ईरान-अमेरिका की जंग के बीच नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग क्या कर रहे हैं? 

US Israel War against Iran: सोशल मीडिया पर मीम बनाकर सवाल किया जा रहा है कि आखिर जब दुनिया में सैन्य तनाव इतने चरम पर है तो किम जोंग क्या कर रहे हैं.

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US Israel War against Iran: अमेरिका-ईरान जंग के बीच किम जोंग उन कहां हैं
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  • नॉर्थ कोरिया इस महीने अपनी राष्ट्रीय सभा के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव करेगा जो पंद्रह मार्च को होगा
  • यह चुनाव सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के हाल ही में हुई बैठक के बाद हो रहा है जिसमें कई नीतियां तय हुईं
  • किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया को दुश्मन माना और इसे अलग देश के रूप में संविधान में शामिल करने की बात कही है
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ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला कर दिया है. जंग फुल स्केल पर जारी है. उधर रूस भी 4 साल से यूक्रेन से जंग लड़ रहा है. चीन भी रह रहकर ताइवान पर सैन्य दबाव बनाता दिखता रहता है. ऐसे में सोशल मीडिया के धुरंधर नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को लेकर खूब एक्टिव हुए पड़े हैं. मीम बनाकर सवाल किया जा रहा है कि आखिर जब दुनिया में सैन्य तनाव इतने चरम पर है तो किम जोंग क्या कर रहे हैं. मीम तो यहां तक बन रहे हैं कि किम जोंग की हालत उस छोटे बच्चे की तरह है जिसके पास दुनिया भर के खिलौने (इसे हथियार पढ़ा जाए) हैं लेकिन कोई खेलने वाला नहीं है. चलिए आपको हम यहां बताते हैं कि नॉर्थ कोरिया में क्या चल रहा है, किम जोंग क्या कर रहे हैं.

नॉर्थ कोरिया में चल रहा चुनाव-चुनाव

नॉर्थ कोरिया इस महीने अपनी राष्ट्रीय सभा के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव करेगा. वहां की सरकारी मीडिया ने बुधवार, 4 मार्च को यह जानकारी दी. यह चुनाव सत्तारूढ़ पार्टी की हाल ही में हुई बड़ी बैठक के बाद हो रहा है. ध्यान इस बात पर रहेगा कि क्या नेता किम जोंग उन को राष्ट्रपति बनाया जाएगा. यह देश का सबसे ऊंचा सरकारी पद है, जो पहले देश के संस्थापक और किम के दिवंगत दादा किम इल सुंग के लिए रिजर्व रखा गया था.

प्योंगयांग की आधिकारिक समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (केसीएनए) ने कहा कि प्रतिनिधियों का चुनाव 15 मार्च को होगा. यह फैसला संसद की स्थायी समिति के निर्णय के आधार पर लिया गया है. ये प्रतिनिधि सुप्रीम पीपल्स असेंबली (एसपीए) के लिए चुने जाएंगे, जिसे अक्सर केवल औपचारिक मंजूरी देने वाली संसद माना जाता है. यह चुनाव सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के उस शिखर सम्मेलन के बाद हो रहा है, जो हर पांच साल में एक बार होता है. इस बैठक में कूटनीति से लेकर युद्ध की योजना तक, राज्य की कई नीतियों और कामों की दिशा तय की जाती है.

किम जोंग उन कई बार कह चुके हैं कि साउथ कोरिया को एक “दुश्मन” और अलग देश के रूप में परिभाषित किया जाएगा और इस विचार को कानून में शामिल किया जाएगा. उन्होंने सियोल की हाल की शांति कोशिशों को “भद्दा और धोखेबाज़ नाटक तथा बहुत खराब काम” बताया. उम्मीद है कि चुनाव होने के बाद सुप्रीम पीपल्स असेंबली इस विचार को संविधान में शामिल कर सकती है.

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अप्रैल में चीन की अपनी संभावित यात्रा के दौरान किम जोंग उन से मुलाकात करने की कोशिश कर सकते हैं. 25 फरवरी को जब पार्टी का शिखर सम्मेलन खत्म हुआ, तब किम जोंग उन ने कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ “मिलजुल कर रह सकता है”, अगर अमेरिका प्योंगयांग की परमाणु शक्ति की स्थिति को स्वीकार कर ले.

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अमेरिका कई दशकों से नॉर्थ कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की कोशिशों का नेतृत्व करता रहा है, लेकिन शिखर बैठकों, प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव का अब तक बहुत कम असर हुआ है.

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