ईरान से युद्ध के पहले 100 घंटों में ही अमेरिका के 3.7 अरब डॉलर स्वाहा, ट्रंप की टेंशन बढ़ाने वाली रिपोर्ट

ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती यह होगी कि किसी भी प्रकार की धनराशि से संबंधित कार्रवाई युद्ध के विरोध का कारण बन जाएगी. पेंटागन ने कथित तौर पर 50 अरब डॉलर के पूरक बजट का अनुरोध किया है.

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अगर जंग लंबी चली तो ट्रंप की मुश्किल बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी.
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  • अमेरिका ने ईरान पर युद्ध के शुरुआती सौ घंटों में लगभग तीन अरब सात सौ मिलियन डॉलर खर्च किया है
  • इस लागत का मुख्य हिस्सा गोला-बारूद पर हुआ खर्च है, जिसमें दो हजार से अधिक गोला-बारूद शामिल हैं
  • पेंटागन को बजट से बाहर अतिरिक्त धन की मांग करनी पड़ सकती है, जो ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती होगी
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अमेरिका ने ईरान पर हुए युद्ध में शुरुआती 100 घंटों में ही 3.7 अरब डॉलर खर्च कर दिए. इसका मुख्य कारण गोला-बारूद पर हुआ भारी खर्च है. वाशिंगटन के थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) ने एक रिपोर्ट में युद्ध की भारी लागत की ओर ध्यान खींचा है. शुक्रवार को सातवें दिन में प्रवेश कर चुके इस युद्ध में अब अमेरिका स्टील्थ बॉम्बर्स F22 और एडवांस वेपन सिस्टम से ईरान पर हमला कर रहा है.

अल जजीरा ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि रिसर्चर मार्क कैंसियन और क्रिस पार्क ने कहा कि शुरुआती 100 घंटों में अनुमानित 3.7 अरब डॉलर की लागत में से केवल एक छोटी सी राशि – यानी प्रतिदिन 891.4 मिलियन डॉलर – का बजट पहले से तय था, जबकि अधिकांश लागत – 3.5 अरब डॉलर – का बजट तय नहीं था.

ट्रंप के समर्थक भी हैरान

इसका मतलब यह है कि पेंटागन को बजट से बाहर के खर्चों को पूरा करने के लिए जल्द ही और अधिक धन की मांग करनी पड़ सकती है, जो ट्रंप प्रशासन के लिए एक राजनीतिक चुनौती साबित होगी और युद्ध के विरोध का कारण बन सकती है. घरेलू महंगाई, मुद्रास्फीति और अब संघर्ष के कारण पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के अप्रत्यक्ष प्रभाव से अमेरिकी नागरिकों के बीच युद्ध के प्रति समर्थन और कम होने की संभावना है. यह ट्रंप के "अमेरिका फर्स्ट" समर्थकों को भी खटक रहा है, जिनसे उन्होंने अपने राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में "विदेशी युद्धों" में शामिल न होने का वादा किया था.

रिसर्चर्स ने कहा कि अमेरिकी रक्षा विभाग अपने अभियानों के बारे में सीमित जानकारी जारी करता है. इसके बावजूद, उनका विश्लेषण कांग्रेस बजट कार्यालय (सीबीओ) द्वारा प्रत्येक इकाई के ऑपरेशन और सपोर्ट कॉस्ट के अनुमानों पर आधारित है, जिसमें मुद्रास्फीति और यूनिट साइज को किया गया है और ऑपरेशन लागत के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त जोड़ा गया है.

अभी और बढ़ेगा खर्च

विश्लेषण में कहा गया है कि अमेरिका ने युद्ध के पहले 100 घंटों में विभिन्न प्रकार के 2,000 से अधिक गोला-बारूद खर्च कर दिए थे, और अनुमान लगाया गया है कि समान मात्रा में गोला-बारूद की भरपाई के लिए 3.1 अरब डॉलर खर्च होंगे, और यह लागत प्रतिदिन 758.1 मिलियन डॉलर की दर से बढ़ेगी.

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान पर अमेरिकी बमबारी तेजी से बढ़ने वाली है, जिसमें अधिक लड़ाकू स्क्वाड्रन... अधिक रक्षात्मक क्षमताएं और अधिक बार बमवर्षक विमानों द्वारा अधिक हमले शामिल होंगे. रिपोर्ट के लेखकों ने कहा कि हालांकि किसी संघर्ष के शुरुआती तीव्र दौर के बाद हवाई अभियान आमतौर पर कम उग्र गति से चलते हैं, फिर भी, यहां अनिर्धारित लागत काफी अधिक होगी.

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ट्रंप कैसे जुटाएंगे फंड 

लेखकों ने कहा कि यह वेनेजुएला के निकोलस मादुरो के अपहरण से जुड़े हालिया अमेरिकी अभियानों से अलग है, जिनमें अधिकांश खर्च पहले से ही बजट में शामिल थे. रिपोर्ट में कहा गया है, "इसका मतलब है कि रक्षा विभाग को किसी न किसी समय अतिरिक्त धन की आवश्यकता होगी, क्योंकि इस संघर्ष के लिए आंतरिक रूप से धन जुटाने हेतु आवश्यक बजट कटौती राजनीतिक और ऑपरेशन की दृष्टि से कठिन होगी."

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन युद्ध और सरकार के अन्य अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करने के लिए पूरक विनियोग का अनुरोध करने का निर्णय ले सकता है, जैसा कि जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन ने इराक और अफगानिस्तान में युद्धों की शुरुआत में किया था.

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मगर ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती यह होगी कि किसी भी प्रकार की धनराशि से संबंधित कार्रवाई युद्ध के विरोध का कारण बन जाएगी. पेंटागन ने कथित तौर पर 50 अरब डॉलर के पूरक बजट का अनुरोध किया है ताकि युद्ध के पहले सप्ताह में इस्तेमाल की गई टॉमहॉक और पैट्रियट मिसाइलों और थाड इंटरसेप्टरों के साथ-साथ अब तक क्षतिग्रस्त या खराब हो चुके अन्य उपकरणों को बदला जा सके.

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