ईरान vs इजरायल-अमेरिका युद्ध- अब नेता नहीं जनता निशाने पर, बिजली पानी बंद होने का डर

US Israel War Against Iran: इस जंग ने सिर्फ खाड़ी देशों के आम लोगों को ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के लोगों के सामने उर्जा संकट पैदा कर दी है. IEA प्रमुख की चेतावनी है कि दुनिया के सामने दशकों में सबसे खराब ऊर्जा संकट का खतरा है.

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US Israel War Against Iran: ईरान और अमेरिका के बीच जंग जारी
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  • ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की जंग में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं
  • US राष्ट्रपति ने ईरान को 48 घंटे में होर्मुज खोलने का अल्टीमेटम दिया है और पावर प्लांट तबाह करने की धमकी दी है
  • ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा और जल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी दी है
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US Israel War Against Iran: हर जंग की शुरुआत में एक घोषणा की जाती है- यह जंग इंसानियत को बचाने की जंग है, लाखों जान बचाने के लिए न टाली जा सकने वाली जंग है. ईरान के खिलाफ 24 दिन पहले अमेरिका और इजरायल की तरफ से जब जंग शुरू की गई थी तब भी कुछ ऐसे ही दावे किए गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे थे कि वो ईरान के लोगों को एक तानाशाही शासन से आजादी दिलाने निकले हैं, इस्लामिक शासन को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए निकले हैं. ईरान ने भी जवाबी हमला करते हुए कहा कि वह इजरालय और मीडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा. हालांकि अब कहानी का प्लॉट ही बदल चुका है.  अब नेता नहीं जनता निशाने पर है. ट्रंप ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि उनकी सेना पूरे ईरान के बिजली संयंत्र को निशाने बनाने वाली है, तो वहीं ईरान ने कहा कि कोई भी हमला हुआ तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा और जल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा.

चलिए इन धमकियों के पहले आपको 4 प्वाइंट में जंग की असली तस्वीर दिखाते हैं:

  1. युद्ध में मरने वालों की संख्या ईरान में 1500 से ज्यादा, लेबनान में 1000 से ज्यादा, इजराइल में 15 और अमेरिका के 13 सैनिकों तक पहुंच गई है. 
  2. इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में जमीन और समुद्र में भी कई नागरिक मारे गए हैं. लेबनान और ईरान में लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं.
  3. इजरायल-अमेरिका की बमबारी के पहले ही दिन (28 फरवरी) ईरान में लड़कियों के एक स्कूल पर टॉमहॉक मिसाइल हमले में कम से कम 175 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर बच्चियां थी. 
  4. ठीक उसी दिन ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित लामेर्द में एक खेल भवन पर हुए हमले में 20 लोग मारे गए, जिनमें वॉलीबॉल खेल रही लड़कियां भी शामिल थीं.

ईरान के पावर प्लांट तबाह कर देंगे... ट्रंप ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटल

अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लड़ाई तो ईरान पर शासन करने वाली इस्लामिक सरकार से थी. लेकिन अब वो खुलेआम वहां के नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान की धमकी दे रहे हैं. ट्रंप ने शनिवार को ही ईरान को धमकी दी थी कि अगर वह 48 घंटे के अंदर होर्मुज का रास्ता नहीं खोलता है तो अमेरिकी सेना ईरान के सभी पावर प्लांट यानी बिजली संयंत्रों को तबाह कर देगी. बता दें कि होर्मुज एक संकरा जलमार्ग है और खाड़ी में प्रवेश का रास्ता है, जिसके जरिए दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है. ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट के समय के आधार पर भारत में यह समय सीमा मंगलवार सुबह 5.14 मिनट पर खत्म होगी. तब ईरान में भी मंगलवार की सुबह होगी और वॉशिंगटन में सोमवार की शाम होगी.

अगर ईरान फिर से ट्रंप के सामने नहीं झुकता है और अमेरिकी सेना ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला शुरू कर देती है तो नुकसान तो ईरान के आम नागरिकों को ही होगा न, वहीं आम नागरिक जिन्हें आजाद कराने के लिए ट्रंप मसीहा बनने का दावा कर रहे थे.

जंग से पहले बार बार ट्रंप से हमले की गुजारिश करने वाले ईरानी क्राउन प्रिंस भी ट्रंप को अब बता रहे हैं कि आपकी लड़ाई ईरान से नहीं, वहां के इस्लामिक शासन से हैं.

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ईरान का 'वॉटर कार्ड'

ईरान ने जवाबी चेतावनी दी है कि यदि उसके पावर ग्रिड पर हमला हुआ, तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा और जल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा. ईरान की सैन्य कमान ने ट्रंप की धमकी पर कड़ा जवाब देते हुए कहा कि अगर ट्रंप ऐसा करते हैं, तो वह इजरायल के “बिजली संयंत्रों, ऊर्जा तथा सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ढांचे” पर हमला करेगा. साथ ही उन खाड़ी देशों के बिजली संयंत्रों पर भी हमला करेगा, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं और उन कंपनियों पर भी जिनमें अमेरिकी शेयरहोल्डर्स हैं.

ईरान के जवाबी धमकी से खाड़ी देशों के डिसालिनेशन प्लांट पर खतरा आ गया है. खाड़ी देश (बहरीन, कतर, यूएई) पीने के पानी के लिए पूरी तरह 'डिसालिनेशन प्लांट्स' (समुद्र के पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्र) पर निर्भर हैं. जीसीसी स्टैटिकल सेंटर्स के पोर्टल पर उपलब्ध डेटाबेस के अनुसार, कुल मिलाकर, खाड़ी देशों में 2018 में 172 डिसालिनेशन प्लांट स्टेशन थे, जिसमें सबसे अधिक (65 स्टेशन) ओमान में थे. इसके बाद सऊदी अरब (44), संयुक्त अरब अमीरात (40), कतर (9), कुवैत (8) और बहरीन (6) थे. ईरान के हमले इन देशों की जलापूर्ति को स्थायी रूप से ठप कर सकते हैं.

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तेल का संकट पहले से जारी

इस जंग ने सिर्फ खाड़ी देशों के आम लोगों को ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के लोगों के सामने उर्जा संकट पैदा कर दी है. दुनिया के तमाम देश ईरान से तुरंत हमले रोकने और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खोलने की अपील कर रहे हैं. ताजा हालातों के बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के चीफ फतिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा संसाधनों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा खतरा है. IEA चीफ ने कहा कि पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात से दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को गंभीर खतरा है. ऑस्ट्रेलिया में कार्यक्रम के दौरान IEA चीफ बिरोल ने कहा कि इसका असर कुछ देशों की अर्थव्यवस्था तक ही सीमित नहीं रहेगा. कोई भी देश इस संकट के असर से बचा नहीं रहेगा. इस लड़ाई ने ग्लोबल तेल मार्केट के इतिहास में सबसे बड़ी सप्लाई में रुकावट पैदा कर दी है. ईरान की तरफ से जारी कार्रवाई की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग बहुत कम हो गई है.

ईरान के सैन्य संचालन कमान ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के बिजली संयंत्रों के बारे में अमेरिका की धमकियां लागू की जाती हैं तो होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक ईरान के नष्ट किए गए बिजली संयंत्रों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता. और इस प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं.

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