हनुमान जी की 90 फुट ऊंची मूर्ति से फिर डरे अमेरिका के नफरती कट्टर, ट्रंप की पार्टी के नेता ने दिया भड़काऊ बयान

अमेरिका के टेक्सास के एक शहर में भगवान हनुमान की 90 फुट की मूर्ति है जिसे 'स्टैच्यू ऑफ यूनियन' के नाम से जाना जाता है. ट्रंप की पार्टी के नेता बार-बार इसपर निशाना साधते हैं.

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हनुमान जी की 90 फुट ऊंची मूर्ति से फिर डरे अमेरिका के नफरती कट्टर
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  • टेक्सास के शुगर लैंड शहर में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनियन के नाम से जानी जाती है
  • यह मूर्ति पंचलोहा अभय हनुमान के रूप में 2024 में अनावरण की गई और अमेरिका की तीसरी सबसे ऊंची हिंदू प्रतिमा है
  • रिपब्लिकन नेता कार्लोस टुरसियोस ने इस मूर्ति पर विवादित टिप्पणी करते हुए इसे अमेरिका पर कब्जा बताने की बात कही
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अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी- रिपब्लिकन पार्टी के एक और नेता ने टेक्सास में बने हिंदू भगवान हनुमान की मूर्ती पर विवादित टिप्पणी कर दी है. आज से तकरीबन 5 महीने पहले टेक्सास के रिपब्लिकन नेता अलेक्जेंडर डंकन ने अमेरिका को एक ईसाई देश बताते हुए हिंदू देवता की मूर्ति के निर्माण पर आपत्ति जताई थी. अब ट्रंप के मिशन, MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) के एक्टिविस्ट और रिपब्लिकन नेता कार्लोस टुरसियोस ने भगवान हनुमान की मूर्ति का एक वीडियो शेयर कर लिखा है कि "तीसरी दुनिया" के "एलियंस" टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं.

दरअसल अमेरिका के टेक्सास के एक शहर में भगवान हनुमान की 90 फुट की मूर्ति है जिसे 'स्टैच्यू ऑफ यूनियन' के नाम से जाना जाता है. टेक्सास के शुगर लैंड शहर में श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की यह की मूर्ति है. 

कार्लोस टुरसियोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, "यह पाकिस्तान का इस्लामाबाद या भारत की नई दिल्ली नहीं है. यह शुगर लैंड, टेक्सास है. तीसरी दुनिया के एलियंस (अवैध रूप से आने वाले विदेशी) धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं. अमेरिका में तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति यह क्यों है?! अतिक्रमण रोकें."

इस मुर्ती का 2024 में अनावरण किया गया था. पंचलोहा अभय हनुमान के नाम से जानी जाने वाली यह मूर्ति संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे ऊंचे हिंदू स्मारकों में से एक है. इसकी कल्पना श्री चिन्नाजीयर स्वामीजी ने की थी और यह संयुक्त राज्य अमेरिका में तीसरी सबसे ऊंची प्रतिमा है. मंदिर के अधिकारी इसे शक्ति, भक्ति का प्रतीक और शांति के लिए "आध्यात्मिक केंद्र" बताते हैं.

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कार्लोस टुरसियोस के बयान की ऑनलाइन आलोचना शुरू हो गई है. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर जेनोफोबिया को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. साथ ही अमेरिकी समाज में आप्रवासियों और तमाम दूसरे धार्मिक समुदायों के योगदान की याद दिलाई है. बता दें कि आमतौर पर सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में जेनोफोबिया का अर्थ अजनबियों, विदेशियों या अपनी संस्कृति से अलग लोगों के प्रति डर, नफरत या पूर्वाग्रह होता है.

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