रेको डिक खदान पर दुनिया की नजर, आड़े आए बलूचों को रोकने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरानों ने बनाया प्लान

जिओ न्यूज में छपी खबर के मुताबिक एक प्रांतीय सरकारी अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान ने अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने और खनिज से भरपूर बलूचिस्तान प्रांत और ईरान और अफगानिस्तान के साथ उसकी सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल फोर्स बनाने का फैसला किया है.

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  • पाकिस्तान की सरकार बलूचिस्तान के रेको डिक खदान को विदेशी निवेश के लिए खुले तौर पर समर्पित कर रही है.
  • बलूचिस्तान में सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक विशेष फ्रंटियर कोर और इंटेलिजेंस नेटवर्क का निर्माण किया जाएगा.
  • बीएलए के आतंकवादी हमलों के कारण खनिज परियोजना में विदेशी निवेशक खासकर बैरिक माइनिंग कॉर्पोरेशन चिंतित हैं.
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कराची:

पाकिस्तान का बलूचिस्तान इन दिनों दुनिया के बड़े देशों को खूब लुभा रहा है. पाकिस्तानी हुक्मरान, जिनका बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हमलों से पार पाना मुश्किल है, वो भी इस प्राकृतिक संपदा से लबरेज प्रांत के रेको डिक खदान को गैर मुल्कों के हवाले करने से हिचक नहीं रहे हैं. उनके लिए इसके बदले मिलने वाले अरबों डॉलर मायने रखते हैं. विदेशी मीडिया संस्थान ने दावा किया है कि अपने हित और देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की चाहत में सरकार ने एक प्लान बनाया है.

जिओ न्यूज में छपी खबर के मुताबिक एक प्रांतीय सरकारी अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान ने अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने और खनिज से भरपूर बलूचिस्तान प्रांत और ईरान और अफगानिस्तान के साथ उसकी सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक स्पेशल फोर्स बनाने का फैसला किया है. 'द न्यूज' ने विदेशी मीडिया आउटलेट 'अरब न्यूज' के हवाले से बताया कि इसकी नौबत इसलिए आई क्योंकि कनाडाई कंपनी बैरिक माइनिंग कॉर्पोरेशन ने कहा था कि वह बलूचिस्तान में मल्टी-बिलियन डॉलर के रेको डिक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट के सभी पहलुओं की "तुरंत" एक व्यापक समीक्षा शुरू करने की योजना बना रही है, और इसकी मुख्य वजह हाल ही में हुए आतंकी हमले हैं जिसमें कई लोगों की जान गई.

बैरिक का यह बयान पिछले शनिवार को बलूचिस्तान के कई जिलों में बीएलए द्वारा किए गए समन्वित हमलों के बाद आया है, जिसमें 36 नागरिक और 22 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. टाइमिंग इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने पाकिस्तान की रेको डिक खदान परियोजना में 1.3 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया था. ट्रंप प्रशासन की ओर से बुधवार (4 फरवरी) को कहा गया कि 'प्रोजेक्ट वॉल्ट' के तहत यह बड़ा निवेश किया जाएगा.

मुश्किल आर्थिक हालात से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह बड़ी राहत का सबब बन गया. हालांकि इस इलाके में पाकिस्तानी सेना को विद्रोही गुट बीएलए इसके आड़े आ रहा है और उन्हें चुनौती पेश कर रहा है. ऐसे में यहां खनन के लिए अमेरिका और पाकिस्तान को बीएलए से भी पार पाना होगा. बीएलए बलूचिस्तान की खनिज संपदा को दूसरे देशों को देने का विरोध करता रहा है.

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के मीडिया और राजनीतिक मामलों के सलाहकार शाहिद रिंद ने अरब न्यूज को बताया, "आतंकवादी घटनाओं को देखते हुए, प्रांतीय सरकार सुरक्षा बलों के साथ मिलकर पूरी सुरक्षा व्यवस्था को फिर से डिजाइन कर रही है. इसमें खनिज संपन्न इलाके के लिए एक समर्पित फ्रंटियर कोर बनाने के साथ दोनों सीमाओं, यानी ईरान और अफगानिस्तान, को सुरक्षित करना भी शामिल है."

खबर के अनुसार, बलूचिस्तान सरकार अपने इंटेलिजेंस नेटवर्क को भी मजबूत करेगी और क्षेत्र की खनन कंपनियों के साथ मिलकर काम करेगी. रिंद ने कहा, "बलूचिस्तान सरकार प्रांत में विदेशी निवेश को लेकर बहुत गंभीर है और रेको डिक को विदेशी निवेश का झंडाबरदार मानती है."  "प्रांतीय सरकार इसे बनाए रखने के लिए जो भी जरूरी होगा, वह करेगी."

हाल के हमलों ने जाहिर तौर पर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, खासकर बैरिक को चिंतित कर दिया है, जो बलूचिस्तान में दुनिया की सबसे बड़ी तांबे और सोने की खदानों में से एक को विकसित कर रहा है. जिओ न्यूज के अनुसार, रेको डिक में बैरिक की हिस्सेदारी 50 फीसदी है, साथ ही तीन पाकिस्तानी संघीय सरकारी उद्यमों की 25 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि बलूचिस्तान सरकार के पास परियोजना में शेष 25 फीसदी की हिस्सेदारी है. सरकार को इस प्रोजेक्ट से 2028 में प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि यह पाकिस्तान की मिनरल एक्सपोर्ट बढ़ाने और अपने कम विकसित माइनिंग सेक्टर में विदेशी निवेश लाने की उम्मीदों को बल देगा.

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वर्षों के कानूनी विवादों के बाद 2022 में फिर से शुरू हुआ रेको डिक प्रोजेक्ट, सरकार द्वारा बलूचिस्तान, पाकिस्तान के सबसे बड़े लेकिन सबसे कम विकसित प्रांत के लिए एक बदलाव लाने वाले निवेश के तौर पर पेश किया जा रहा है.

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