ट्रंप का पीस बोर्ड गाजा के पुनर्निर्माण के लिए देगा 5 अरब डॉलर की मदद, अपने सैनिक भी भेजेगा

अब तक साफ नहीं है कि पीस बोर्ड के 20 से ज्यादा सदस्यों में से कितने सदस्य पहली बैठक में शामिल होंगे. हालांकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बैठक में शामिल होने की उम्मीद नहीं है

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गाजा के पुनर्निर्माण में ट्रंप का पीस बोर्ड करेगा मदद.
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  • ट्रंप ने नवगठित पीस बोर्ड द्वारा युद्धग्रस्त गाजा के पुनर्निर्माण के लिए पांच अरब डॉलर देने का वादा किया है
  • पीस बोर्ड क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने और पुलिस बलों के लिए हजारों कर्मियों को तैनात करेगा
  • इंडोनेशिया की सेना ने गाजा में मानवीय और शांति मिशन के तहत आठ हजार सैनिक भेजने की संभावना जताई है
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वाशिंगटन:

ट्रंप के नवगठित पीस बोर्ड ने युद्धग्रस्त गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर देने का वादा किया है,ये बात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कही. साथ ही क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और पुलिस बलों के लिए हजारों कर्मियों को तैनात करने की भी प्रतिबद्धता जताई गई है. ट्रंप ने कहा कि बोर्ड के सदस्य गुरुवार को जब वाशिंगटन में अपनी पहली बैठक के लिए इकट्ठा होंगे, तब इसका औपचारिक ऐलान किया जाएगा. ये  जानकारी एसोसिएट्स प्रेस के हवाले से सामने आई है.

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कौन से देश गाजा में अपने सैनिक भेजेंगे?

ट्रंप ने पीस बोर्ड की प्रतिज्ञाओं का ऐलान करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "पीस बोर्ड इतिहास का सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय निकाय साबित होगा, इसके अध्यक्ष के रूप में सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात है." हालांकि ट्रंप ने ये नहीं बताया कि पीस बोर्ड के किन सदस्य देशों ने गाजा के पुनर्निर्माण के लिए प्रतिबद्धता जताई है. और कौन से देश वहां अपने सैनिक भेजेंगे. इस बीच इंडोनेशिया की सेना ने रविवार को ये  जरूर कहा कि गाजा में मानवीय और शांति मिशन के तहत संभावित तैनाती के लिए जून के अंत तक उसके 8,000 सैनिक तैयार होने की उम्मीद है. ट्रंप को मिली यह पहली ठोस प्रतिबद्धता है.

फिलिस्तीनी क्षेत्र के पुनर्निर्माण में खर्च होंगे 70 अरब डॉलर

बता दें कि फिलिस्तीनी क्षेत्र का पुनर्निर्माण एक चुनौतीपूर्ण काम है. संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ के अनुमान के मुताबिक, इस क्षेत्र के पुनर्निर्माण में 70 अरब डॉलर का खर्च आएगा. बता दें कि इजरायल दो साल से ज्यादा समय से गाजा पट्टी में बम बरसा रहा हैं, कुछ ही जगहों इन हमलों से अछूती रही हैं. सीजफायर समझौते में सुरक्षा बनाए रखने और हमास ग्रुप के निरस्त्रीकरण को सुनिश्चित करने के लिए एक सशस्त्र अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल के गठन का प्रावधान है, जो इज़रायल की मुख्य मांग है. अब तक, कुछ ही देशों ने प्रपोज्ड फोर्स में शामिल होने में रुचि दिखाई है.

क्या था सीजफायर समझौते का मकसद?

10 अक्टूबर को अमेरिका की मध्यस्थता से हुए सीजफायर समझौते का मकसद इजरायल और हमास के बीच दो साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध को रोकना था. हालांकि भीषण लड़ाई अब शांत है,  लेकिन इज़रायली सेना बार-बार हवाई हमले कर सैन्य नियंत्रण वाले क्षेत्रों के पास फ़िलिस्तीनियों पर लगातार गोलीबारी की है. बता दें कि ये अब तक साफ नहीं है कि पीस बोर्ड के 20 से ज्यादा सदस्यों में से कितने सदस्य पहली बैठक में शामिल होंगे. हालांकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बैठक में शामिल होने की उम्मीद नहीं है.

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