सांप का सूप हांगकांग में क्यों है खास? जानिए इसके पीछे का कारण

हांगकांग में सांप का सूप बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक है और इसे बेहद सावधानीपूर्वक बनायी जाती है. यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसकी तैयारी में औषधीय गुणों और स्वाद का विशेष ध्यान रखा जाता है.

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नई दिल्ली:

सांप का सूप हांगकांग की एक प्राचीन और पारंपरिक डिश है, हांगकांग में इसे न सिर्फ स्वादिष्ट माना जाता है. बल्कि इसके औषधीय गुणों और सांस्कृतिक महत्व भी हैं और यह बेहद लोकप्रिय भी है. हांगकांग की परंपरागत चीनी चिकित्सा (Traditional Chinese Medicine - TCM) में सांप का सूप शरीर के लिए अत्यधिक फायदेमंद बताया गया है. यह सूप शरीर की "यिन और यांग" ऊर्जा (यिन और यांग, चीनी दर्शन के ताओवाद/दाओवाद से जुड़े हैं)  को संतुलित करता है. इसे खासतौर पर सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए पीया जाता है. 

सांप का सूप हांगकांग के विभिन्न रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड बाजारों में आसानी से मिल जाता है. यह सूप हांगकांग की खानपान की संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है. सांप के सूप को यहां के लोग बेहद स्वादिष्ट मानते हैं साथ ही इसे औषधीय गुणों से भरपूर भी माना जाता है. हालांकि कोरोना संकट के बाद इसके कई रेस्टोरेंट बंद हो गए. धीरे-धीरे बहुत कम ही जगह यह उपलब्ध है. 

कैसे बनता है सांप का सूप?
हांगकांग में सांप का सूप बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक है और इसे बेहद सावधानीपूर्वक बनायी जाती है. यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसकी तैयारी में औषधीय गुणों और स्वाद का विशेष ध्यान रखा जाता है. कई एक्सपर्ट हैं जो इसे बनाते हैं.  आमतौर पर कोबरा, पाइथन, या अन्य प्रजातियों के मांस से इसे बनाया जाता है. जिनसेंग, गोजी बेरी, वुल्फबेरी, और लोक्वाट पत्ते जो हांगकाग में आसानी से मिल जाते हैं उसका उपयोग भी इसके निर्माण में होता है. चिकन या पोर्क को भी इसे गाढ़ा और स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है. 

साफ सफाई की होती है बेहद जरूरत
सांप का सूप बनाने के लिए इसे बेहद अच्छे तरीके से साफ करना होता है. किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा हो सकती है. उसकी त्वचा उतारी जाती है और मांस को पतले-पतले टुकड़ों में काटा जाता है.कुछ रेस्टोरेंट सांप की हड्डियों का भी उपयोग करते हैं ताकि सूप में गहरा स्वाद आए.

हालांकि हांगकांग में सांप का सूप अभी भी लोकप्रिय है, लेकिन शहरीकरण और आधुनिक खानपान के कारण इसकी खपत में गिरावट आई है. फिर भी, पारंपरिक रेस्टोरेंट और दुकानों में यह व्यंजन एक खास स्थान बनाए हुए है.
 

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