ईरान, इजरायल, अमेरिका की जंग कब होगी खत्म? सवाल-जवाब में समझिए सीजफायर का पूरा खाका

ईरान के पक्ष में तो खुलकर चीन और रूस खड़े हुए है. ये दोनों देश अमेरिका पर दवाब डाल रहे है वह अब हमला बंद करें. वहीं, यूरोप के फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश चाहते है कि किसी तरह यह जंग रुके. इ

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क्या अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग रोकने को लेकर सहमति बन रही है? पहले अमेरिकी मीडिया एक्सियोस के हवाले से खबर आई कि दोनों के बीच 45 दिनों का सीजफायर हो सकता है. फिर रायटर्स ने दावा कि आज रात जंग खत्म करने के प्रस्ताव पर सहमति हो सकती है. यह खबर तब आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान डील के लिए तैयार नही होता है तो पूरे ईरान को उड़ा देंगे.

अगर युद्धविराम हुआ तो किस तरह होगा?

यह युद्धविराम दो चरणों में होगा. पहले फेज में 45 दिन का सीजफायर होगा और दूसरे फेज में युद्ध पूरी तरह खत्म होगा. 

एक दूसरे के धुर विरोधी अमेरिका और ईरान के बीच आखिर कौन मध्यस्थता करा रहा है?

इसमें पाकिस्तान , मिस्र और तुर्किए  के नाम उभर कर आ रहे हैं. खबर है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने इस सिलसिले में अमेरिकी और ईरानी नेताओं के साथ पूरी रात बातचीत की है, ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके. कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि मुनीर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत और दामाद स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से लगातार बात करते रहे है ताकि,  होर्मुज खोलने से लेकर तेल सप्लाई  को लेकर कोई सहमति बन पाए.

तो सीजफायर के प्रस्ताव में है क्या जिससे जंग रुक सकती है?

जंग को फौरन रोकने की बात है. युद्धविराम का प्रस्ताव लागू होते ही दोनों पक्ष गोलाबारी नहीं करेंगे. ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पहले की तरह खोल देगा. यानी तेल टैकर और कार्गो शिप की आवाजाही पहले की तरह होगी. 15 -20 दिन बाद जब जंग खत्म होने पर आपसी विश्वास बढ़ेगा, तब दोनों पक्ष आमने सामने बैठकर बात करेंगे.

क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता के लिए अमेरिका और ईरान मान जाएंगे?

इस पर ना तो अमेरिका और ना से ईरान से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है. ईरान को पाकिस्तान पर पूरा भरोसा नहीं है, क्योंकि वह पहले ही इस प्रस्ताव को खारिज कर कह चुका है और कहा कि वह इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ कोई बैठक नहीं करेगा. इतना ही नहीं, ईरान के विरोधी सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान ने एक ऐसा रक्षा समझौता किया है, जिसके मुताबिक एक देश पर हमला दूसरे देश पर माना जाएगा. वहीं, अमेरिका को भी लग रहा है कि पाकिस्तान पर यकीन करना मुश्किल है, क्योंकि वह हमेशा मुस्लिम ब्रहरहुड की बात करता है.

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सीजफायर में पेच कहां फंसा है?

इसमें सबसे बड़ी दिक्कत है कि ईरान को अभी भी अमेरिका पर भरोसा नहीं है, क्योंकि पहले भी अमेरिका ने दो बार बातचीत का बहाना ईरान पर हमला बोल दिया. इसी वजह से ईरान ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव पर ठंडा रुख अपनाया हुआ है. 

पर्दे के पीछे कौैन कौन देश है ?

ईरान के पक्ष में तो खुलकर चीन और रूस खड़े हुए है. ये दोनों देश अमेरिका पर दवाब डाल रहे है वह अब हमला बंद करें. वहीं, यूरोप के फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश चाहते है कि किसी तरह यह जंग रुके. इसलिए ये देश भी पर्दे के पीछे जंग रुकवाने की कोशिश में लगे है.

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कैसे रुक सकता है अमेरिका और ईरान के बीच जंग?

ईरान की सबसे बड़ी मांग है कि इस बात कि सुरक्षा गारंटी हो कि अब अमेरिका और इजराइल दोबारा हमला नहीं करेगा. अगर ऐसी कोई ठोस गारंटी मिलता है तो ईरान अपनी ओर से यह भरोसा दे सकता है वह परमाणु हथियार नहीं बनायेगा.

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