- श्रीलंका की संसद ने सभी सांसदों और उनकी विधवाओं की पेंशन तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया है
- न्याय मंत्री ने पेंशन समाप्ति के पक्ष में मतदान करते हुए सांसदों की बहस की गुणवत्ता पर सवाल उठाए
- विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने पेंशन समाप्ति का विरोध करते हुए इसे सामाजिक सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है
श्रीलंका की संसद ने मंगलवार को सभी सांसदों और उनकी विधवाओं की पेंशन समाप्त कर दी. ये एक तरह से राजनेताओं के विशेषाधिकारों में कटौती करने के सरकार के वादे के अनुरूप है. न्याय मंत्री हरसाना नानायक्कारा ने संसद में तत्काल प्रभाव से पेंशन बंद करने के लिए मतदान करते हुए कहा, "जब लोग इस सदन में होने वाली बहस की गुणवत्ता और सांसदों द्वारा कही गई बातों को देखते हैं, तो उन्हें नहीं लगता कि सांसदों को पेंशन मिलनी चाहिए."
राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की वामपंथी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपतियों से आवास, वाहन और हजारों बॉडीगार्ड्स वापस लेने के कुछ ही महीनों बाद 49 साल पुराने संसदीय पेंशन अधिनियम को निरस्त कर दिया.
केवल दो मत विरोध में
225 सदस्यीय विधानमंडल में सत्तारूढ़ दल के पास दो-तिहाई बहुमत है. सरकार ने पेंशन कानून को रद्द करने के पक्ष में 154 मत डाले, जबकि केवल दो मत इसके विरोध में पड़े. विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि विधायकों को पद छोड़ने के बाद सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पेंशन आवश्यक है. उन्होंने तर्क दिया कि अन्यथा, वे रिटायरमेंट के बाद अपनी भलाई सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार के माध्यम से रुपये कमाने की कोशिश कर सकते हैं।
पूर्व कानून के तहत, संसद सदस्यों को पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद पेंशन का अधिकार था, जबकि अन्य सरकारी कर्मचारियों को पात्र होने के लिए 10 वर्ष की सेवा पूरी करनी होती थी.
महिंद्रा राजपक्षे बने कारण
सितंबर में, पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे द्वारा सरकारी बंगले को खाली करने के अनुरोध को अस्वीकार करने के बाद, सरकार ने पूर्व नेताओं के विशेषाधिकारों को समाप्त करने के लिए विधेयक पेश किया. पूर्व राष्ट्रपतियों को सरकारी ईंधन से चलने वाली महंगी गाड़ियां, सचिवालयी कर्मचारी और व्यक्तिगत सुरक्षा भी प्राप्त थी. अब इनमें भी भारी कटौती कर दी गई है.













