- अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में सोमवार को दूसरे दौर की सीजफायर वार्ता होने वाली है.
- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने वार्ता में डील न होने पर ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को नष्ट करने की धमकी दी.
- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने ट्रंप की धमकियों को खारिज करते हुए परमाणु अधिकारों को गैरकानूनी ठहराया.
ईरान-अमेरिका सीजफायर पर सोमवार 20 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत होनी है. इस बातचीत से पहले दोनों तरफ से फिर से धमकी दिए गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा कि सोमवार की वार्ता में डील नहीं हुई तो ईरान के प्लांट, ब्रिज सब उड़ा देंगे. दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'दुखती रग' पर वार किया है. ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ट्रंप ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु अधिकारों का विरोध करने की स्थिति में नहीं हैं.
पेजेश्कियन बोले- ट्रंप ईरान को परमाणु कार्यक्रम के अधिकार से वंचित नहीं कर सकते
दरअसल ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि ट्रंप उस स्थिति में नहीं हैं कि वे ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार से वंचित कर सकें. उन्होंने ये टिप्पणियां रविवार को कीं. दो दिन पहले ट्रंप ने धमकी दी कि यदि कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के संवर्धित यूरेनियम को "कहीं अधिक शत्रुतापूर्ण रूप में" अपने कब्जे में ले लेगा.
उन्होंने आगे कहा, "मानवीय सिद्धांतों के नजरिए से प्रत्येक स्वतंत्र व्यक्ति को - चाहे उसका धर्म, आस्था, नस्ल या जाति कुछ भी हो अपने अविच्छेद्य अधिकारों का उपभोग करने का हक होना चाहिए."
ईरानी राष्ट्राध्यक्ष ने उन स्व-घोषित मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की भी कड़ी आलोचना की, जो ईरान पर हुए उन आपराधिक अमेरिकी-इजरायली हमलों पर चुप रहे, जिनमें वैज्ञानिकों की हत्या की गई थी और नागरिकों तथा रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया था.
ईरानी राष्ट्रपति ने दोहराया- हम जो कर रहे, वह वैध आत्मरक्षा है
उन्होंने आगे विरोधियों के इन युद्ध अपराधों की निंदा करते हुए इन्हें उनकी हताशा और विफलता का संकेत बताया. क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा के प्रति ईरान के सैद्धांतिक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस्लामी गणराज्य युद्ध फैलाने का प्रयास नहीं कर रहा है, और न ही वह कभी किसी संघर्ष की शुरुआत करने वाला रहा है और न ही कभी होगा. उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा, "हम शांतिवादी हैं, और हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वह वैध आत्मरक्षा है."
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