- कनाडा में पढ़ाई के लिए भारतीय छात्रों को अब केवल पासपोर्ट नहीं बल्कि भारी बैंक बैलेंस की जरूरत
- कनाडा सरकार ने स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम वीजा प्रक्रिया बंद कर सामान्य वीजा प्रक्रिया को लागू किया है
- कनाडा में कॉलेज की फीस सालाना लगभग 9-15 लाख रुपये और गारंटीड फंड राशि करीब 12.5 लाख रुपये हो गई है
सपनों के सूटकेस और लाखों का कर्ज लेकर हर साल हजारों भारतीय छात्र सात समंदर पार कनाडा की उड़ान भरते हैं. जहां एक तरफ घर गिरवी रखकर पढ़ाई के लिए फंड जुटाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ बदलती वीजा पॉलिसी और विदेशी धरती के संघर्ष ने मिडिल क्लास परिवारों की कमर तोड़ दी है. कनाडा जाने वाले छात्रों के लिए अब सिर्फ पासपोर्ट होना काफी नहीं है, बल्कि बैंक बैलेंस का भारी-भरकम होना सबसे बड़ी शर्त बन गया है. उज्जैन के छात्र गुरकीरत सिंह के साथ हुए हादसे ने सुरक्षा और भविष्य पर भी सवाल खड़े किए हैं. ऐसे में समझना जरूरी है कि आज के दौर में एक भारतीय छात्र किन परिस्थितियों में कनाडा पहुंचता है और इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय और पैसा दांव पर लगा होता है.
गुरकीरत की कहानी ने याद दिला दी 'कनाडा ड्रीम' की हकीकत
उज्जैन के गुरकीरत सिंह कनाडा के फोर्ट सेंट जॉन, ब्रिटिश कोलंबिया स्थित नॉर्थन लाइट्स कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे. 14 मार्च को वहां कुछ युवकों ने उसकी हत्या कर दी. गुरकीरत की मौत के बाद परिवार उसका पार्थिव शरीर उज्जैन लाकर अंतिम संस्कार करना चाहता था. लेकिन इस प्रक्रिया में करीब तीन सप्ताह का समय लगने और कनाडा सरकार को लगभग 35 लाख रुपये रुपये खर्च हो रहे थे. ऐसे में परिजनों ने कनाडा में ही अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया. गुरकीरत के पिता ने मुख्यमंत्री और सांसद को एक आवेदन सौंपा. वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार कनाडा में ही कर अस्थियां उज्जैन लाना चाहते हैं.
क्या है कनाडा का वीजा प्रोसेस?
कनाडा जाने के लिए अब केवल टिकट और फीस काफी नहीं है. 2024 के अंत में कनाडा सरकार द्वारा SDS यानी स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम वीजा प्रोसेस को बंद करने और GIC यानी गारंटीज इन्वेस्टमेंट सर्टिफिकेट की राशि दोगुनी करने से मिडिल क्लास परिवारों पर दबाव बढ़ा है. अब कनाडा में वीजा प्रोसेस काफी कठिन हो गया है. पहले भारतीय छात्रों को SDS के जरिए 20 दिनों में वीजा मिल जाता था, लेकिन अब सभी को सामान्य तरीके से अप्लाई करना पड़ता है, जिसमें समय ज्यादा लगता है और जांच सख्त होती है. इसका पूरा तरीका समझिए:
- सबसे पहले छात्र को कनाडा के किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी से ऑफर लेटर लेना होता है.
- कॉलेज के ऑफर लेटर के साथ-साथ उस राज्य से भी अनुमति पत्र (PAL) लेना होता, जहां कॉलेज-यूनिवर्सिटी है. इसके बिना वीजा फाइल नहीं लगती.
- भारत में ही पैनल डॉक्टर से मेडिकल चेकअप और पुलिस से कैरेक्टर सर्टिफिकेट बनवाना होता है.
- इसके बाद छात्र को ऑनलाइन अप्लाई करना होता है. इसमें कॉलेज फीस की रसीद, GIC का सबूत और लोन या फंड के कागज लगाने होते हैं.
- वीजा फाइल करने के बाद छात्र को VFS सेंटर जाकर उंगलियों के निशान और फोटो बायोमेट्रिक देने होते हैं.
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मिडिल क्लास फैमिली के लिए बेहद खर्चीला
कनाडा जाने का खर्च अब 15-20 लाख नहीं, बल्कि 25-30 लाख रुपये तक पहुंच गया है. वहां के कॉलेजों में औसत फीस 15 हजार से 25 हजार कनाडाई डॉलर यानी लगभग 9 से 15 लाख रुपये सालाना तक होती है. इसके अलावा छात्र को गारंटीड फंड यानी GIC जमा करना पड़ता है. पहले यह 10,000 डॉलर था, जिसे बढ़ाकर अब 20,635 डॉलर यानी करीब साढ़े 12 लाख रुपये कर दिया गया है.
जमीन गिरवी रखकर लेते हैं लोन
अपने बच्चों को कनाडा भेजने वाले ज्यादातर मिडिल क्लास परिवार अपनी जमीन या घर गिरवी रखकर सरकारी बैंकों से 20-25 लाख का लोन लेते हैं. कुछ छात्र प्राइवेट फाइनेंस से बिना गिरवी के लोन लेते हैं, लेकिन इसका ब्याज 12-15% तक होता है, जो पढ़ाई खत्म होने के बाद भारी बोझ बन जाता है.
वीजा मिलने में कितना लगता है वक्त?
लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी ऑफर लेटर आने में 2 से 8 सप्ताह का वक्त लगता है. पहले Non-SDS वीजा प्रोसेसिंग में 4-6 हफ्ते का वक्त लगता था. लेकिन SDS बंद होने और बैकलॉग के कारण अब इसमें 8 से 12 सप्ताह या उससे ज्यादा का समय लग रहा है. वीजा स्टाम्प होने के बाद छात्र फ्लाइट लेते हैं. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. जब छात्र कनाडा के एयरपोर्ट पहुंचते हैं, तो इमीग्रेशन ऑफिसर सवाल पूछता है और सब सही होने पर एक स्टडी परमिट देता है. कई बार डॉक्यूमेंट में कमी होने पर छात्रों को वहीं से डिपोर्ट भी कर दिया जाता है.
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