दुनिया में फिर शुरू होगी परमाणु रेस? अमेरिका-चीन के बीच घमासान से गहराई आशंका, जानें पूरी कहानी

अमेरिका ने चीन पर 2020 में छोटे स्तर का अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट करने का आरोप लगाया है और बराबरी का हक मांगते हुए खुद परमाणु परीक्षण शुरू करने की बात कही है.

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  • अमेरिका ने चीन पर 2020 में कजाकिस्तान के पास छोटे स्तर का भूमिगत परमाणु परीक्षण करने का आरोप लगाया है
  • ट्रंप प्रशासन ने असंतुलन का हवाला देते हुए अपने परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने का ऐलान किया है
  • चीन ने अमेरिका के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह परमाणु परीक्षण के सभी प्रतिबंधों का पालन कर रहा है
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दुनिया में एक बार फिर से परमाणु परीक्षणों का दौर शुरू होने की आशंका गहरा गई है. अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने चीन पर आरोप लगाया है कि उसने 2020 में छोटे स्तर का अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट किया था. अब अमेरिका ने इसके जबाव में खुद परमाणु परीक्षण शुरू करने का ऐलान किया है. उसका कहना है कि वह इस मामले में किसी तरह का असहनीय नुकसान नहीं झेलना चाहता. अगर ऐसा हुआ तो परमाणु परीक्षणों पर दशकों से चला आ रहा प्रतिबंध का दौर खत्म हो सकता है. 

चीन पर परमाणु परीक्षण का आरोप

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सीनियर अधिकारी क्रिस्टोफर येव ने चीन पर परमाणु परीक्षण का आरोप लगाते हुए कहा कि 22 जून 2020 को कजाकिस्तान की सीमा के पास एक भूकंप निगरानी केंद्र ने 2.75 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया था. इस भूकंप का केंद्र 450 मील दूर चीन के मुख्य परमाणु परीक्षण स्थल लोप नूर के पास था. इस बात की संभावना काफी अधिक है कि यह भूकंप परमाणु परीक्षण की वजह से  आया था. 

अमेरिका बोला, हम बराबरी करेंगे

क्रिस्टोफर येव ने आगे कहा कि अगर हमारे दुश्मन परमाणु परीक्षण करते हैं और अमेरिका नहीं करता तो वह खुद को असहनीय नुकसान की स्थिति में डाल लेगा. ट्रंप सरकार ऐसा नहीं करेगी और वह बराबरी का मौका चाहती है. अमेरिका में आर्म्स कंट्रोल और इंटरनेशनल सिक्योरिटी के अंडर सेक्रेटरी थॉमस डिनानो ने एक बयान में कहा कि परमाणु परीक्षण से चीन का इनकार हालात को बदतर बना रहा है. हमें उम्मीद है कि इस मामले पर बातचीत होगी. 

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चीन का इनकार, अमेरिका पर वार

चीन ने अमेरिका के दावों को सिरे से खारिज किया है और आरोप लगाया है कि वह अपने परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने का बहाना बना रहा है. चीन ने कहा कि उसने सभी परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध लगाने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते का पूरी तरह और ईमानदारी से पालन किया है. वह वैश्विक परमाणु सुरक्षा मानकों और संधियों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहा है.

रूस और CTBTO का भी बयान

इस मामले पर रूस का भी बयान आया है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्रि पेश्कोव ने साफ कहा कि न तो चीन ने और न ही रूस ने कोई परमाणु परीक्षण किया है, जैसा की अमेरिका की तरफ से आ रही खबरों में दावा किया गया है. उन्होंने कहा कि चीन ने भी इस तरह की खबरों का खंडन किया है. समग्र परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि संगठन (CTBTO) ने भी कहा है कि 22 जून 2020 को उसने दो बेहद हल्के भूकंप दर्ज किए थे, लेकिन ये परमाणु परीक्षण से आए या किसी और वजह से, इसका पता नहीं चला है. 

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किसके पास कितने परमाणु हथियार?

फेडरेशन ऑफ एटमिक साइंटिस्ट की 2025 स्टेटस ऑफ द वर्ल्ड न्यूक्लियर फोर्सेज रिपोर्ट की मानें तो दुनिया के 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं. इनकी संख्या 12,331 है. इनमें से 9600 परमाणु हथियार एक्टिव कंडीशन में हैं. हालांकि शीत युद्ध का एक दौर ऐसा भी था, जब दुनिया मं 70 हजार से ज्यादा परमाणु हथियार थे. बाद में देशों ने अपने परमाणु हथियारों में कटौती की. 

  • रूस - 5459
  • अमेरिका - 5277
  • चीन - 600
  • फ्रांस - 290
  • यूके - 225 
  • भारत - 180
  • पाकिस्तान - 170 
  • इजरायल - 90
  • उत्तर कोरिया - 50

दशकों पर परमाणु परीक्षणों पर रोक

दरअसल दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार अमेरिका और रूस के पास माने जाते हैं. हालांकि अमेरिका और चीन ने पिछले कुछ दशकों से आधिकारिक रूप से परमाणु परीक्षण नहीं किए हैं. परमाणु परीक्षणों पर अब तक कॉम्प्रिहेंसिव टेस्ट बैन ट्रीटी (CTBT) जैसी वैश्विक व्यवस्थाओं के कारण अनौपचारिक रोक लगी हुई है. अमेरिका ने पिछला न्यूक्लियर टेस्ट 1992 में किया था, जबकि चीन का आधिकारिक परमाणु परीक्षण 1996 में हुआ था. 

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नई संधि में चीन को रखना चाहते हैं ट्रंप

अमेरिका और चीन ने परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाने वाली समग्र समझौता कर रखा है. हालांकि दोनों ने ऑफिशियली इसे स्वीकार नहीं किया है. परमाणु हथियारों की संख्या सीमित करने के लिए START संधि की अवधि हाल ही में खत्म हो चुकी है. अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ऐसी नई संधि चाहते हैं जिसमें चीन को भी शामिल किया जाए. ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि जब चीन और रूस चुपके से अपनी परमाणु क्षमता बढ़ा रहे हैं तो अमेरिका को भी अपनी सुरक्षा के लिए बराबरी के आधार पर परीक्षण शुरू करने चाहिए. बहरहाल इतना साफ है कि अगर मामला तूल पकड़ा तो परमाणु रेस एक बार फिर से तेज होने का खतरा पैदा हो सकता है. 

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