मई में जिस डील का सपोर्ट किया, अब ग्रीनलैंड पर जिद के चलते उसी को 'महान मूर्खता' बता रहे ट्रंप

चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में 60 से अधिक द्वीपों का एक समूह है. ट्रंप प्रशासन के सपोर्ट से यूके ने पिछले साल मई में मॉरीशस के साथ इसकी डील की थी.

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  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चागोस द्वीप को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच सौदे को महान मूर्खता करार दिया है
  • ट्रंप ने आरोप लगाया कि ब्रिटेन अमेरिका के सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया बेस वाले द्वीप को देकर खतरा मोल ले रहा है
  • हैरानी यह है कि 2025 में इस द्वीप के समझौते को ट्रंप प्रशासन ने स्थिरता लाने वाला कदम बताते हुए तारीफ की थी
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ग्रीनलैंड को कब्जाने के लिए बेताब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब नाटो सहयोगी ब्रिटेन को आड़े हाथ ले लिया है. उन्होंने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीप समूह को लेकर हुए समझौते को महान मूर्खता करार दे दिया है. दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल मई में हुई इस डील को ट्रंप प्रशासन ऐतिहासिक उपलब्धि बताकर तारीफ करते नहीं थक रहा था. 

चागोस द्वीप को लेकर यूके पर ट्रंप का ताना

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नई पोस्ट में लिखा, "चौंकाने वाली बात ये है कि हमारे 'बुद्धिमान' नाटो सहयोगी युनाइडेट किंगडम अमेरिका के प्रमुख सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया वाले द्वीप को मॉरीशस को सौंपने की सोच रहा है, और उसके इस फैसले की कोई वजह नहीं दिखती."

ट्रंप बोले, मॉरीशस को द्वीप देना 'महान मूर्खता'

ट्रंप ने लिखा कि डिएगो गार्सिया जैसे बेहद हम बेस को यूके द्वारा मॉरीशस को सौंपना महान मूर्खता है. उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से कमजोरी भरा कदम करार देते हुए दावा किया कि रूस और चीन इस द्वीप पर नजरें गड़ाए बैठे हैं. ट्रंप का कहना है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां केवल ताकत को पहचानती हैं और ब्रिटेन का यह कदम इसके ठीक उलट है.

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ग्रीनलैंड के दावे को दी नई हवा

ट्रंप ने इसे ग्रीनलैंड को कब्जाने की अपनी इच्छा से जोड़ते हुए लिखा कि ब्रिटेन का इस तरह अपनी बेहद अहम जमीन को छोड़ना महान मूर्खता है, और यही वजह है कि (अमेरिका द्वारा) ग्रीनलैंड का अधिग्रहण जरूरी है. उन्होंने उन्होंने आगे कहा कि डेनमार्क और उसके सहयोगियों को (ग्रीनलैंड अमेरिका को सौंपकर) "सही कदम" उठाने की सलाह भी दी. 

मई में इसी डील को बताया था ऐतिहासिक

हैरानी की बात यह है कि मई 2025 में जब इस द्वीप का समझौता हुआ था, तब ट्रंप प्रशासन ने ही इसे क्षेत्र में स्थिरता लाने वाला कदम बताते हुए तारीफ की थी. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तब कहा था कि यह समझौता डिएगो गार्सिया बेस को लंबे समय तक सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए जरूरी है. अब कुछ ही महीनों के बाद ट्रंप का रुख बदल गया है कि और वह उसी डील को महान मूर्खता करार दे रहे हैं.

क्या है चागोस द्वीप समूह का विवाद?

  • चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में 60 से अधिक द्वीपों का एक समूह है. इस पर पहले फ्रांस का, फिर 1814 से ब्रिटेन का कंट्रोल है. 
  • 1965 में ब्रिटेन ने चागोस आइलैंड्स को मॉरीशस से अलग कर दिया था. उसके बाद यहां के करीब दो हजार लोगों को हटाया था ताकि अमेरिका अपना बेस बना सके.
  • हाल के वर्षों में ब्रिटेन के इस पर अधिकार और निवासियों को बेदखल करने का मुद्दा गरमाया है. संयुक्त राष्ट्र और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने ब्रिटेन से कहा है कि वह इसे इसे अपना औपनिवेशिक शासन मानना बंद करे और मॉरीशस को लौटाए.
  • ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच 2022 से द्वीप को लेकर बातचीत चल रही थी. बाद में मॉरीशस से पैसों को लेकर विवाद भी हुआ, लेकिन ट्रंप प्रशासन के सपोर्ट से वह मई 2025 में डील करने में सफल रहा
  • इस डील के तहत ब्रिटेन डिएगो गार्सिया को कम से कम 99 वर्षों के लिए पट्टे पर देने के लिए मॉरीशस को भुगतान करेगा. ब्रिटेन में कई विपक्षी नेता इस समझौते का विरोध करते रहे हैं. उनका कहना है कि इसे छोड़ने से वहां चीन-रूस के दखल का खतरा पैदा हो गया है.

चागोस द्वीप इस लिहाज से अहम है क्योंकि अमेरिका ने यहां पर अपना प्रमुख मिलिट्री बेस बना रखा है, जहां पर उसके करीब ढाई हजार सैनिक तैनात हैं. हाल ही में अमेरिका ने यहां अपने परमाणु क्षमता से लैस बी-2 स्पिरिट बॉम्बर्स भी तैनात किए हैं. ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपनी सनक में अब इसे भी लपेट लिया है. 

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