- ईरान विरोध प्रदर्शन और अमेरिकी धमकियों से पाकिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है
- पाकिस्तान में सेना की उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठकें हो रही हैं ताकि संभावित खतरे का आकलन किया जा सके
- अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई के लिए पाकिस्तान से सैन्य अड्डे और हवाई क्षेत्र की मांग कर सकता है
ईरान में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं और इससे पाकिस्तान में दहशत फैल गई है. जहां ईरान में विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान में सैन्य हमले की धमकी दे रहे हैं. ऐसे में ईरान के पड़ोस में बैठे पाकिस्तान का पूरा सिस्टम सकते में है. पाकिस्तान में एक के बाद एक कई आपातकालीन बैठकें हो रही है. इन बैठकों में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ-साथ ISI चीफ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल असीम मलिक भी शामिल हैं. संकेत है कि अमेरिका और ईरान के बीच कभी भी जंग छिड़ सकती है और इससे पाकिस्तान-ईरान सीमा बेहद अस्थिर हो जाएगी. पाकिस्तान को डर है कि कहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसे मोहरा न बना दें, उसके कंधे पर रखकर ही जंग न लड़ें.
मुनीर बनेंगे ट्रंप का मोहरा?
पहले तो पाकिस्तान को लगा कि अमेरिका ईरान के खामेनेई शासन को सिर्फ खोखली धमकियां दे रहा है. लेकिन अब पाकिस्तान की पलटन को यह समझ में आ गया है कि खतरा वास्तविक है और अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की पूरी संभावना है. पाकिस्तान की परेशानी सिर्फ यह नहीं है कि जंग की स्थिति में सीमा पर अस्थिरता होगी. दूसरी फजीहत यह भी है कि जंग की स्थिति में अमेरिका पाकिस्तान से क्या चाहेगा.
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने कहा कि संघर्ष की स्थिति में, अमेरिका निश्चित रूप से ईरान पर हमले शुरू करने के लिए पाकिस्तान से सैन्य अड्डे मांगेगा. ऐसी भी संभावना है कि हवाई हमलों के लिए पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र की मांग की जा सकती है. अधिकारी ने कहा कि इससे पाकिस्तान परेशानी की स्थिति में है. ट्रंप के कार्यभार संभालने के बाद, अमेरिका को खुश करने के चक्कर में पाकिस्तान ने जल्दी-जल्दी में बहुत से वादे कर दिए. उसने अमेरिका के साथ अपने मजबूत संबंध बनाने का दावा किया, लेकिन यह अनुमान नहीं लगाया कि अगर ईरान में संघर्ष छिड़ गया, तो इस्लामाबाद को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.
मुस्लिम देश के खिलाफ पाकिस्तान अमेरिका का साथ देगा?
पाकिस्तान में हो रहीं उच्च-स्तरीय बैठकों में उन सभी प्रतिक्रियाओं पर चर्चा की गई है जिनके लिए तैयार रहने की आवश्यकता है. ईरान के खिलाफ जंग की स्थिति में हवाई क्षेत्र और सैन्य अड्डे अमेरिका को सौंपने से क्षेत्र में पाकिस्तान की छवि बहुत खराब हो जाएगी. इसके अलावा, कई पाकिस्तानी पहले से ही इस बात से परेशान हैं कि पाकिस्तान तालिबान से लड़ रहा है. ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के समर्थन से पाकिस्तान के लोगों में गुस्सा बढ़ेगा और मुस्लिम देशों के खिलाफ एक जंग में पाकिस्तान की भागीदारी पर सवाल उठेंगे.
ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष की स्थिति में, पाकिस्तान में शरणार्थियों का आना बढ़ जाएगा. पाकिस्तान के लिए यह संकट की स्थिति होगी क्योंकि यह उसकी आंतरिक अशांति के साथ भी जुड़ा होगा. फिलहाल पाकिस्तान बेहद हाई अलर्ट की स्थिति में है. सऊदी अरब और तुर्की के साथ आगे राजनयिक चैनल खोले गए हैं, जिसके दौरान इस्लामाबाद ने ईरान में संभावित संघर्ष के बारे में अपनी चिंताओं से अवगत कराया है. पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का कहना है कि इस्लामाबाद के लिए यह आगे कुआं पीछे खाई जैसी स्थिति है. एक ओर, वह अपने ही लोगों, ईरान या तुर्की को नाराज नहीं कर सकता. वहीं दूसरी ओर, यदि अमेरिका सैन्य हवाई अड्डे और हवाई क्षेत्र चाहता है, तो वह इनकार करने की स्थिति में नहीं है.
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