- इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब तक का सबसे बड़ा युद्ध बन चुका है
- अमेरिका- इजरायल स्टेल्थ फाइटर, टॉमाहॉक क्रूज मिसाइल और स्पाइस, JDAM बमों का इस्तेमाल कर रहे हैं
- ईरान शहाब-3, इमाद और गदर मिसाइलों से इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है
इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा संघर्ष मिडिल ईस्ट में अब तक के सबसे बड़े युद्ध में तब्दील हो चुका है. इस महायुद्ध में दोनों तरफ से दुनिया की सबसे घातक मिसाइल्स, स्टेल्थ फाइटर जेट और सटीक निशाना लगाने वाले गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
US-इजरायल इन हथियारों से कर रहे वार
टॉमाहॉक क्रूज मिसाइल: अमेरिकी युद्धपोतों और पनडुब्बियों से दागी जाने वाली ये मिसाइल नीची उड़ान भरती है, जिससे इसे पकड़ना मुश्किल होता है. यह 1,600 किलोमीटर दूर तक से सटीक निशाना साध सकती है.
F-35I अदिर स्टेल्थ फाइटर: इसे दुनिया के सबसे एडवांस लड़ाकू विमानों में से माना जाता है, जो रडार की नजरों में आए बिना हमला करने में सक्षम है. इस इजरायली फाइटर की एक खूबी दुश्मन के एयर डिफेंस को जाम करने की भी है.
F-15I Ra'am स्ट्राइक फाइटर: F-15I को इजरायल का हैवी लिफ्टर फाइटर माना जाता है. ये विमान भारी मात्रा में बम और मिसाइलें लेकर लंबी दूरी तय कर सकता है. ये हवा में मुकाबला करने के साथ-साथ जमीन पर बमबारी करने में भी सक्षम है.
SPICE गाइडेड बम: SPICE इजरायल की वो तकनीक है, जो साधारण बमों को स्मार्ट बम में बदल देती है. इसमें जीपीएस की जरूरत नहीं होती, बल्कि ये टारगेट की फोटो पहचानकर उस पर गिरता है.
GBU-28 बंकर बस्टर बम: यह बम ईरान के लिए सबसे बड़ा खतरा है. ये बम जमीन में कई फीट नीचे तक घुसकर धमाका करते हैं. पिछले साल अमेरिका ने ईरान के जमीन के नीचे बने कंक्रीट के परमाणु केंद्रों को भेदने के लिए इसका भी इस्तेमाल किया था.
JDAM प्रिसिजन म्यूनिशन: JDAM एक गाइडेंस किट है, जिसे अनगाइडेड बमों पर फिट किया जाता है. यह जीपीएस और खास नेविगेशन का इस्तेमाल करके बम को सीधे निशाने तक पहुंचाता है. ये खराब मौसम या घने धुएं में भी अपने टारगेट को ढूंढने में सक्षम है.
Heron लॉन्ग-रेंज ड्रोन: इजरायल को ड्रोन टेक्नीक में विश्व गुरु माना जाता है. उसका Heron ड्रोन जासूसी और निगरानी के साथ-साथ मिसाइल हमले भी कर सकता है.
Eitan स्ट्राइक ड्रोन: एटन इजरायल का विशालकाय ड्रोन है. यह 40 हजार फीट ऊपर उड़कर निगरानी और सटीक हमले कर सकता है. इसे सैटेलाइट से ऑपरेट किया जाता है. इसकी खासियतों में लगातार 36 घंटे तक हवा में उड़ना भी शामिल है.
डिलाइला (Delilah) क्रूज मिसाइल: डिलाइला को लोइटरिंग (मंडराने वाली मिसाइल) कहा जाता है. इसकी खूबी यs है कि दागने के बाद भी पायलट इसे कंट्रोल कर सकता है. अगर टारगेट साफ न हो तो ये हवा में काफी समय तक चक्कर काट सकती है. 250 किमी तक मार करने वाली इस मिसाइल के आधुनिक कैमरे पायलट को लाइव वीडियो दिखाते हैं.
रैम्पेज सुपरसोनिक मिसाइल: लंबी दूरी की इस सुपरसोनिक मिसाइल की रफ्तार ध्वनि की गति से भी तेज होती, जिससे इसे ट्रैक करने का मौका ही नहीं मिलता. यह एंटी जैमिंग जीपीएस तकनीक से लैस है. रैम्पेज को खासकर दुश्मन के संचार केंद्रों, एयरबेस और बंकरों को ध्वस्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है.
ईरान इन हथियारों से कर रहा पलटवार
ईरान के पास मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा मिसाइल भंडार माना जाता है. इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए वह खुलकर इनका इस्तेमाल कर रहा है. इस युद्ध में इस्तेमाल हो रहे इन चुनिंदा हथियारों की जानकारी अब तक मिली है.
शहाब-3 मिसाइल: करीब 2 हजार किलोमीटर की रेंज वाली यह मिसाइल पूरे इजरायल को अपनी जद में लेती है. यह ईरान की जवाबी कार्रवाई का मुख्य आधार है.
इमाद (Emad) मिसाइल: ईरान की यह मीडियम रेंज की ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे हवा में कंट्रोल किया जा सकता है. इसकी सटीकता इसे इजरायल के अहम ठिकानों के लिए बेहद घातक बनाती है.
गदर (Ghadr) मिसाइल: मध्यम दूरी की इस बैलिस्टिक मिसाइल को चर्चित शहाब-3 मिसाइल का ही एडवांस रूप माना जाता है. करीब 750 किलो तक भारी विस्फोटक ले जाने में सक्षम ये मिसाइल 1600 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है.
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