US Navy to blockade Strait of Hormuz: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज के समुद्री रास्ते को बंद करने की धमकी दी है. अमेरिका की नौसेना ने एक बयान में कहा है कि वह सोमवार की शाम 7.30 बजे (भारतीय समयानुसार) नाकेबंदी शुरू कर देगी. होर्मुज बहुत महत्वपूर्ण तेल का रास्ता है, जिससे दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है. मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद से ही होर्मुज को ईरान ने लगभग पूरी तरह ब्लॉक कर रखा है यानी नाकेबंदी लगा रखी है. सवाल है कि जो ट्रंप अबतक बार-बार ईरान से कह रहे थे कि वह इस रास्ते को बिना किसी शर्त के खोल दे, अब वार्ता फेल हो जाने के बाद खुद उसे ब्लॉक करने में क्यों लग गए हैं? चलिए समझते हैं.
ट्रंप होर्मुज को कैसे बंद करना चाहते हैं?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि यह कार्रवाई ईरान में सोमवार को शाम 5:30 बजे (भारत में शाम के 7.30 बजे) से शुरू होगी. यह सभी देशों के उन जहाजों पर लागू होगी जो ईरान के बंदरगाहों या तटीय इलाकों में आ-जा रहे हैं, जिसमें अरब सागर और ओमान की खाड़ी के ईरानी बंदरगाह शामिल हैं. सेंट्रल कमांड ने कहा कि जो जहाज ईरान के अलावा दूसरे देशों के बंदरगाहों के बीच जा रहे हैं, उन्हें इस रास्ते से गुजरने दिया जाएगा. यानी ट्रंप की पहले की पूरी तरह बंद करने वाली धमकी से यह थोड़ा कम सख्त है.
यानी कुल मिलाकर अमेरिकी सेना उन जहाजों को रोकेगी जो ईरान के साथ व्यापार में लगे हैं. अमेरिका के नेवल वॉर कॉलेज के प्रोफेसर जेम्स क्रास्का के अनुसार, युद्ध के समय देशों को “जांच और तलाशी” का अधिकार होता है. इसका मतलब है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही जहाजों को रोककर उनकी जांच कर सकते हैं और तय कर सकते हैं कि उन्हें आगे जाने देना है या नहीं. क्रास्का ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि अगर अमेरिका होर्मुज में नाकेबंदी करता है, तो वहां से गुजरने वाले हर जहाज को जांच के लिए रुकना पड़ सकता है, और अमेरिका तय करेगा कि उसे जाने देना है या नहीं.
ट्रंप होर्मुज को क्यों रोकना चाहते हैं?
एकदम आसान भाषा में कहें तो ट्रंप नहीं चाहते कि ईरान कोई फायदा कमाए. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान कुछ जहाजों को जाने दे रहा है और कुछ टैंकरों से प्रति जहाज लगभग 20 लाख डॉलर तक फीस ले रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि वह ज्यादातर अपने ही तेल को इस रास्ते से बाहर जाने दे रहा है. मार्च में युद्ध शुरू होने के बाद, तेहरान रोजाना औसतन 18.5 लाख बैरल तेल निर्यात कर रहा था, जो पहले से ज्यादा है. यह जानकारी डेटा कंपनी क्लेपलर के अनुसार है. यानी जंग में होर्मुज पर कंट्रोल दिखाकर ईरान ने फायदा कमाया है.
अब आप सोच रहे होंगे कि अमेरिका ने पहले ऐसा क्यों नहीं किया. दरअसल अमेरिका अभी तक ऐसा करने से बच रहा ता, क्योंकि अगर इस रास्ते को बंद किया गया तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बहुत बढ़ जाएंगी. इसी वजह से अमेरिकी नौसेना अब तक ईरानी टैंकरों को जाने दे रही है, ताकि बाजार में तेल की सप्लाई बनी रहे और कीमतें ज्यादा न बढ़ें. युद्ध शुरू होने के बाद मार्च में अमेरिका ने ईरान पर कुछ पाबंदियां भी हटा दी थीं, ताकि वह टैंकरों में जमा तेल बेच सके.
लेकिन अब कुछ आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के तेल को पूरी तरह रोक देना चाहिए, ताकि उसका इस रास्ते पर नियंत्रण खत्म हो जाए. रॉबिन जे ब्रूक्स ने कहा कि ईरान अपनी अर्थव्यवस्था के लिए तेल पर निर्भर है, इसलिए अगर उसे नुकसान होगा तो वह जहाजों पर हमला जारी नहीं रख पाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसी नाकेबंदी “ईरान के पूरे बिजनेस मॉडल को गिरा सकता है.” हालांकि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि इससे तेल और गैस की कीमतें और आसमां छू सकती हैं.
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