आयरन डोम तक फेल, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल 'फतह-2' ने कैसे बदला जंग का गेम?

ईरान की इस मिसाइल नें हालिया जंग में अमेरिका और इजरायल को भारी नुकसान पहुंचाया है. हाइपरसोनिक होने के कारण इसे अमेरिकन और इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम्स हर बार रोक नहीं पा रहे.

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अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद ईरान ने गल्फ के देशों पर मिसाइल की बौछार कर दी है.
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  • ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने शक्तिशाली मिसाइलों का इस्तेमाल कर सबको दंग कर दिया है.
  • ईरानी मिसाइलों ने गल्फ क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों और इजरायल के कई शहरों को निशाना बनाकर भारी तबाही मचाई है.
  • ईरानी मिसाइलों ने मिडिल ईस्ट के देशों के एयर डिफेंस सिस्टम समेत इजरायल के आयरन डोम को भी असफल कर दिया है.
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तेहरान:

US Israel Iran War: ईरान पर इजरायल और अमेरिका के घातक हमले के बाद शुरू हुए जंग पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी है. शनिवार को इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों की मौत के बाद लगा कि ईरान कमजोर पड़ गया होगा. लेकिन इसके बाद ईरानी सेना की चेतावनी के बाद शुरू हुए 'अनेदेखे हथियारों' के इस्तेमाल ने जंग का गेम बदल दिया है. गल्फ के दशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ-साथ इजरायल पर ईरान की मिसाइल्स नें जबरदस्त तबाही मचाई है. सोमवार को अमेरिका के कई लड़ाकू विमानों को क्रैश किए जाने की खबर सामने आई. इससे पहले शनिवार-रविवार को इजरायल के कई शहरों से तबाही के मंजर सामने आए. 

ईरानी मिसाइलों ने कई देशों के एयर डिफेंस को किया फेल

ईरान के हमलों से हुई क्षति के बारे में आधिकारिक रूप से अभी कुछ खास सामने नहीं आया है. लेकिन ईरानी दावों के अनुसार अमेरिका, इजरायल को भी भारी नुकसान पहुंचा है. ईरानी मिसाइलों के हमलों से मिडिल ईस्ट के देशों में तबाही मची है. ईरान के मिसाइलों ने कई देशों के एयर डिफेंस सहित इजरायल के आयरन डोम को भी फेल कर दिया. 

सबसे ज्यादा फतह-2 मिसाइल की चर्चा

बीते कुछ सालों में ईरान ने हर तरह की मिसाइल तकनीक पर जबरदस्त काम किया है. सबसे अधिक चर्चा फतह-2 नाम की मिसाइल की हो रही है. कहा जा रहा है कि ये वही मिसाइल है जिसने अमेरिकी सैन्य अड्डों को खूब नुकसान पहुंचाया है. ये एक बैलिस्टिक, और साथ में हाइपरसॉनिक मिसाइल है.

जानिए क्या होता है बैलिस्टिक मिसाइल?

ये फायर होने के बाद सबसे पहले वायुमंडल में काफी ऊंचाई पर जाती हैं. इसे बूस्ट फेज कहा जाता है. वहां पहुंचने पर इनका बूस्टर बंद हो जाता है. इसके बाद ये अपने टारगेट की तरफ आना शुरू करती हैं, जिसे मिडकोर्स फेज कहा जाता है. फिर ये वापस से वायुमंडल में प्रवेश कर अपने टारगेट पर अटैक करती हैं. इसे टर्मिनल फेज कहा जाता है. 

इन मिसाइल्स में पारंपरिक विस्फोटक (Conventional Warhead) के साथ-साथ न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने की भी क्षमता होती है. इसीलिए बैलिस्टिक मिसाइल्स को आज की तारीख में काफी अहम माना जाता है. रेंज के आधार पर देखें तो बैलिस्टिक मिसाइल्स को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. 
  • शॉर्ट रेंज : एक हजार किलोमीटर से कम रेंज होती है. इन्हें टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल भी कहा जाता है. 
  • मीडियम रेंज:  इनकी रेंज 1 हजार से 3 हजार किलोमीटर तक होती है. इन्हें थिएटर बैलिस्टिक मिसाइल भी कहते हैं. 
  • इंटरमीडिएट रेंज: इनकी रेंज 3 हजार से 5 हजार किलोमीटर तक होती है. लॉन्ग रेंज: इनकी रेंज 5 हजार किलोमीटर से अधिक होती है. इन्हें इंटरकंटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) भी कहा जाता है.

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल 'फतह-2'

'फतह' शब्द को देखें फारसी में इसका मतलब 'विजेता' (फतह करने वाला) होता है. बीते कुछ सालों में ईरान नें अपनी मिसाइल तकनीक पर काफी मेहनत की है. फतह-2 उसका सबसे अच्छा उदाहरण है. ये एक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है. यानी इसकी रफ्तार मैक 5 (1 मैक=1234 किलोमीटर प्रति घंटा) या उससे अधिक हो सकती है. 

फतह-2 मिसाइल अचूक कैसे

यह मिसाइल हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) वारहेड से लैस है. ये एक खास तकनीक है जिसमें मिसाइल ग्लाइड यानी उसपर लगे पंखों को मूव कर के उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है. हाइपरसोनिक स्पीड पर ऐसा कर पाना इस मिसाइल को अचूक बनाता है. क्योंकि ऐसा करने से एयर डिफेंस सिस्टम्स इस मिसाइल को रोकने में उतने प्रभावी नहीं रह जाते.

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यह ईंधन के तौर पर एक लिक्विड 'हाइड्राजाइन' (Hydrazine) का इस्तेमाल करती है. इसमें दो तरह के ईंधन का इस्तेमाल होता है. सॉलिड फ्यूल इसे लॉन्च के बाद पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर ले जाता है. उसके बाद जब ये टारगेट की ओर बढ़ती है, तब इसका लिक्विड फ्यूल सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है. इस कारण ये हाइपरसॉनिक रफ्तार तक पहुंच जाती है. दावा है कि ये मैक 15 की रफ्तार तक जा सकती है. 

ईरान की इस मिसाइल नें हालिया जंग में अमेरिका और इजरायल को भारी नुकसान पहुंचाया है. हाइपरसोनिक होने के कारण इसे अमेरिकन और इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम्स हर बार रोक नहीं पा रहे.

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