बदले-बदले ट्रंप के सुर: न होर्मुज खुला, न ईरान झुका… फिर क्यों पीछे हट रहा अमेरिका?

ईरान-अमेरिका युद्ध अब खत्म होने की कगार पर है. डोनाल्ड ट्रंप खुद इस ओर इशारा कर चुके हैं. अब तक के हालात बताते हैं कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है. US के लिए यह युद्ध लंबा और महंगा साबित हुआ है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव बढ़ा है. ऐसे में ट्रंप का युद्ध खत्म करने का फैसला रणनीतिक जीत नहीं, बल्कि मजबूरी का संकेत ज्यादा लगता है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान रोक सकता है.
  • ट्रंप ने कहा कि होर्मुज खोलना अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है और युद्ध खत्म करने के लिए समझौता जरूरी नहीं.
  • ईरान का कड़ा पलटवार, रिजीम चेंज में असफलता और होर्मुज बंद रहने से अमेरिका की रणनीति प्रभावित हुई है.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-अमेरिका युद्ध में अचानक बड़ा मोड़ आता दिख रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका जल्द ही ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान रोक सकता है. दिलचस्प बात यह है कि यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब न तो ईरान झुका है, न ही अमेरिका अपने प्रमुख रणनीतिक लक्ष्यों (जैसे रिजीम चेंज या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना) को हासिल कर पाया है.

ट्रंप का बड़ा यू-टर्न क्या है?

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 2-3 हफ्तों के भीतर ईरान पर सैन्य कार्रवाई रोक देगा. उन्होंने यह भी साफ किया कि जंग खत्म करने के लिए ईरान के साथ कोई समझौता जरूरी नहीं है. अमेरिका अब इस संघर्ष में ज्यादा समय तक नहीं रहेगा. ट्रंप का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है.

यह भी पढ़ें- दो-तीन हफ्ते में खत्म हो सकता है युद्ध, ट्रंप का बड़ा बयान

न समझौता… न होर्मुज खुला

ट्रंप का ताजा रुख उनके पुराने बयानों से बिल्कुल उलट है. पहले वे कहते थे कि अमेरिका हर हाल में होर्मुज खुलवाएगा, लेकिन अब उनका कहना है, 'होर्मुज को खुला रखना उन देशों की जिम्मेदारी है, जो इस पर निर्भर हैं.' यानी साफ है कि अमेरिका अब इस रणनीतिक दबाव से खुद को अलग कर रहा है.

क्यों बदल रहे हैं ट्रंप के सुर?

ट्रंप के बदलते रुख के पीछे कई ठोस वजहें सामने आ रही हैं:

1. ईरान का कड़ा पलटवार

ईरान लगातार अमेरिकी और इजरायली हमलों का जवाब दे रहा है. युद्ध लंबा खिंच गया है, जबकि अमेरिका को जल्दी जीत की उम्मीद थी. 

Advertisement

2. रिजीम चेंज फेल

अमेरिका की रणनीति थी कि शीर्ष नेतृत्व खत्म होते ही ईरान में सत्ता परिवर्तन होगा. लेकिन न तो बड़े प्रदर्शन हुए, न ही सरकार गिरी. यानी अमेरिका अपनी इस रणनीति में फेल होता दिख रहा है. 

3. होर्मुज बना सबसे बड़ा झटका

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है. यह दुनिया के 20-25% तेल-गैस सप्लाई का रास्ता है. अमेरिका चाहकर भी इसे खुलवा नहीं पाया और अब अमेरिका इससे हाथ खड़े करते नजर आ रहा है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें- वर्क फ्रॉम होम, तो कहीं LPG पेट्रोल की बढ़ी कीमत, ईरान युद्ध से पैदा हुए तेल संकट से कैसे निपट रही दुनिया?

4. NATO और सहयोगियों का ठंडा रुख

कई NATO देश खुलकर अमेरिका के साथ नहीं आए. खाड़ी देशों ने भी सीमित समर्थन दिया. जबकि अमेरिका को उम्मीद थी कि जंग में कई देश खुलकर उसका पक्ष लेंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. 

5. अमेरिका की वैश्विक छवि पर असर

युद्ध से पीछे हटने के पीछे एक कारण यह भी है कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिका कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ा है. कई देशों ने सैन्य कार्रवाई का विरोध किया है. 

6. घरेलू दबाव और गिरती लोकप्रियता

हालिया दिनों में अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन तेज हुए हैं. कई शहरों में 'No Kings' जैसे प्रोटेस्ट हुए हैं. इसके अलावा अमेरिकी पॉलिटिकल पोल्स और कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो USA के भीतर ही ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट आई है. 

Advertisement

7. आर्थिक दबाव

US Energy Data के मुताबिक युद्ध का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है. ईंधन के दाम बढ़े हैं, जिससे जनता में नाराजगी है. 

यह भी पढ़ें- केवल खार्ग ही नहीं ईरान के इन 6 द्वीपों पर अमेरिका की नजर, लेकिन बुरा हो सकता है अंजाम

Advertisement

कैसे शुरू हुई थी जंग?

बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर मिसाइल हमला किया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. अमेरिका द्वारा किए गए इस हमले का मकसद था. ईरान की सैन्य क्षमता तोड़ना और सत्ता परिवर्तन कराना. लेकिन हुआ उल्टा.

ईरान ने जवाबी हमले किए. अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और होर्मुज बंद कर वैश्विक संकट खड़ा कर दिया. अब इस जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति होर्मुज की वजह से बाधित हुई है. कई देशों में महंगाई की मार भी देखने को मिल रही है. 

तो क्या ट्रंप ने मजबूरी में लिया ये फैसला?

अब तक के हालात बताते हैं कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है. US के लिए यह युद्ध लंबा और महंगा साबित हुआ है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दबाव बढ़ा है. ऐसे में ट्रंप का युद्ध खत्म करने का फैसला रणनीतिक जीत नहीं, बल्कि मजबूरी का संकेत ज्यादा लगता है.

Featured Video Of The Day
Ahmedabad Air India Plane Crash जहां हुआ, देखिए वहां अभी कैसे हैं हालात | NDTV Ground Report