बचेगा.

ट्रंप ने रविवार को कहा था कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से ग्रीनलैंड की जरूरत है और डेनमार्क ऐसा करने में सक्षम नहीं होगा. जवाब में, ग्रीनलैंड के प्रधान मंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने ट्रंप को पीछे हटने के लिए कहा, वहीं कई यूरोपीय देश और यूरोपीय संघ डेनमार्क का समर्थन करने के लिए सामने आ गए हैं.

इस विवाद पर ग्रीनलैंड के पक्ष में पूरा यूरोप खड़ा हो गया है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रवक्ता अनिता हिपर ने कहा कि गुट अपने सदस्यों की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. ब्रिटिश प्रधान मंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि "केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क साम्राज्य" ही इस क्षेत्र का भविष्य तय कर सकते हैं. फिनलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के नेताओं ने भी ट्रंप की आलोचना की है. फ्रांस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फ़्रेक्स ने कह, "सीमाओं को बल द्वारा नहीं बदला जा सकता". 

ट्रंप की पूर्व सहयोगी केटी मिलर द्वारा शनिवार को अमेरिकी झंडे के रंग में ग्रीनलैंड की एक ऑनलाइन तस्वीर पोस्ट करने के बाद विवाद और भड़क उठा है. साथ ही उन्होंने लिखा था- जल्द ही. मिलर ट्रंप के टॉप सलाहकार स्टीफन मिलर की पत्नी हैं, जिन्हें राष्ट्रपति की कट्टरपंथी इमिग्रेशन पॉलिसी के पीछे का असली दिमाग माना जाता है. जब मिलर से उनकी पत्नी के पोस्ट पर सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे यूरोपीय देशों को ही सैन्य धमकी दे दी. उन्होंने कहा, "ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर कोई भी संयुक्त राज्य अमेरिका से सैन्य रूप से लड़ने नहीं जा रहा है!"

आखिर ट्रंप को ग्रीनलैंड क्यों चाहिए?

  1. ट्रंप का कहना है कि यह द्वीप अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, और वो तर्क देते हैं कि डेनमार्क इसे ठीक से सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त खर्च नहीं कर रहा है. दरअसल ग्रीनलैंड अपनी भू-रणनीतिक स्थिति (जियोस्ट्रैटिजिक लोकेशन) के कारण महत्वपूर्ण है. एक अमेरिकी सैन्य अड्डा, जो मिसाइल रक्षा में माहिर है, वो इस द्वीप पर है.
  2. ग्रीनलैंड का अधिकांश भाग आर्कटिक सर्कल के अंदर है, जहां महाशक्तियां सैन्य और वाणिज्यिक प्रभुत्व दोनों के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं. द्वीप पर नियंत्रण करने से अमेरिका को एक अत्यंत महत्वपूर्ण नौसैनिक गलियारे में एक चौकी (आउटपोस्ट) मिल जाएगी जो अटलांटिक महासागर और आर्कटिक को जोड़ता है, जहां जलवायु परिवर्तन बर्फ को पिघला रहा है.
  3. ग्रीनलैंड में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों (रेयर अर्थ मिनर्ल्स) का भी विशाल भंडार है. एडवांस टेक्नोलॉजी का उपयोग करके बैटरी, सेलफोन, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य वस्तुएं बनाने के लिए ये महत्वपूर्ण घटक हैं. चूंकि इस मोर्चे पर चीन वैश्विक बाजार पर हावी है, अब अमेरिका आगे निकलना चाहता है. 
  4. यहां एक फैक्टर तेल वाला है और अमेरिका भला कैसे पीछे हटे. कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनलैंड के महाद्वीपीय शेल्फ के कुछ हिस्सों में आर्कटिक में सबसे बड़े न निकाले गए तेल और गैस भंडार हो सकते हैं. लेकिन ग्रीनलैंड की सरकार ने पर्यावरणीय जोखिमों और व्यावसायिक व्यवहार्यता की कमी के कारण देते 2021 में औपचारिक रूप से यहां से तेल-गैस निकालने के अपने प्रोजेक्ट को बंद कर दिया था.

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