ईरान पर ट्रंप क्यों पलटे? धमकी की जगह धन्यवाद दे रहे... पुतिन के फोन कॉल्स तो वजह नहीं?

पुतिन ने ईरान में “उपद्रवियों” द्वारा सरकारी, सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर हमलों, साथ ही सुरक्षा और कानून प्रवर्तन बलों पर विदेशी समर्थन से किए गए हिंसक हमलों की निंदा की.

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  • ट्रंप ने ईरानी सरकार को सैकड़ों राजनीतिक कैदियों की फांसी रद्द करने के लिए धन्यवाद दिया है
  • ट्रंप ने ईरान की इस फांसी रद्द करने की कार्रवाई को सम्मानित करते हुए क्षेत्रीय तनाव कम करने की अपेक्षा जताई
  • ईरानी राष्ट्रपति ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन को संयुक्त राष्ट्र में समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक असामान्य कदम उठाते हुए ईरानी सरकार को सैकड़ों राजनीतिक कैदियों को फांसी न देने के लिए धन्यवाद दिया. ट्रंप ने व्हाइट हाउस से फ्लोरिडा के पाम बीच स्थित अपने मार-ए-लागो एस्टेट में सप्ताहांत बिताने के लिए रवाना होते समय पत्रकारों से कहा कि ईरान ने 800 से अधिक लोगों की फांसी रद्द कर दी है. वह इस कदम का "बहुत सम्मान" करते हैं.

यह बयान इसलिए ज्यादा चौंकाता है कि ट्रंप लगातार ईरान को अब तक धमकी दे रहे थे. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों की हत्याएं कीं तो अमेरिका ईरान पर सैन्य हमला कर सकता है. हालांकि, पिछले दो दिनों में, अमेरिका के कई मध्य पूर्वी सहयोगियों ने ट्रंप प्रशासन से हमले को टालने का आग्रह किया था, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि ऐसा करने से पहले से ही अस्थिर क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था भी और अधिक अस्थिर हो जाएगी.

ईरान के राष्ट्रपति ने किया कॉल

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से टेलीफोन पर बातचीत के दौरान संयुक्त राष्ट्र में ईरान के पक्ष में रूस के समर्थन के लिए आभार जताया. यह जानकारी ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय ने दी. राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ईरान के “वैध अधिकारों” के समर्थन में रूस की भूमिका की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की घरेलू नीति जनता-केंद्रित है और लोगों की मांगों को सुनने तथा देश पर लगाए गए “क्रूर” प्रतिबंधों के कारण उत्पन्न समस्याओं को कम करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं.

पेजेशकियन ने पुतिन को ईरान में हालिया घटनाक्रमों की जानकारी भी दी और इन घटनाओं में अमेरिका, इजरायल और कुछ यूरोपीय देशों की प्रत्यक्ष भूमिका और हस्तक्षेप का उल्लेख किया. वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस ईरान में हो रहे घटनाक्रमों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ नजर रखे हुए है. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में ईरान में जो कुछ हुआ, वह ‘कलर रिवॉल्यूशन' जैसे परिदृश्यों से मिलता-जुलता है.

पुतिन ने ईरान में “उपद्रवियों” द्वारा सरकारी, सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों पर हमलों, साथ ही सुरक्षा और कानून प्रवर्तन बलों पर विदेशी समर्थन से किए गए हिंसक हमलों की निंदा की. उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरानी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि रूस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की स्थिति और उसके रुख को स्पष्ट करने तथा हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस हमेशा ईरान के साथ संबंधों के और विस्तार का स्वागत करता है और सहयोग परियोजनाओं में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया.

पुतिन ने नेतन्याहू से बात की

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान को लेकर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बाच की और पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट की स्थिति पर चर्चा की. रूसी सरकार द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुतिन ने कूटनीतिक माध्यमों से क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया और इस संवाद में मध्यस्थता करने के लिए रूस की इच्छा जताई. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक ईरान और पश्चिम एशिया में स्थिति ‘अत्यंत तनावपूर्ण है और राष्ट्रपति तनाव कम करने के लिए अपने प्रयास जारी रखे हुए हैं''.

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रूसी समाचार एजेंसी ‘तास' ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने राजनयिक समाधान के लिए ईरान को वाशिंगटन की मांगों से अवगत करा दिया है. तास ने फ्लोरिडा में इजराइली-अमेरिकी परिषद द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में विटकॉफ के भाषण को उद्धृत किया, ‘‘मुझे उम्मीद है कि कूटनीतिक समाधान निकल आएगा. चार मुद्दे हैं: परमाणु संवर्धन और मिसाइलें, जिन्हें कम करने की आवश्यकता है. उनके पास मौजूद समय में दो टन परमाणु सामग्री है, जो 3.67 से 60 प्रतिशत तक संवर्धित है. अगर वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में लौटना चाहते हैं, तो हम इन चारों मुद्दों को कूटनीतिक रूप से हल कर सकते हैं, और यह बहुत अच्छा होगा. मुझे लगता है कि दूसरा विकल्प बुरा है.''
 

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