शेख हसीना ने बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण में मौत की सजा को दी चुनौती

शेख हसीना की ओर से UK-स्थित लॉ फर्म 'किंग्सले नैपली' द्वारा भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि जिस तरह शेख हसीना पर उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई, वह "अंतरराष्ट्रीय कानून और निष्पक्ष सुनवाई के बुनियादी मानकों" का उल्लंघन है.

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शेख हसीना ने अपनी सजा को किया चैलेंज
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  • UK-स्थित लॉ फर्म किंग्सले नैपली ने कहा कि मुकदमा बिना उनकी मौजूदगी के चला, जो सही नहीं है
  • ट्रिब्यूनल ने 17 नवंबर को हसीना को चार आरोपों में दोषी मानकर मौत की सजा सुनाई थी
  • राजनीतिक माहौल में अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाए गए और पार्टी के कई नेताओं और वकीलों को गिरफ्तार किया गया था
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने खिलाफ दी गई मौत की सजा को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल में चुनौती है. शेख हसीना को पिछले साल जुलाई विद्रोह को दबाने से जुड़े 'मानवता के खिलाफ अपराध' के एक मामले में दोषी ठहराया गया था. बुधवार को शेख हसीना ने इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल को एक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत की सज़ा के फ़ैसले को रद्द करने की मांग की है. 

शेख हसीना की ओर से UK-स्थित लॉ फर्म 'किंग्सले नैपली' द्वारा भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि जिस तरह शेख हसीना पर उनकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाया गया और उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई, वह "अंतरराष्ट्रीय कानून और निष्पक्ष सुनवाई के बुनियादी मानकों" का उल्लंघन है.यह पत्र 30 मार्च को ट्रिब्यूनल को ईमेल किया गया था, जिसमें हसीना के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया को "अन्यायपूर्ण और गैर-कानूनी" बताया गया है. BDNews24 ने इस मामले पर ट्रिब्यूनल के मुख्य अभियोजक से टिप्पणी लेने की कोशिश की. 

पिछले साल 17 नवंबर को, इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को मौत की सज़ा सुनाई. उन्हें जुलाई आंदोलन को दबाने के दौरान 1,400 लोगों की हत्या के आदेश देने, उकसाने और भड़काने सहित चार आरोपों में दोषी पाया गया था.छात्रों और जनता के विद्रोह के बाद 5 अगस्त, 2024 को हसीना सत्ता से हट गईं, और तब से भारत में रह रही हैं. उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्हें और उनकी पार्टी को अपना बचाव करने का निष्पक्ष मौका नहीं दिया गया.

किंग्सले नैपली के पत्र में कहा गया है कि हसीना का मुकदमा ऐसे राजनीतिक माहौल में चला, जहां अवामी लीग और उसके नेता, कार्यकर्ता और समर्थक "प्रतिकूल माहौल" में थे. मई 2025 में, अंतरिम सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया. पार्टी के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया और वे राजनीतिक हिंसा का शिकार बने. पत्र में कहा गया है कि अवामी लीग से जुड़े कई वकीलों को भी गिरफ्तार किया गया या उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया, जिससे मुकदमे की निष्पक्षता पर और भी सवाल उठ खड़े हुए.

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