संसद का सामना क्यों नहीं करते राष्ट्रपति? ट्रंप टैरिफ को कोर्ट से रद्द करवाने वाले नील कात्याल ने साधा निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था. अमेरिका के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कात्याल ने टैरिफ केस में पीड़ित कंपनियों का पक्ष अदालत में रखा था.

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Neal Katyal
न्यूयॉर्क:

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अदालती झटके के बाद  अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर 15 फीसदी टैरिफ दुनिया भर के देशों पर लगा दिया है. ट्रंप टैरिफ ऑर्डर को अदालत में चुनौती देकर जीत हासिल करने वाले भारतीय मूल के वकील नील कात्याल ने नए आदेश को लेकर उनकी आलोचना की है. कात्याल ने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति को अब टैरिफ लगाना है तो उन्हें संसद से मंजूरी लेनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ खारिज करने के बाद उन्हें कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. अगर उन्हें टैरिफ सही लगता है तो वो संसद क्यों नहीं जाते. संविधान यही कहता है कि राष्ट्रपति को ऐसे फैसलों में संसद की मंजूरी लेनी होगी. 

सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के रेसिपोकल टैरिफ को असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था. इसके बाद ट्रंप ने सेक्शन 122 का इस्तेमाल कर सभी देशों पर 10 फीसदी टैरिफ का ऐलान कर दिया था, जिसे 10 घंटों के भीतर बढ़ाकर 15 फीसदी करने की घोषणा भी कर दी. 

नील कात्याल और उनके सहयोगी प्रतीक शाह ने ट्रंप के टैरिफ ऑर्डर के मामले में जोरदार तरीके से पैरवी की थी. भारतीय मूल के नील कात्याल प्रतिष्ठित अमेरिकी वकील और कानूनी विशेषज्ञ हैं. वो ओबामा प्रशासन के दौरान अमेरिका के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल भी रहे हैं. यह अमेरिका के न्याय विभाग में एक बहुत ही प्रभावशाली पद होता है, जो सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखता है.

सुपरस्टार लॉयर कहे जाने वाले कात्याल के नाम  अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक बार बहस की है.किसी भी अन्य भारतीय-अमेरिकी या अल्पसंख्यक वकील की तुलना में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज्यादा बार पैरवी की है.

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उन्होंने गुआंतानामो बे (Guantanamo Bay) के कैदियों के सैन्य ट्रिब्यूनल के खिलाफ केस लड़ा और जीता. यह अमेरिकी कानूनी इतिहास का एक ऐतिहासिक फैसला माना जाता है.उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कई नीतियों जैसे ट्रैवल बैन के खिलाफ भी अदालतों में मजबूती से पक्ष रखा था.

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कात्याल का जन्म अमेरिका के शिकागो में हुआ था, उनके माता-पिता भारत (पंजाब) से अमेरिका जाकर बस गए थे. उनकी माँ एक बाल रोग विशेषज्ञ और पिता एक इंजीनियर थे. वो 'होगन लवल्स' (Hogan Lovells) नामक लॉ फर्म में पार्टनर हैं. साथ ही जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर भी हैं. कात्याल अक्सर अमेरिकी न्यूज़ चैनलों पर कानूनी विश्लेषक के रूप में नजर आते हैं.
 

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