फारस की खाड़ी में है सबसे ज्यादा तेल, फिर अमेरिका कैसे करता है ऑयल का सबसे ज्यादा उत्पादन? समझिए पूरा खेल

यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के आंकड़ों के अनुसार, तो तेल उत्पादन के मामले में अमेरिका ने लंबी छलांग लगाई है. सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों के पास तेल के भंडार तो बहुत हैं, लेकिन वे 'ओपेक' (OPEC) संगठन के नियमों से बंधे हुए हैं.

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  • अमेरिका आज दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है जो प्रतिदिन सऊदी अरब और रूस से अधिक तेल निकालता है
  • शेल क्रांति और हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग से अमेरिका ने पारंपरिक तेल उत्पादन में बड़ा बदलाव किया है
  • रूस पर लगे प्रतिबंधों और ओपेक+ की उत्पादन कटौती ने उसकी तेल उत्पादन क्षमता को कम कर दिया है
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दुनिया के नक्शे पर जब तेल की बात होती है, तो जेहन में सबसे पहले सऊदी अरब के रेतीले मैदान और खाड़ी देशों की तस्वीर उभरती है. पृथ्वी पर सबसे ज्यादा तेल यानी करीब आधा हिस्सा तो फारस की खाड़ी इलाके में है, लेकिन जब बात सबसे ज्यादा उत्पादन की आती है तो ये देश पिछड़ जाते हैं. अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. जिस अमेरिका को कभी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था, वह आज प्रतिदिन इतना तेल निकाल रहा है जितना रूस और सऊदी अरब मिलकर भी नहीं निकाल पा रहे. आइए जानते हैं आखिर अमेरिका ने यह करिश्मा कैसे किया और कैसे उसने रूस का दबदबा खत्म कर दिया.

दुनिया के टॉप तेल उत्पादक

यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो तेल उत्पादन के मामले में अमेरिका ने लंबी छलांग लगाई है. हालांकि 22 मिलियन बैरल का आंकड़ा 'कुल पेट्रोलियम लिक्विड' (जिसमें नेचुरल गैस और अन्य ईंधन शामिल हैं) को दर्शाता है, लेकिन शुद्ध कच्चे तेल के मामले में भी वह नंबर वन है.

प्रतिदिन तेल उत्पादन किस देश में कितना?

  • अमेरिका- 13.5 से 21+ मिलियन बैरल
  • सऊदी अरब- 9.5 - 10 मिलियन बैरल
  • रूस - 9.8 - 10 मिलियन बैरल
  • कनाडा- 5.9 मिलियन बैरल
  • चीन-4.3 मिलियन बैरल
  • ईरान- 4.2 मिलियन
  • इराक- 4.4 मिलियन

रूस का कभी था राज, अब अमेरिका ने छीना ताज

एक समय था जब रूस दुनिया के तेल बाजार का बेताज बादशाह हुआ करता था. साल 2018 से पहले अक्सर रूस और सऊदी अरब के बीच नंबर वन बनने की होड़ लगी रहती थी. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में समीकरण पूरी तरह बदल गए. रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और ओपेक+ देशों द्वारा उत्पादन में की गई कटौती ने रूस की रफ्तार को धीमा कर दिया.

वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने अपनी घरेलू नीतियों और तकनीक के दम पर उत्पादन को उस स्तर पर पहुंचा दिया, जिसकी कल्पना एक दशक पहले तक नामुमकिन थी. आज अमेरिका न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वह दुनिया का एक बड़ा तेल निर्यातक भी बन चुका है.

आखिर अमेरिका इतना तेल निकाल कैसे रहा है?

अब सवाल उठता है कि जब दुनिया का सबसे ज्यादा कच्चा तेल खाड़ी देशों के पास है, तो अमेरिका सबसे ज्यादा उत्पादन कैसे कर रहा है? इसका जवाब है'शेल क्रांति'. अमेरिका ने पारंपरिक कुओं के बजाय 'हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग' और 'हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग' जैसी आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया.

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इस तकनीक के जरिए अमेरिका उन चट्टानों (Shale Rocks) से भी तेल निकाल रहा है, जिन्हें पहले बेकार समझा जाता था. टेक्सास का 'पर्मियन बेसिन' क्षेत्र आज तेल उत्पादन का पावरहाउस बन चुका है. अमेरिका की इस कामयाबी के पीछे वहां के कड़े निजी स्वामित्व नियम भी हैं, जहां जमीन के नीचे मिलने वाले संसाधनों पर सरकार का नहीं बल्कि जमीन के मालिक का हक होता है, जिससे ड्रिलिंग में तेजी आती है.

खाड़ी देशों की क्या है चिंताएं?

सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों के पास तेल के भंडार तो बहुत हैं, लेकिन वे 'ओपेक' (OPEC) संगठन के नियमों से बंधे हुए हैं. बाजार में तेल की कीमतें स्थिर रखने के लिए ये देश अक्सर जानबूझकर अपना उत्पादन कम रखते हैं. इसके विपरीत, अमेरिका किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन का हिस्सा नहीं है और अपनी मर्जी से जितना चाहे उतना तेल निकाल सकता है.

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