दो हफ्ते के लिए रुका युद्ध लेकिन दुनिया को इन पांच बड़े सवालों के जवाब का इंतजार

US Iran Ceasefire Deal: अमेरिका-ईरान के बीच 2 हफ्ते के लिए जंग रुकने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप इस सीजफायर समझौते को कैसे पेश करेंगे. क्या वे इसे अपनी जीत बताएंगे या दो हफ्ते बाद फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू होगी?

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Iran US Israel War News Updates: अमेरिका-ईरान में सीजफायर के बावजूद 5 सवाल के जवाब बाकि

US Iran Ceasefire Deal: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्ध-विराम हो गया है. यानी जंग को दो हफ्ते के लिए रोक दिया गया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है जंग रोकने के इस फैसले को इस शर्त से जोड़ा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोले और व्यापक शांति समझौते के लिए बातचीत जारी रखे. ईरान की तरफ से भी सीजफायर का ऐलान कर दिया गया है. ईरान ने इसे अपनी जीत दिखाते हुए दावा किया है कि ट्रंप उनकी 8 शर्तों को मानने के लिए तैयार हो गए हैं. मिडिल ईस्ट में दिखती स्थाई शांति की उम्मीद के बावजूद 5 बड़े सवाल अभी भी बाकी हैं और दुनिया उनके जवाब का इंतजार कर रही है.

1- डोनाल्ड ट्रंप

सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप इस समझौते को कैसे पेश करेंगे. क्या वे इसे अपनी जीत बताएंगे या दो हफ्ते बाद फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू होगी? बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार कुछ सूत्रों का कहना है कि युद्ध-विराम खत्म होने के बाद अमेरिका फिर से हवाई हमले कर सकता है और बाद में इसे जीत घोषित कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो जो तनाव पिछले 40 दिनों में मिडिल ईस्ट में देखने को मिला है, वो फिर से दोहराया जा सकता है. इन दो हफ्तों में ईरान भी सांस ले लेगा और एक और जंग के लिए तैयार हो सकता है.

2- ईरान

दूसरा बड़ा सवाल यह है कि इस समझौते को ईरान कैसे देखेगा. क्या ईरान वास्तव में अपने हमले रोक देगा या वह किसी रूप में जवाबी कार्रवाई जारी रखेगा? दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं. खबर लिखे जाने तक सीजफायर के ऐलान के बावजूद खाड़ी देशों का आरोप था कि अभी भी ईरान की ओर से हमला किया जा रहा है.

3- इजरायल

तीसरा महत्वपूर्ण सवाल इजरायल को लेकर है. इजरायल ने अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर को तो अपना समर्थन दिया है लेकिन पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने यह साफ-साफ कहा है इसमें लेबनान में जारी लड़ाई शामिल नहीं है. यानी इजरायल लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ हमलों को नहीं रोकेगा. बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि संघर्ष विराम में लेबनान भी शामिल है, जहां इजरायल ने जमीनी सेना उतार रखी है. जबकि अब नेतन्याहू ठीक इसके उलट बात बोल रहे हैं. यह सीजफायर डील में पहली बड़ी फूट मानी जा रही है. याद रहे कि इजरायल का नेतृत्व कहता रहा है कि जब तक हिजबुल्लाह का खतरा दूर नहीं हो जाता, वे लेबनान नहीं छोड़ेंगे. 

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इसके अलावा इसकी संभावना नहीं है कि नेतन्याहू अमेरिका और ईरान की तरह जीत का दावा कर पाएंगे. याद रहे कि 28 फरवरी को युद्ध की घोषणा करते हुए एक भाषण में उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन का लक्ष्य ईरान में अयातुल्ला शासन से खतरे को समाप्त करना है और यह ऑपरेशन जब तक आवश्यक होगा तब तक जारी रहेगा. लेकिन जैसे हालात हैं, ईरानी सेना अभी भी इजरायल के लिए खतरा पैदा करने में सक्षम है और इस्लामिक सरकार अभी भी अपनी जगह पर है, भले नेतृत्व बदल गया है.

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4- होर्मुज का रास्ता

चौथा अहम सवाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है. यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. भले ट्रंप ने कहा है कि सीजफायर डील के रूप में ईरान होर्मुज को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलने के लिए राजी हो गया है लेकिन हमें ईरान के विदेश मंत्री की ट्वीट पढ़ना चाहिए और उसकी भाषा देखनी चाहिए. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने लिखा है कि "दो हफ्तों की अवधि के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही संभव होगी, लेकिन इसके लिए ईरान की सशस्त्र सेनाओं के साथ समन्वय (कॉर्डिनेट) करना होगा और कुछ तकनीकी सीमाओं का भी ध्यान रखना होगा.” यह स्पष्ट नहीं है कि यह तकनीकी सीमाएं क्या होंगी. अगर ईरान इसे फिर से बंद कर देता है या वहां तनाव बढ़ जाता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है.

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5- अमेरिका और खाड़ी के सहयोगी देश

पांचवा अहम सवाल यह है कि अब मिडिल ईस्ट में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के रिश्ते कैसे रहेंगे. इस युद्ध ने पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित किया है. आगे अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ किस तरह की रणनीति अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है. इस युद्ध के दौरान क्षेत्र के कई देशों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है. कुछ देश अमेरिका के साथ खड़े दिखाई दिए, जबकि कुछ ने तनाव कम करने की अपील की. ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इस संघर्ष के बाद अमेरिका अपने पुराने सहयोगियों पर पहले जैसा भरोसा करेगा या अपनी रणनीति बदल सकता है.

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