तेहरान की सड़कों पर नारों के बीच गूंजी शहनाई, मुनीरिया चौक पर हुआ निकाह, प्रदर्शनकारी बने 'बाराती'

तेहरान के मुनीरिया चौक पर प्रदर्शन के बीच एक युवा जोड़े ने निकाह कर जीवन की नई शुरुआत की. तनावपूर्ण माहौल में हुई इस शादी में प्रदर्शनकारी ही बाराती बने.

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  • तेहरान के मुनीरिया चौक पर तनाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच एक युवा जोड़े ने शादी की
  • यह शादी दो महीने से जारी राजनीतिक उथल-पुथल और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई
  • निकाह समारोह को स्थानीय लोगों ने सामान्य जीवन की ओर लौटने की आशा का प्रतीक माना
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में राजधानी तेहरान से एक खास तस्वीर सामने आई. करीब दो महीने से युद्ध के साये में तेहरान की सड़कों पर सन्नाटा पसरा था, लेकिन इस बीच वहां शहनाई सुनाई दी. जी हां ईरान की राजधानी तेहरान का ऐतिहासिक मुनीरिया चौक रविवार रात एक ऐसी प्रेम कहानी का गवाह बना जिसने तनाव के बीच उम्मीद की नई इबारत लिख दी. जब शहर की गलियां युद्ध की उथल-पुथल से गुजर रही थीं, तब एक युवा जोड़े ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को गवाह मानकर एक-दूसरे का हाथ थामा. यह सिर्फ एक शादी नहीं थी, बल्कि बारूद की गंध के बीच खिलते हुए गुलाब की तरह एक शांतिपूर्ण प्रतिरोध था. उन हजारों अजनबियों के लिए, जो इंसाफ की जंग लड़ रहे थे, यह निकाह एक उत्सव बन गया.

मैदान-ए-मुनीरिया में गूंजी शहनाई

ईरान की राजधानी तेहरान का ऐतिहासिक मुनीरिया चौक (Moniriyeh Square) पर रविवार को यह खास शादी हुई. पिछले 57 दिनों से जारी तनाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच, भारी सुरक्षा व्यवस्था और नारों की गूंज के साए में एक युवा जोड़े ने यहीं निकाह कर अपने नए जीवन की शुरुआत की.

भीड़ बनी बाराती

जहां एक ओर शहर राजनीतिक उथल-पुथल और तनाव से गुजर रहा था, वहीं दूसरी ओर सादगी और संकल्प का संदेश देता यह विवाह समारोह लोगों का ध्यान खींच रहा था. रात के अंधेरे में मोमबत्तियों की रोशनी, नारों की गूंज और उम्मीद की चमक के बीच जोड़े ने एक-दूसरे का हाथ थामा. चौक पर मौजूद प्रदर्शनकारी अनायास ही इस शादी के साक्षी बन गए. तालियों और बधाई के साथ उन्होंने जोड़े का स्वागत किया.

तेहरान के इस हिस्से में जारी विरोध प्रदर्शनों और शब्हा-ये-तेहरान (तेहरान की रातें) के बीच यह 57वीं रात थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निकाह केवल एक निजी आयोजन नहीं था, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सामान्य जीवन की ओर लौटने की आशा का प्रतीक भी था. कई लोगों ने इसे वर्तमान हालात के बीच एक शांत, प्रतीकात्मक प्रतिरोध और मानवीय जिजीविषा के रूप में देखा.

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