40 साल तक जिगरी दोस्त थे अमेरिका और वेनेजुएला, फिर कैसे बने जानी दुश्मन, तेल के खजाने ने लगाई आग?

Venezuela News: अमेरिका औरवेनेजुएला कभी बेहद करीबी दोस्त थे, दोनों देश एक दूसरे की शान में कसीदे काढ़ते थे, लेकिन फिर ह्यूगो शावेज और निकोलस मादुरो के शासनकाल में तनाव बढ़ता चला गया.

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US venezuela attack
नई दिल्ली:

Venezuela News in Hindi: अमेरिका और लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला के रिश्तों में उतार-चढ़ाव की कहानी ईरान जैसी ही है. ईरान की तरह वेनेजुएला भी कभी अमेरिका का जिगरी दोस्त हुआ करता था. शीत युद्ध के वक्त जब अमेरिका और सोवियत संघ में टकराव चरम पर था, तब तेल के खजाने से भरा देश वेनेजुएला अमेरिकी नेताओं के साथ डटा था. वेनेजुएला जहां तेल के खजाने से अमेरिकी कंपनियां मालामाल हो रही थीं, वहीं लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर अमेरिका उसे घातक हथियार बेच रहा था. लेकिन 25 साल पहले कहानी ऐसे पलटी कि दोनों देश एक दूसरे के जानी दुश्मन बन गए.

निक्सन पर हुआ था हमला

1958 में जब तत्कालीन अमेरिकी उप राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन वेनेजुएला की राजधानी कराकस की यात्रा पर थे, तभी रास्ते में अचानक उनके काफिले पर उग्र भीड़ ने धावा बोल दिया था. वेनेजुएला की जनता सत्ता से बेदखल तानाशाह को अमेरिका में पनाह दिए जाने से नाराज थी. निक्सन को मौत दो के नारे लग रहे थे. भीड़ ने डंडे, पाइप, जो भी मिला, उससे हमला किया. निक्सन को भी लगा कि मौत नजदीक थी, लेकिन किस्मत से वो बच निकले.

तेल खनन और कारोबार पर निशाना

अमेरिका ने आनन-फानन में अपना विमानवाहक पोत वेनेजुएला की ओर भेजा ताकि इमरजेंसी में निक्सन को वहां से निकाला जा सके. विदेशी मेहमान पर ऐसे हमले से घबराई वेनेजुएला की सरकार ने निक्सन को रोकने को खूब कोशिश की. वेनेजुएला सरकार ने तब अमेरिका को खुश करने के कई जतन किए. अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला में तेल खनन और कारोबार में पहुंच मिली.वहां लोकतांत्रिक सरकार की मजबूती और कम्युनिस्ट ताकतों को विफल करने के नाम पर अमेरिका ने उसे हथियार दिए. दोनों देशों की ये दोस्ती करीब 40 सालों तक बदस्तूर चलती रही.

Hugo chavez

तेल की मुनाफाखोरी अमेरिकी कंपनियों ने की

NYT रिपोर्ट के मुताबिक, सोवियत संघ के शीत युद्ध के दौर में वेनेजुएला का तेल का भंडार भी अमेरिका के लिए मददगार साबित हुआ. अमेरिका ने वेनेजुएला को स्वाभाविक साझेदार बताया. वहां अमेरिकी तेल कंपनियों ने भारी निवेश किया. 1959 में क्यूबा में फिदेल कास्त्रो की जीत से भयभीत अमेरिका किसी भी कीमत पर वेनेजुएला को कम्युनिस्टों के हाथों में नहीं पड़ने देना चाहता था. 1963 में क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने वेनेजुएला के तत्कालीन प्रेसिडेंट रोमुलो बेटनकोर्ट के लिए राजकीय भोज में खूब मेहमाननवाजी की. वेनेजुएला को दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप में अमेरिका का सबसे सच्चा दोस्त बताया.

F-16 लड़ाकू विमान वेनेजुएला को दिए

तेल में मुनाफे के बदले अमेरिका ने वेनेजुएला को एफ-4 फैंटम 2 जैसे लड़ाकू विमान 1971 में दिए. भविष्य में अमेरिकी कंपनियों को खतरा होने की चेतावनी को भी कैनेडी सरकार ने नजरअंदाज किया. वेनेजुएला ने उस वक्त अपनी तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया. अमेरिकी कंपनियों को मुआवजे में तब 1 अरब डॉलर दिए गए. हालांकि अमेरिकी सरकार तब भी नहीं जागी. खाड़ी देशों के तेल उत्पादकों की तरह वेनेजुएला को अपने पाले में रखने के लिए अमेरिका ने खूब हथियार दिए.

अमेरिका के नए रिपब्लिकन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने वेनेजुएला को पूरे दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप में वामपंथी ताकतों को हराने की जंग में सबसे बड़ा उदाहरण तक बताया. रीगन काल में अमेरिका ने 1981 में वेनेजुएला को 24 एफ-16 लड़ाक विमान बेचे, जो उस दशक में अमेरिका की किसी देश के साथ आर्म्स की सबसे बड़ी डील थी.

