ईरान ड्रोन के सामने बेबस होने पर अमेरिका के काम आई यूक्रेनी तकनीक, Sky Map से बदला खेल, ऐसे करता है काम

ईरान से बढ़ते ड्रोन हमलों के खतरे के बीच अमेरिकी सेना को अब यूक्रेन की युद्ध‑परीक्षित काउंटर‑ड्रोन तकनीक का सहारा लेना पड़ रहा है. रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर यूक्रेन का ‘स्काई मैप’ कमांड एंड कंट्रोल प्लेटफॉर्म तैनात किया गया है. यह कदम अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम में मौजूद कमजोरियों और बदलते ड्रोन युद्ध की हकीकत को भी उजागर करता है.

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  • यूक्रेन की काउंटर-ड्रोन तकनीक Sky Map को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर अमेरिकी सेना ने तैनात किया है
  • Sky Map सेंसर, रडार और कैमरों से डेटा लेकर ड्रोन की लोकेशन, दिशा और स्पीड तुरंत एनालाइज करता है
  • सिस्टम संदिग्ध ड्रोन को पहचान इंटरसेप्टर ड्रोन या अन्य रक्षा प्रणाली को जवाबी कार्रवाई के लिए निर्देश देता है
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ईरान से बढ़ते ड्रोन हमलों के खतरे के बीच अमेरिकी सेना अब एक दिलचस्प लेकिन अहम मोड़ पर पहुंच गई है. नौबत ये आन पड़ी है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सैन्य ताकत मानी जाने वाले अमेरिका को अब यूक्रेन की काउंटर-ड्रोन तकनीक का सहारा लेना पड़ रहा है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर यूक्रेन का ‘Sky Map' नाम का कमांड एंड कंट्रोल प्लेटफॉर्म तैनात किया गया है. यह तैनाती इसलिए खास है क्योंकि यूक्रेन ने पिछले 4 साल में रूस के खिलाफ युद्ध के दौरान ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक में तेजी से महारत हासिल की है. अब वही युद्ध में परखी गई तकनीक अमेरिका जैसे देश के लिए भी जरूरी हो गई है.

कैसे काम करता है ‘Sky Map'

असल में Sky Map एक तरह का डिजिटल कमांड सेंटर है, जो अलग-अलग सेंसर, रडार और कैमरों से मिलने वाले डेटा को एक साथ क्लेक्ट करता है. यह सिस्टम आसमान में आने वाले खतरों खासतौर पर ड्रोन को जल्दी पहचान लेता है. जैसे ही इस सिस्टम को कोई संदिग्ध ड्रोन दिखता है, यह प्लेटफॉर्म तुरंत उसकी लोकेशन, दिशा और स्पीड को एनालाइस करता है. इसके बाद यह सिस्टम जवाबी कार्रवाई के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन या अन्य रक्षा सिस्टम को निर्देश देता है. यानी यह सिर्फ निगरानी ही नहीं करता, बल्कि हमला रोकने की पूरी प्रक्रिया को कोऑर्डिनेट करता है. यूक्रेन में इस सिस्टम का इस्तेमाल खास तौर पर ईरान निर्मित ‘शाहेद' ड्रोन को रोकने के लिए किया गया है, जो सस्ते लेकिन बेहद खतरनाक माने जाते हैं.

कंपनी से परिचित एक व्यक्ति के अनुसार, 'स्काई फोर्ट्रेस' (जो 'स्काई मैप' बनाती है) को 2022 में सेना से जुड़े यूक्रेनी इंजीनियरों ने शुरू किया था; इन इंजीनियरों ने रूसी ड्रोन हमलों का पता लगाने के लिए पूरे यूक्रेन में 10,000 से ज़्यादा एकॉस्टिक सेंसर लगाए थे. इस कंपनी को यूक्रेनी सेना की इनोवेशन यूनिट 'Brave1' से फंडिंग मिली थी, और इसने ड्रोन-रोधी हमलों को कोऑर्डिनेट करने के लिए 'स्काई मैप' को एक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के तौर पर डेवलप किया.

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कितना कारगर है यह सिस्टम?

Sky Map की सबसे बड़ी ताकत इसकी ‘लो-कॉस्ट वॉरफेयर' सोच है, जहां एक ओर ईरान के शाहेद ड्रोन 20,000 से 50,000 डॉलर में तैयार हो जाते हैं, वहीं अमेरिका कई बार उन्हें गिराने के लिए 10 लाख डॉलर तक की मिसाइलें इस्तेमाल करता है. जो अमेरिका के जंग को खर्चे को और बढ़ा रहा है. इसके मुकाबले यूक्रेन ने काफी सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित किए हैं, जिनकी कीमत 1,000 से 2,000 डॉलर के बीच है. इस लिहाज से Sky Map जैसे सिस्टम ‘सही जवाब सही लागत में' देने की रणनीति पर काम करते हैं. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि कोई भी एक तकनीक सभी खतरों का तोड़ नहीं हो सकती. हाल ही में परीक्षण के दौरान एक इंटरसेप्टर ड्रोन क्रैश भी हो गया, जिससे साफ है कि यह सिस्टम अभी भी सुधार के दौर में है.

अमेरिका को क्यों पड़ी जरूरत?

सऊदी अरब में स्थित प्रिंस सुल्तान एयरबेस ईरान से करीब 640 किलोमीटर दूर है और हाल के महीनों में यहां ड्रोन और मिसाइल हमलों की कई घटनाएं हुई हैं. इन हमलों में अमेरिकी विमानों और इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी नुकसान भी पहुंचा है. इन हमलों में हुए नुकसानों की खबरों से अमेरिका की मिलिट्री पावर पर भी बट्टा लगा है. एक्सर्ट्स के मुताबिक, यह स्थिति अमेरिका की एयर डिफेंस सिस्टम में मौजूद खामियों को उजागर करती है. अब तक अमेरिका महंगे और हाई-टेक हथियारों के भरोसे ही रहा है, लेकिन सस्ते और बड़ी संख्या में आने वाले ड्रोन के सामने यह मॉडल कमजोर साबित हो रहा है.

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बड़ा सवाल: बदल रहा है युद्ध का गणित

ईरानी शाहेद ड्रोन ने आधुनिक युद्ध की परिभाषा को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. यह तकनीक बेहद साधारण पार्ट्स से तैयार होती है, लेकिन बड़े पैमाने पर हमले करने में सक्षम है. यूक्रेन ने इसका जवाब भी उसी अंदाज में दिया. सस्ते, तेज और बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर तैयार करके. यही वजह है कि अब अमेरिका भी इस मॉडल की ओर मुड रहा है. दरअसल, यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि युद्ध की पूरी रणनीति में बदलाव का संकेत है. महंगे हथियारों के दौर में अब सस्ते लेकिन प्रभावी समाधान ज्यादा कारगर साबित हो रहे हैं. ईरान युद्ध से अमेरिका जैसे देश को भी अब यूक्रेन से सीखने की जरूरत पड़ रही है, क्योंकि आने वाले समय में जंग सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि ‘सही लागत और स्मार्ट तकनीक' से जीती जाएगी.

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