"दोनों देशों के संबंधों को 'गंभीर नुकसान' हो सकता है, अगर...": पन्नू मामले पर भारतीय-अमेरिकी सांसद

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता के परिवार के एक सदस्य की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई चार जनवरी के लिए टाल दी.

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गत 30 जून को निखिल गुप्ता को गिरफ्तार किया था.

भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता पर अमेरिकी-कनाडाई नागरिक खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू (Khalistani terrorist Gurpatwant Singh Pannun) को मारने की कथित साजिश का आरोप लगाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है. भारतीय-अमेरिकी सांसदों के अनुसार यदि इस मुद्दे को उचित तरीके से हल नहीं किया गया, तो इससे अमेरिका-भारत साझेदारी को काफी नुकसान हो सकता है, उन्होंने निखिल गुप्ता के अभियोग के बारे में बाइडेन प्रशासन द्वारा एक वर्गीकृत ब्रीफिंग के बाद चेतावनी दी.

आरोपों पर वर्गीकृत ब्रीफिंग में अमेरिकी प्रतिनिधि अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति और श्री थानेदार ने भाग लिया था. उन्होंने एक बयान में कहा "हम मानते हैं कि अमेरिका-भारत साझेदारी ने दोनों लोगों के जीवन पर सार्थक प्रभाव डाला है, लेकिन हमें चिंता है कि यदि अभियोग में उल्लिखित कार्रवाइयों को उचित रूप से संबोधित नहीं किया गया, तो साझेदारी को महत्वपूर्ण नुकसान हो सकता है".

अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने कहा कि आरोप बेहद चिंताजनक हैं और उनके मतदाताओं की सुरक्षा उनकी सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है.

उन्होंने जांच समिति बनाने के भारत के कदम का स्वागत किया. लेकिन कहा कि अमेरिका को आश्वस्त करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी.

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अमेरिका में संघीय अभियोजकों ने गुप्ता पर एक सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. चेक गणराज्य के अधिकारियों ने अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के तहत गत 30 जून को गुप्ता को गिरफ्तार किया था.

 वहीं भारत के उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता के परिवार के एक सदस्य की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई चार जनवरी के लिए टाल दी. याचिका में कारावास में गंभीर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है, जिसमें गोमांस और सूअर का मांस खाने के लिए मजबूर किया जाना भी शामिल है. इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें राजनयिक पहुंच, भारत में अपने परिवार से संपर्क करने का अधिकार और कानूनी मदद लेने की स्वतंत्रता से वंचित कर दिया गया.

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