पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ सड़क पर उतरी अवाम, सिंध में 'कफन' पहन कर प्रदर्शन

US Iran War and Pakistan Oil Crisis: अमेरिका और ईरान की जंग ने पाकिस्तान के सामने तेल संकट पैदा कर दिया है. पाकिस्तान के विपक्षी दलों का दावा है कि पेट्रोल की ऊंची कीमतों की वजह से “महंगाई का जिन्न” बाहर आ गया है.

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कराची में पेट्रोल की कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन (फोटो- एएफपी)

US Iran War and Pakistan Oil Crisis: पेट्रोलियम की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ पाकिस्तानी अवाम सड़क पर उतर आई है. कराची, जैकबाबाद, हैदराबाद, सुक्कुर और सिंध प्रांत के अलग-अलग हिस्सों में लोगों ने प्रदर्शन किया और रैलियां निकालीं. सुक्कुर में सिंध यूनाइटेड पार्टी (एसयूपी) ने रविवार को स्थानीय प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया. पाकिस्तान के जाने-माने अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कफन पहनकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया और भूख हड़ताल पर बैठे.

इस दौरान एसयूपी के नेता ईदन जगिरानी ने पेट्रोल कीमत में बढ़ोतरी की आलोचना करते हुए कहा कि “महंगाई का जिन्न” बाहर आ गया है, जिससे मजदूर वर्ग के लिए जरूरी खाने का सामान खरीदना भी मुश्किल हो गया है.

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं ने भी प्रेस क्लब में ही प्रदर्शन किया. पार्टी के वरिष्ठ नेता गौहर खान खोसो ने कहा कि पेट्रोल की कीमत 378 प्रति पीकेआर (पाकिस्तानी रुपए) लीटर कर दी गई है और चेतावनी दी कि अगर सरकार ने तुरंत राहत नहीं दी और गैर-जरूरी टैक्स खत्म नहीं किए तो प्रदर्शन और तेज किया जाएगा.

वहीं, 'अवामी तहरीक' ने सुक्कुर में तीर चौक से घंटा घर तक एक रैली निकाली, जिसके बाद धरना दिया गया. पार्टी के नेता अहमद कटियार और वकील सरवन जटोई ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह पेट्रोल की कीमत 378 पीकेआर और डीजल की कीमत 520 पीकेआर प्रति लीटर करने के लिए पश्चिम एशिया विवाद का बहाना बना रही है. पार्टी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह की आलोचना करते हुए सब्सिडी घोषणाओं को "दिखावटी उपाय" बताया.

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इसी तरह, नेशनल ट्रेड यूनियन फेडरेशन पाकिस्तान (एनटीयूएफ) और होम-बेस्ड विमेन वर्कर्स फेडरेशन (एचबीडब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने कराची में मिलकर प्रदर्शन किया, जिसमें मजदूरों और अलग-अलग राजनीतिक और मानवाधिकार संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. हिस्सा लेने वालों ने पेट्रोलियम लेवी खत्म करने और मौजूदा महंगाई के हिसाब से बढ़ोतरी की मांग वाले प्लेकार्ड ले रखे थे.

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, नासिर मंसूर और जहरा खान समेत लेबर नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और वर्ल्ड बैंक के आर्थिक ढांचों को खारिज कर दिया और सरकार से विदेशी कर्ज की अदायगी टालने और अधिकारियों के लिए मुफ्त ईंधन का हक वापस लेने की अपील की.

आम इंसान तहरीक ने यह दिखाने के लिए एक साइकिल रैली निकाली कि जैकबाबाद में मोटर वाले ट्रांसपोर्ट तक पहुंचने में लोगों को कैसे दिक्कतें आ रही हैं. सैयद अली शाह और अल्ताफ मिरानी समेत आंदोलन के नेताओं ने कहा कि अधिकारियों ने “गरीबों के मुंह से निवाला छीन लिया है.” उन्होंने सरकार से लोगों पर बोझ डालने के बजाय अपने “शाही” खर्चों और सरकारी प्रोटोकॉल को कम करने की अपील की.

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3 अप्रैल को, पाकिस्तान की ह्यूमन राइट्स काउंसिल (एचआरसी) ने फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ कराची प्रेस क्लब में विरोध प्रदर्शन किया, इसे “गलत” बताया और चेतावनी दी कि इससे जनता पर और पैसे का बोझ पड़ता है. अधिकार संस्था के मुताबिक, बड़ी संख्या में नागरिकों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और एक्टिविस्ट ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया, और फ्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और महंगाई और रहने के खर्च पर इसके सीधे असर पर गंभीर चिंता जताई.

पाकिस्तानी एचआरसी ने कहा, "वक्ताओं ने मिलकर मांग की कि सरकार महंगाई को कंट्रोल करने और आम लोगों को राहत देने के लिए तुरंत कदम उठाए/ उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसे जनता विरोधी कदम जारी रहे, तो आंदोलन और बढ़ेगा."

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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