ट्रंप झूठ बोल रहें या ईरान? अब शांति वार्ता पर छिड़ी बयानों की जंग, कोई पहले हाथ नहीं बढ़ाना चाहता

US Iran War Ceasefire Talk: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान शांति वार्ता में हिस्सा ले रहा है. उन्होंने संकेत दिया कि तेहरान की तरफ से इनकार इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ईरानी वार्ताकारों को डर है कि उनकी अपनी ही तरफ के लोग उन्हें मार सकते हैं.

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US Iran War and Ceasefire Talks: डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोल रहें या ईरान?
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  • अमेरिका- ईरान दोनों दावा कर रहे हैं कि आगे वाला शांति वार्ता करना चाहता है लेकिन बातचीत में असमंजस बना हुआ है
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान वार्ता में शामिल है लेकिन अपने ही लोगों के डर से खुलकर नहीं बोल पा रहा है
  • व्हाइट हाउस ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने हार स्वीकार नहीं की तो अमेरिका कड़ा सैन्य हमला करेगा
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US Iran War Ceasefire Talk: मिडिल ईस्ट की जंग अब उस मोड़ पर आ गई है जहां अमेरिका और ईरान, दोनों दावा कर रहे हैं कि आगे वाला देश सुलह करना चाहता है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को जोर देकर कहा कि ईरान शांति वार्ता में हिस्सा ले रहा है. उन्होंने संकेत दिया कि तेहरान की तरफ से इनकार इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ईरानी वार्ताकारों को डर है कि उनकी अपनी ही तरफ के लोग उन्हें मार सकते हैं. हालांकि दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ-साफ कहा कि भले ईरान जंग समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, लेकिन बैकचैनल से मैसेज भेजे जाने को अमेरिका के साथ बातचीत नहीं मानी जा सकती.

ट्रंप ने क्या कहा है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों के लिए आयोजित एक डिनर में कहा, “वैसे वे बातचीत कर रहे हैं और वे किसी कीमत पर कोई समझौता करना चाहते हैं. लेकिन वे यह कहने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके अपने ही लोग उन्हें मार देंगे.” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें यह भी डर है कि हम भी उन्हें मार सकते हैं.”

ट्रंप ने फिर से अपना दावा दोहराया कि जंग के चौथे सप्ताह में ईरान “पूरी तरह कमजोर किया जा रहा है”, जबकि तेहरान अभी भी महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण बनाए हुए है. इससे पहले व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया था कि अगर ईरान ने हार स्वीकार नहीं की तो ट्रंप “भयंकर हमला” करने के लिए तैयार हैं. साथ ही यह भी कहा गया कि तेहरान अभी भी बातचीत में हिस्सा ले रहा है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने पत्रकारों से कहा: “अगर ईरान मौजूदा हालात की सच्चाई स्वीकार करने में विफल रहता है, अगर वह यह समझने में असफल रहता है कि उसे सैन्य रूप से हरा दिया गया है और आगे भी ऐसा ही होगा, तो राष्ट्रपति ट्रंप सुनिश्चित करेंगे कि उस पर पहले से भी ज्यादा कड़ा प्रहार किया जाए.”

उन्होंने आगे कहा: “राष्ट्रपति ट्रंप झूठी धमकी नहीं देते और वह भयंकर हमला करने के लिए तैयार हैं. ईरान को फिर से गलत आकलन नहीं करना चाहिए.” जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के साथ बातचीत रुक गई है, तो लेविट ने जवाब दिया: “बातचीत जारी है. वे सकारात्मक और उपयोगी हैं.” लेविट ने यह बताने से इनकार कर दिया कि सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के बाद अमेरिका तेहरान में किसके साथ बातचीत कर रहा है. अली खामेनेई के बेटे और उत्तराधिकारी मुजतबा खामेनेई भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं.


ईरान ने क्या कहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति की यह टिप्पणी तब आई जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हम अमेरिका के साथ बातचीत करने का इरादा नहीं रखते. बुधवार देर रात ईरान के सरकारी टीवी को दिए एक इंटरव्यू में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है. उन्होंने कहा, “अब तक दुश्मन के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है, और हम किसी भी तरह की बातचीत की योजना भी नहीं बना रहे हैं.”

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उन्होंने कहा कि अब समझौते के लिए बात करना यह मान लेने जैसा होगा कि हम हारे हैं.

ईरान की सरकारी मीडिया ने पहले एक अज्ञात अधिकारी के हवाले से कहा था कि ईरान ने वॉशिंगटन की तरफ से आए कथित 15 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव को “नकारात्मक” जवाब दिया है. यानी उसे अस्वीकार कर दिया है.

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