- तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इजरायल के खिलाफ आक्रमण की धमकी दी और नेतन्याहू को हिटलर कहा है
- एर्दोगन ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता नहीं होती तो तुर्किए इजरायल को जवाब देता
- नेतन्याहू ने तुर्किए पर कुर्दों पर अत्याचार और आतंकवाद को शरण देने का आरोप लगाया है
तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इजरायल पर आक्रमण करने की धमकी दी. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को चुनौती देते हुए एर्दोगन ने उन्हें "हिटलर" कहा, जो "खून और नफरत" से अंधा हो गया है. इजराइल हयोम के अनुसार, एर्दोगन ने कहा कि अगर वाशिंगटन और तेहरान के बीच वार्ता नहीं होती है, तो अंकारा "इजराइल को उसकी औकात दिखा देगा."
एर्दोगान ने मांगी बस एक चीज
तुर्किए में एक राजनीतिक कार्यक्रम में एर्दोगान ने कहा, "युद्धविराम के दिन, इजरायल ने सैकड़ों निर्दोष लेबनानी लोगों को मार डाला. नेतन्याहू खून और नफरत से अंधा हो गया है. अगर पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध में मध्यस्थता नहीं कर रहा होता, तो हम इजरायल को उसकी औकात दिखा देते." उन्होंने आगे कहा, "जिस तरह हम लीबिया और काराबाख में दाखिल हुए, उसी तरह हम इजरायल में भी दाखिल हो सकते हैं. ऐसा नहीं करने का कोई कारण नहीं है. इसके लिए ताकत और एकता की आवश्यकता होगी."
नेतन्याहू ने लगाए थे आरोप
बेंजामिन नेतन्याहू के तुर्किए के राष्ट्रपति पर देश के पूर्वी हिस्से में कुर्दों पर अत्याचार करने का आरोप लगाने के एक दिन बाद एर्दोगान ने ये टिप्पणी की. X पर एक पोस्ट में नेतन्याहू ने लिखा, "मेरे नेतृत्व में इजरायल ईरान के आतंकी शासन और उसके सहयोगियों से लड़ना जारी रखेगा, एर्दोगन के विपरीत, जो उन्हें शरण दे रहे हैं और अपने ही कुर्द नागरिकों का नरसंहार कर रहे हैं."
इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी तुर्किए पर यहूदी-विरोधी भावना और इजरायली राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के खिलाफ फर्जी मुकदमे चलाने का आरोप लगाया.
तुर्किए ने करारा जवाब दिया
तुर्किए के विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में नेतन्याहू की आलोचना करते हुए उन्हें उनके द्वारा किए गए अपराधों के कारण "हिटलर" बताया. मंत्रालय ने यह भी कहा कि अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.
बयान में आगे कहा गया, "नेतन्याहू के प्रशासन के तहत, इजरायल को नरसंहार के आरोपों में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है. नेतन्याहू का वर्तमान उद्देश्य चल रही शांति वार्ताओं को कमजोर करना और क्षेत्र में अपनी विस्तारवादी नीतियों को जारी रखना है. इसमें विफल रहने पर, उन्हें अपने ही देश में मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है और संभवतः उन्हें कारावास की सजा सुनाई जाएगी. हमारे राष्ट्रपति को इजरायली अधिकारियों द्वारा निराधार, बेशर्म और झूठे आरोपों से निशाना बनाया जाना, उन सच्चाइयों से पैदा हुई असुविधा का परिणाम है जिन्हें हमने लगातार हर मंच पर आवाज उठाई है."
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