- ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिकी विमानवाहक जहाज USS अब्राहम लिंकन पर हमला करने का दावा किया
- अमेरिका ने ईरान के हमले के दावे को झूठ बताया और जहाज के पूरी तरह काम करने की पुष्टि की
- USS अब्राहम लिंकन नवंबर 1989 में अमेरिकी नौसेना में शामिल हुआ. यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक जहाज है
अमेरिका और इजरायल से चल रही जंग के बीज ईरान ने एक बड़ा दावा किया है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के फाइटर जेट ले जाने में सक्षम जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) पर चार बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है. अमेरिका ने इसे झूठ बताया है और कहा है कि यह विमानवाहक जहाज पूरी तरह से काम कर रहा है. इस बयानबाजी ने दुनिया का ध्यान उस पावरफुट जंगी जहाज की ओर खींच लिया है, जो तीन दशकों से भी अधिक समय से अमेरिकी सैन्य ताकत दिखाने के केंद्र में रहा है.
नोट- विमानवाहक जहाज होने का मतलब एक ऐसे जंगी जहाज होने से है जिसपर फाइटर जेट उतर सकते हैं, यहां डेरा डाल सकते हैं और यहां से उड़ान भर सकते हैं.
क्यों इतना पावरफुल है USS अब्राहम लिंकन?
USS अब्राहम लिंकन का हुल नंबर CVN-72 है. हुल नंबर (Hull Number) एक विशिष्ट पहचान कोड होता है, जो जहाज के प्रकार और विशिष्ट पहचान को दर्शाता है. USS अब्राहम लिंकन ने अमेरिकी नौसेना में अपना करियर नवंबर 1989 में शुरू किया था. यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक जहाज़ों की श्रृंखला का पांचवां जहाज है. यह निमित्ज श्रेणी (Nimitz-class) का विमानवाहक जहाज है.
यह जहाज 90 तक अलग-अलग प्रकार के विमान ले जा सकता है. इनमें लड़ाकू विमान, शुरुआती चेतावनी देने वाले विमान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विमान और हेलीकॉप्टर शामिल होते हैं. USS अब्राहम लिंकन Carrier Strike Group 3 का प्रमुख जहाज (फ्लैगशिप) है. यह नौसैनिक समूह आम तौर पर गाइडेड-मिसाइल क्रूजर, डेस्ट्रॉयर और एक पनडुब्बी से मिलकर बनता है. इन सबकी संयुक्त ताकत (मिलाकर) किसी छोटे देश की सैन्य शक्ति के बराबर होती है.
मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की ताकत का आधार
इस अमेरिकी विमानवाहक जहाज का मिडिल ईस्ट के साथ लंबा और विवादित संबंध रहा है. 2001 के बाद इसने ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम में समर्थन दिया था. 2003 में यह जहाज अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे ज्यादा चर्चा वाले पलों में से एक का मंच बना. उस समय राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश इसके डेक पर उतरे और मिशन पूरा हुआ लिखे बैनर के नीचे खड़े होकर इराक में बड़े युद्ध अभियानों के खत्म होने की घोषणा की. हालांकि इसके बाद भी युद्ध कई सालों तक चलता रहा.
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