न शेयर हो सकता है, न ट्रांसफर... मगर अब तक 5 बार बिक चुके हैं नोबेल पुरस्कार, जानें कब-किसने खरीदे

नॉर्वे की नोबेल समिति का कहना है कि एक बार पुरस्कार की घोषणा होने के बाद इसे न तो बदला जा सकता है और न ही किसी और के नाम किया जा सकता है. भले ही पदक अपना मालिक बदल ले.

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  • वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को अपना नोबेल शांति मेडल भेंट किया
  • नोबेल समिति के मुताबिक, इसे ट्रांसफर या साझा नहीं किया जा सकता, भले ही पदक अपना मालिक बदल ले
  • इतिहास में पांच बार नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने अपने पदक को नीलामी के जरिए मोटी रकम लेकर बेचा है
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आखिरकार नोबेल मिल ही गया. नोबेल पुरस्कार समिति से न सही, वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पदक ट्रंप को भेंट कर दिया है. आपको जानकर हैरानी होगी कि नोबेल पुरस्कार को न तो किसी से शेयर किया जा सकता है, न ही किसी को ट्रांसफर किया जा सकता है. लेकिन इसे बेचा जा सकता है. चौंकिए नहीं, अब तक 5 बार ऐसा हो चुका है, जब नोबेल पुरस्कार जीतने वाले लोगों ने मोटी रकम लेकर इसे बेचा है. 

वेनेजुएला की नेता ने ट्रंप को भेंट किया नोबेल पदक

वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने व्हाइट हाउस में बंद कमरे में हुई मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल भेंट किया. उन्होंने इसे दोनों देशों की आजादी की साझा लड़ाई का ऐतिहासिक प्रतीक बताया. उन्होंने बताया कि दो सदी पहले फ्रांसीसी जनरल मार्क्विस डी लाफिएट ने वेनेजुएला के स्वतंत्रता नेता सिमोन बोलिवर को जॉर्ज वाशिंगटन की तस्वीर वाला एक मेडल उपहार में दिया था. अब 200 साल के बाद बोलिवर के लोग वाशिंगटन के उत्तराधिकारी को यह पदक लौटा रहे हैं. ट्रंप ने इसे अपने लिए सम्मान बताया. 

18 कैरेट के 175 ग्राम गोल्ड से बनता है पदक

नोबेल पुरस्कारों को दुनिया का सबसे प्रसिद्ध सम्मान माना जाता है. फिजिक्स, केमिस्ट्री, फिजियोलॉजी या मेडिसिन, साहित्य और शांति के क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जाता है. इसकी शुरुआत 1901 में हुई थी. 1969 से इकोनॉमी का नोबेल पुरस्कार भी दिया जाने लगा. नोबेल शांति पुरस्कार स्वीडिश आविष्कारक और उद्यमी अल्फ्रेड नोबेल द्वारा 1895 में अपनी वसीयत में स्थापित किए गए पुरस्कारों में सबसे प्रसिद्ध है. इसमें 18 कैरेट का स्वर्ण पदक और एक मिलियन डॉलर से अधिक की राशि विजेता व्यक्ति या संगठन को दी जाती है. 1980 तक ये पदक 23 कैरेट सोने के बने होते थे और लगभग 200 ग्राम वजनी होते थे, लेकिन बाद में इन्हें 18 कैरेट के रीसाइकल्ड गोल्ड से बनाया जा रहा है और इनका वजन करीब 175 ग्राम होता है. 

क्या किसी को दे सकते हैं नोबेल पुरस्कार?

नॉर्वे की नोबेल समिति ने पिछले हफ्ते ही पुरस्कार के नियमों को लेकर स्थिति साफ की थी. समिति के मुताबिक, नोबेल पुरस्कार कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे किसी के साथ साझा किया जा सके या किसी दूसरे को ट्रांसफर किया जा सके. नोबेल समिति के मुताबिक, एक बार पुरस्कार की घोषणा होने के बाद इसे न तो बदला जा सकता है और न ही किसी और के नाम किया जा सकता है. पदक भले ही अपना मालिक बदल ले, लेकिन नोबेल विजेता का आधिकारिक टाइटल हमेशा उसी व्यक्ति के पास रहता है, जिसे वह दिया गया था. हालांकि नियमों की इस सख्ती के बावजूद इतिहास में ऐसे 5 प्रमुख मौके आ चुके हैं, जब नोबेल पदक को नीलामी के जरिए बेच दिया गया. 

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कब-कैसे बिका नोबेल पुरस्कार?

दिमित्री मुरातोव (2022): रूसी पत्रकार मुरातोव ने यूक्रेन युद्ध से प्रभावित बच्चों की मदद के लिए अपना नोबेल शांति पदक नीलाम कर दिया था. न्यूयॉर्क में जून 2022 में हुई नीलामी में एक अज्ञात खरीदार ने इसे रिकॉर्ड 103.5 मिलियन डॉलर में खरीदा. मुरातोव ने यह पूरी रकम यूक्रेन के शरणार्थी बच्चों की मदद के लिए यूनिसेफ को दान कर दी.

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जेम्स वॉटसन (2014): जेम्स वॉटसन को डीएनए संरचना की खोज के लिए नोबेल मिला था. वह जीवित रहते हुए अपना पदक बेचने वाले पहले विजेता बने. उन्होंने इसे 4.76 मिलियन डॉलर में इसे रूसी अरबपति अलीशेर उस्मानोव को बेचा था. हालांकि विवाद होने पर उस्मानोव ने बाद में वॉटसन को सम्मान स्वरूप पदक वापस गिफ्ट कर दिया था.

फ्रांसिस क्रिक (2013): वॉटसन के साथ डीएनए की खोज में योगदान के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक को नोबेल मिला, जिसे उनके परिवार ने उनकी मौत के बाद नीलाम कर दिया. चीन की एक बायोमेडिकल कंपनी के सीईओ जैक वांग ने 2.27 मिलियन डॉलर में इसे खरीदा था. नीलामी से मिली राशि को विभिन्न संस्थानों में वैज्ञानिक खोजों के लिए दान कर दिया गया.

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जॉन नैश (2019): 'ए ब्यूटीफुल माइंड' फिल्म से मशहूर हुए गणितज्ञ जॉन नैश को अर्थशास्त्र में नोबेल मिला था, जो बाद में क्रिस्टी की नीलामी के जरिए 7.35 लाख डॉलर में बिका. उनके निधन के बाद उनके परिवार ने विरासत को संभालने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इसे बेचने का फैसला किया था.

नील्स बोहर (1940): महान फिजिसिस्ट नील्स बोहर ने परमाणु संरचना पर अनूठे काम के लिए नोबेल मिला था. उन्होंने फिनलैंड युद्ध राहत के लिए रकम जुटाने के इरादे से इसे नीलाम कर दिया था. एक अज्ञात खरीदार ने इसे खरीदा और बाद में डेनमार्क के एक म्यूजियम को सौंप दिया, जहां ये आज भी सुरक्षित है.

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