'रूस के रास्ते निकालिए हमें...': यूक्रेन के सुमी में फंसे स्टूडेंट्स ने भारत सरकार से लगाई गुहार

Russia-Ukraine Crisis: रूसी सीमा से महज दो घंटे की दूरी पर पूर्वी यूक्रेन के एक कस्बे सुमी में करीब 500 भारतीय छात्र फंसे हुए हैं और भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं.

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सड़क यात्रा एकदम सुरक्षित नहीं है, सुमी में रेल की पटरियां क्षतिग्रस्त हैं: छात्र
नई दिल्ली:

Russia-Ukraine War: रूसी सीमा से महज दो घंटे की दूरी पर पूर्वी यूक्रेन के एक कस्बे सुमी में करीब 500 भारतीय छात्र फंसे हुए हैं और भारत सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं. दरअसल भारत सरकार द्वारा पश्चिमी यूक्रेन से भारतीयों को निकाला जा रहा है और ये छात्र पूर्वी यूक्रेन में फंसे हुए हैं. इन स्टूडेंट्स के अनुसार ये पूर्वी यूक्रेन से पश्चिमी यूक्रेन नहीं पहुंच सकते हैं. ऐसे में भारत सरकार इन्हें रूस के बोर्ड से निकाले.

एनडीटीवी को पांच छात्राओं ने एक वीडियो भेजी है. वीडियो में एक छात्रा कहती हुई सुनाई दे रही है कि हम भारतीय दूतावास से जल्द से जल्द हमें बचाने का अनुरोध कर रहे हैं. सुमी मेडिकल यूनिवर्सिटी के अंतिम वर्ष की छात्रा अंजु तोजो ने कहा कि हमारे लिए यूक्रेन की पश्चिमी सीमा की यात्रा करना असंभव और बहुत खतरनाक है. एकमात्र विकल्प रूसी सीमा है. इसलिए मैं मास्को में भारतीय दूतावास से अनुरोध करती हूं कि हमें वहां से निकाले. छात्राओं के अनुसार सड़क यात्रा एकदम सुरक्षित नहीं है. सुमी में रेल की पटरियां क्षतिग्रस्त हैं. सुमी से कीव तक बारूदी सुरंगें हैं.

एक अन्य छात्रा ने कहा कि, "हम अपनी रातें कॉलेज में बनें बंकर में बिता रहे हैं. वहां बहुत ठंड है. यहां गोलाबारी और हमले हो रहे हैं. यहां तक कि नागरिक भी हथियारों से लैस हैं. भोजन और पानी की कमी है.

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गौरतलब है कि "मिशन गंगा" के तहत यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकाला जा रहा है. भारत अगले तीन दिनों में नागरिकों को निकालने के लिए 26 उड़ानें संचालित करेगा. ये सभी विमान पश्चिम में यूक्रेन के साथ सीमा साझा करने वाले देशों से उड़ान भरेंगे.

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