अमेरिका के विदेश मंत्री ने खुद माना- ईरान के सुप्रीम लीडर जिंदा और सुपर एक्टिव हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार इशारों में मोजतबा खामेनेई के सार्वजनिक नहीं आने पर उनकी सलामती को लेकर सवाल किए थे. लेकिन अब अमेरिका विदेश मंत्री ने खुद माना है कि वह जिंदा हैं.

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अमेरिका विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि मोजतबा सुपर एक्टिव हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि  ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई जिंदा हैं. इससे पहले अमेरिका की ओर से उनकी सार्वजनिक नहीं आने पर सवाल उठाए जाते थे. लेकिन अब अमेरिका विदेश मंत्री ने खुद इसकी पुष्टि कर दी है कि मोजतबा जिंदा हैं.  मार्को रूबियो ने कहा कि वह जिंदा हैं और सुपर एक्टिव है.अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि ऐसे पुख्ता संकेत मिल रहे हैं कि ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई एक खास स्तर पर लगातार सक्रिय हैं और फैसले ले रहे हैं.

बता दें कि 56 साल के मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता अली खामेनेई की जगह ली है. बीते 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हवाई हमलों में अली खामेनेई मारे गए थे. इसी हमले के बाद से दोनों पक्षों के बीच सीधे युद्ध की शुरुआत हुई थी.

ईरान से वार्ता को लेकर नाउम्मीद नहीं हैं मार्को रूबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ रुकी हुई परमाणु वार्ता को दोबारा शुरू करने की उम्मीद भी जताई है. हालांकि, जमीन पर हालात अब भी नाजुक हैं और युद्धविराम पूरी तरह से डगमगाया हुआ नजर आ रहा है. ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद पहली बार किसी सार्वजनिक गवाही में शामिल हुए रुबियो ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि ईरान कुछ ऐसे परमाणु मुद्दों पर बातचीत करने के लिए तैयार हो गया है, जिन पर वह पहले कभी बात करने को भी राजी नहीं था.

मार्को रुबियो ने सीनेट की समिति के सामने खुलासा किया कि ईरानी नेतृत्व अब अपने परमाणु कार्यक्रम के उन हिस्सों पर भी बातचीत के लिए टेबल पर आने को तैयार है, जिनका जिक्र करने से भी वे एक महीने या एक साल पहले तक साफ इनकार कर रहे थे. हालांकि, उन्होंने इस बात पर ज्यादा जानकारी नहीं दी. इसके साथ ही उन्होंने आगाह भी किया कि ईरान के राजी होने का मतलब यह कतई नहीं है कि अंतिम समझौता हमारे मनमुताबिक होने की राह पर है, क्योंकि ईरान के मौजूदा नेतृत्व में चल रही अस्थिरता के कारण ये बातचीत बेहद जटिल हो गई है.

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