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अमेरिकी तेल कंपनियों को खूब मुनाफा

फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी में वेनेजुएला मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर ब्रायन फोंसेका के मुताबिक, अमेरिकी सरकार वेनेजुएला में भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघनों पर आंखें मूंदे थी और वहां धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा था, जिसका फायदा कम्युनिस्ट ताकतों ने उठाया. सोवियत संघ का विघटन हुआ तो अमेरिका वेनेजुएला को लेकर और लापरवाह हो गया. वेनेजुएला अमेरिका को बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश बना रहा और उसने बड़ी प्राइवेट ऑयल कंपनियों खासकर अमेरिकी फर्म को पहुंच प्रदान की. उन्हें मुनाफे में हिस्सेदार बनाया. 1990 में वेनेजुएला ने अमेरिका को तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब को भी पछाड़ दिया.

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ह्यूगो शावेज सत्ता में आए

वेनेजुएला की जनता में पनप रहे इसी असंतोष का फायदा वामपंथी नेता ह्यूगो शावेज ने उठाया. दिसंबर 1998 के चुनाव में शावेज ने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया.कास्त्रो को अपना नेता मानने वाले शावेज ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग और गरीबी हटाने का वादा कर सत्ता हासिल की थी. तेल के खजाने के बावजूद वेनेजुएला की जनता बेहद गरीबी और बेरोजगारी में जिंदगी बिता रही थी. शावेज ने बड़े संवैधानिक और आर्थिक सुधारों की शुरुआत की.

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शावेज के तख्तालपलट का प्रयास नाकाम

वामपंथी झुकाव वाले शावेज के सत्ता संभालने पर अमेरिका ने तब सावधानी भरी प्रतिक्रिया दी. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 1999 में शावेज की व्हाइट हाउस में मेजबानी भी की. शावेज ने भी अमेरिका से अच्छे रिश्ते बनाए रखने का संकेत दिया. लेकिन 2002 में जब शावेज के तख्तापलट का प्रयास हुआ तो बाजी पलट गई.

वेनेजुएला में शावेज सरकार

शावेज उस वक्त वेनेजुएला में पूंजीवादी आर्थिक सुधारों की जगह कठोर सरकारी नियंत्रण वाला वामपंथी एजेंडा लागू कर रहे थे, तभी अमीर पूंजीपतियों, सैन्य अफसरों और कारोबारी नेताओं ने बड़े आंदोलन के बीच उनकी गिरफ्तारी करवा दी. लेकिन शावेज समर्थकों की उससे बड़ी भीड़ राजधानी में आ गई और ये तख्तापलट दो दिन में ही फेल हो गया. शावेज ने फिर सत्ता संभालते ही राजनीतिक विरोधियों को कुचलने के साथ लोकतांत्रिक मॉडल की जगह कठोर शासन की नींव रखी.

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Nicolas Maduro

जॉर्ज बुश पर फूटा गुस्सा

शावेज के सीधे निशाने पर अमेरिका आया. उन्होंने तब के अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन पर इस तख्तापलट की मदद का आरोप लगाया. वर्ष 2004 में जारी संवेदनशील दस्तावेजों से इस पर मुहर लगी कि अमेरिकी सरकार को इसकी भनक लग चुकी थी. हालांकि उसने शावेज को असंवैधानिक तरीके से हटाने को लेकर विपक्षी दलों को आगाह भी किया था. शावेज ने 2006 में यूएन महासभा के भाषण में सीधे बुश को निशाने पर लिया था और उन्हें शैतान तक कह डाला था.

तेल उद्योग पर सरकारी नियंत्रण

शावेज सरकार ने निजीकरण खत्म कर वेनेजुएला की ऑयल इंडस्ट्री पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाया और विदेशी कंपनियों को छोटी हिस्सेदारी में ही संयुक्त उपक्रम चलाने का ऑफर दिया. अमेरिकी कंपनी एक्सनमोबिल और कोनोकोफिलिप्स ने ये पेशकश ठुकराई तो उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई. सस्ते तेल-गैस जैसे कदमों से शावेज की शोहरत बढ़ती गई.

अमेरिका के धुर विरोधी एकजुट

शावेज के उत्तराधिकारी मादुरो भी उनके ही नक्शेकदम पर चले. अमेरिका ने वेनेजुएला को अलग-थलग करने और वहां फिर से लोकतांत्रिक सरकार की बहाली को लेकर प्रयास तेज कर दिए तो वेनेजुएला ने अमेरिका के विरोधी रूस, चीन, क्यूबा, उत्तर कोरिया से रिश्ते मजबूत करने शुरू कर दिए.

ट्रंप और मादुरो के बीच तल्खी

डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा शासनकाल में अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तल्खी बढ़ गई. ट्रंप ने मादुरो पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करों और आपराधिक गिरोहों को संरक्षण देने का आरोप लगाया. नवंबर आते-आते ट्रंप ने वेनेजुएला में हमले के लिए विमानवाहक पोत और युद्धपोत रवाना कर दिए. अमेरिकी नेवी ने वेनेजुएला से आ रहीं कई नौकाओं को ड्रग्स से जुड़ा बताकर तबाह कर दिया, इन घटनाओं में 93 लोगों की मौत हो गई. आखिरकार 02 जनवरी की रात अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर दिया. यूएस डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने का दावा किया है.