भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा ट्रेड डील फाइनल कर लिया है और अमेरिका को इससे मिर्ची लग गई है. भारत के पीएम मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार, 27 जनवरी को 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India-EU Free Trade Agreement) की घोषणा की. अब अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने दावा किया है कि EU के 27 देशों के साथ हुए इस डील में भारत को ज्यादा फायदा है. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा है कि जुर्माने के रूप में 25% टैरिफ अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अभी भी रूसी तेल खरीद रहा है.
EU के साथ ट्रेड डील में भारत को ज्यादा फायदा- अमेरिका
ग्रीर ने मंगलवार को फॉक्स बिजनेस से बात करते हुए कहा, "सबसे पहले, रणनीतिक रूप से, यह समझना महत्वपूर्ण है कि क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी है और अनिवार्य रूप से हमारे बाजार तक पहुंचने के लिए अन्य देशों से टैरिफ लेना शुरू कर दिया है. ये देश (यूरोप के देश) अपने ओवर प्रोडक्शन के लिए अन्य आउटलेट (बाजार) खोजने की कोशिश कर रहे हैं. और इसलिए, यूरोपीय संघ जगह तलाशने के लिए भारत की ओर रुख कर रहा है. यूरोपीय संघ व्यापार पर इतना निर्भर है कि अगर वे अपना सारा सामान अमेरिका में भेजना जारी नहीं रख सकते तो उन्हें अन्य बाजार की आवश्यकता है."
उन्होंने आगे कहा, "मैंने अब तक डील के कुछ विवरणों पर गौर किया है. सच कहूं तो मुझे लगता है कि भारत इसमें टॉप (यानी उसे फायदा ज्यादा है) पर है. उसे यूरोप में अधिक बाजार पहुंच मिलेगी... तो मुझे लगता है कि कुल मिलाकर, भारत के लिए यह अच्छा होगा. उनके पास कम लागत वाला श्रम है."
ग्रीर ने यूरोपीय संघ पर भी कटाक्ष करते हुए कहा, "ऐसा लगता है कि यूरोपीय संघ वैश्वीकरण को दोगुना कर रहा है, जबकि हम यहां अमेरिका में वैश्वीकरण के साथ कुछ समस्याओं को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं."














