- ईरान के लगातार हमलों के कारण पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है
- अमेरिकी सैनिकों को सुरक्षित चौकियां छोड़कर होटलों और दफ्तरों में शरण लेनी पड़ी है
- ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को ठहराने वाले होटलों को निशाना बनाने की धमकी दी है
अमेरिका और इजरायल ने ईरान को चाहे जितना तबाह किया हो, लेकिन पश्चिम एशिया के अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के तेज हमलों ने अमेरिकी सैनिकों के पांव भी उखाड़ दिए हैं. इन हमलों के बाद अमेरिकी सेना को कई बेस खाली करने पड़े. खाड़ी देशों में मौजूद अब तक कम से कम 13 सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है. कई जगहों पर इमारतें और सैन्य ढांचे बुरी तरह तबाह हैं. कहीं-कहीं तो स्थिति इतनी खराब हो गई कि अमेरिकी सैनिकों को अपनी सुरक्षित चौकियां छोड़नी पड़ीं. उन्हें होटलों और दफ्तरों में शरण लेनी पड़ी. इससे जंग का तरीका भी बदल गया है. अब तो ईरान ने सीधी धमकी दी है कि जिन होटलों में अमेरिकी सैनिकों को मिडिल ईस्ट में ठहराया जाएगा उनको ईरान निशाना बनाएगा. ईरान ने पश्चिम एशिया के होटल मालिकों को भी चेतावनी दी है वो अपने यहां अमेरिकी सैनिकों को न ठहराएं. उधर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने आज भी ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के प्रमुख सैन्य ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से निशाना बनाया.
अब होटलों से 'रिमोट वॉर'
अब इस लड़ाई को रिमोट वॉर यानी दूर से लड़ी जाने वाली जंग कहा जा रहा है. यानी सैनिक मैदान में कम और दूर बैठकर ज्यादा ऑपरेशन कर रहे हैं. इसकी वजह यह भी है कि कई खाड़ी देशों में अमेरिकी फौजी अड्डे या तो पूरी तरह नष्ट हो गए हैं या असुरक्षित हो चुके हैं. इस कारण हजारों अमेरिकी सैनिक अलग-अलग जगहों पर बिखर गए हैं. खबर है कि कुछ सैनिकों को यूरोप भेज दिया गया है. बाकी सैनिक वेस्ट एशिया में ही मौजूद हैं. लेकिन अब ऐसी भी खबरें आ रही है कि वे अब अपने असली बेस से काम नहीं कर रहे हैं. वे किसी दूसरी सुरक्षित जगहों से ऑपरेशन चला रहे हैं.
Iran War
ईरान लगातार अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बना रहा निशाना
इस मामले पर अमेरिकी अखबार द न्यूयार्क टाइम्स से बात करते हुए अमेरिकी सैनिकों और अधिकारियों ने कहा कि ईरान ने पूरे पश्चिम एशिया में बमबारी की है. इस वजह से सैनिकों को होटलों और ऑफिसों में रहना पड़ रहा है. अब जमीन पर मौजूद ज्यादातर सेना दूर से ही जंग लड़ रही है. इन हालात के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन का कहना है कि ऑपरेशन की रफ्तार बढ़ाई जा रही है. वहीं अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिका ने अब तक 7 हजार से ज्यादा हमले किए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार ईरान और उसके सैन्य ढांचे को निशाना बना रहा है. आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लिखा कि इस युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिकी सैनिक गल्फ कॉपरेशन काउंसिल में अपने मिलिट्री बेस छोड़कर होटलों और दफ्तरों में छिपने के लिए भाग गए. उन्होंने अमेरिकी सैनिकों पर खाड़ी सहयोग परिषद देशों के लोगों को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
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ईरान ने कहां-कहां किए हमले?
यह सच है कि पिछले 28 दिनों में ईरानी हमलों से कई अहम अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंचा है. कुवैत में पोर्ट शुएबा, अली अल सलेम एयर बेस और कैंप ब्यूहरिंग पर जोरदार हमले हुए. पोर्ट शुएबा में एक टैक्टिकल ऑपरेशन सेंटर पूरी तरह नष्ट हो गया. इस हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई. कतर के अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड के अल उदीद एयर बेस पर भी मिसाइल और ड्रोन से हमला हुआ. इससे वहां का एक अहम रडार सिस्टम खराब हो गया. बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के बड़े अड्डे को ईरानी ड्रोन ने खासा नुकसान पहुंचाया. यहां पर अमेरिकी सेना की फिफ्थ फ्लीट का हेडक्वार्टर भी है. सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस भी हमले की चपेट में आया. यहां ईंधन भरने वाले टैंकर और कम्युनिकेशन सिस्टम प्रभावित हुए. कुल मिलाकर ईरान के हमलों ने पूरे इलाके में अमेरिकी सैन्य व्यवस्था को हिला दिया है. साफ है कि जंग अब नए तरीके से लड़ी जा रही है.
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