- सीजफायर के बाद हॉर्मुज से पहली मूवमेंट, दो जहाज सुरक्षित गुजरे.
- कंट्रोल्ड ट्रैफिक- ईरान की मंजूरी और तय रूट से ही जहाज गुजर रहे हैं.
- 40 दिनों में 29 जहाजों पर हमले. सीजफायर टूटने की खबर, खतरा बरकरार.
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के एलान के बाद दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई लाइन हॉर्मुज स्ट्रेट पर हलचल फिर शुरू हो गई है. करीब 40 दिनों तक चले इस तनाव और हमलों के साए में बंद जैसी स्थिति झेलने के बाद अब पहली बार दो जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजर पाए हैं. मैरिटाइम डेटा मॉनिटर मैरिनट्रैफिक (MarineTraffic) के मुताबिक, ग्रीस का बल्क कैरियर NJ Earth और लाइबेरिया के फ्लैग वाला Daytona Beach जहाज बुधवार को हॉर्मुज स्ट्रेट को पार कर गए हैं.
सीजफायर के तहत ईरान ने साफ किया है कि हॉर्मुज से गुजरना अब संभव होगा, लेकिन इसके लिए उसकी सेना के साथ समन्वय (कोऑर्डिनेशन) करना जरूरी होगा. यानी रास्ता खुला तो है, पर पूरी तरह आजाद नहीं. जानकार इसे कंट्रोल्ड ओपनिंग कह रहे हैं.
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40 दिनों में 29 जहाज बनाए गए निशाना
साथ ही सीजफायर के तोड़े जाने की खबरों के बीच हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर खतरे अभी भी बरकरार हैं. सीजफायर से पहले बीते कुछ दिनों के दौरान कुछ जहाजों पर हमले और संदिग्ध घटनाएं जारी रहीं.
ब्रिटिश एजेंसी यूके मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस UK Maritime Trade Operations के मुताबिक, एक कंटेनर जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से नुकसान पहुंचा. 1 मार्च से अब तक 29 जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है, जिनमें 13 तेल टैंकर शामिल हैं. इन घटनाओं में 11 लोगों की मौत भी हो चुकी है.
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हॉर्मुज से गुजरते थे 120 जहाज
तेल और गैस की सप्लाई पर इसका सीधा असर पड़ा है. सामान्य दिनों में जहां रोज करीब 120 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब ट्रैफिक में 94% की गिरावट आई है. कई LNG टैंकर तो बीच रास्ते से ही लौट गए, जिससे कतर की गैस सप्लाई पर भी असर पड़ा. दिलचस्प बात यह है कि अब ज्यादातर जहाज ईरान के तय किए गए खास रूट से ही गुजर रहे हैं, जिसे एक्सपर्ट्स तेहरान टोल बूथ कह रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षित रास्ते के लिए ईरान को भुगतान भी किया है या फिर कूटनीतिक रास्तों से परमिशन ली है.
इस बीच, एशियाई देशों की चिंता भी बढ़ गई है. दक्षिण कोरिया ने अपने फंसे हुए जहाजों को निकालने के लिए खास कदम उठाए हैं. करीब 14 मिलियन बैरल तेल लेकर उसके 7 टैंकर इस इलाके में फंसे हैं, जो देश की 5 दिन की जरूरत के बराबर है.
साफ है कि सीजफायर ने राहत की एक खिड़की जरूर खोली है, लेकिन हॉर्मुज का संकट अभी खत्म नहीं हुआ. यह रास्ता सिर्फ तेल का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है, और फिलहाल यह लाइफलाइन संभावित खतरों के साथ शुरू हो गया है.
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