कुद्स डे क्या है, जिसकी रैली पर तेहरान में इजरायल ने किया हमला, भारत में भी हुए प्रदर्शन

ईरान में हर साल की तरह इस वर्ष भी क़ुद्स डे की रैली निकाली जा रही थी, जहां 'अमेरिका मुर्दाबाद' और 'इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगाए जा रहे थे. रैली में मंत्री अली लारीजानी भी मौजूद थे.

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  • अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव रमजान के पवित्र महीने में खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है.
  • ईरान में क़ुद्स डे की रैली पर हुए हमले में एक महिला की मौत हुई, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं.
  • क़ुद्स डे की शुरुआत 1979 में ईरान के इमाम आयतुल्लाह खुमैनी ने फिलिस्तीन के समर्थन में की थी.
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अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब खतरनाक मोड़ ले चुका है. रमजान के पवित्र महीने में जारी इस टकराव ने लोगों में खौफ बढ़ा दिया है. इसी बीच, ईरान में क़ुद्स डे की रैली पर हुए हमले ने हालात को और गंभीर कर दिया है.  क़ुद्स डे (Quds Day) हर साल रमजान के आखिरी जुमे को मनाया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है. इसका उद्देश्य फिलिस्तीन के लोगों के प्रति एकजुटता दिखाना और इजरायली कब्जे का विरोध करना है.'क़ुद्स'दरअसल यरूशलम (Jerusalem) का अरबी नाम है, जिसे मुसलमानों, ईसाइयों और यहूदियों—तीनों धर्मों में पवित्र माना जाता है.

वहीं, ईरानी मिडिया एजेंसी इरना के अनुसार इजरायल के तेहरान में कुद्स डे की रैली के दौरान एक महीला की मौत हो गई है. 

कब और क्यों हुई थी इसकी शुरूआत?

इस दिन की शुरुआत 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के नेता इमाम आयतुल्लाह खुमैनी ने की थी. उन्होंने घोषणा की थी कि रमजान के अंतिम शुक्रवार को 'अंतरराष्ट्रीय क़ुद्स दिवस' के रूप में मनाया जाए, ताकि दुनिया भर के मुसलमान फिलिस्तीन की आजादी के समर्थन में आवाज उठा सकें. धीरे‑धीरे यह दिन ईरान तक सीमित न रहकर भारत, पाकिस्तान, इराक और उन सभी देशों में मनाया जाने लगा, जहां लोग फ़िलिस्तीन की आवाज बुलंद करते हैं.

ईरान में रैली के दौरान इजरायल का हमला

ईरान में हर साल की तरह इस वर्ष भी क़ुद्स डे की रैली निकाली जा रही थी, जहां 'अमेरिका मुर्दाबाद' और 'इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगाए जा रहे थे. रैली में मंत्री अली लारीजानी भी मौजूद थे. तभी रैली पर हमला हुआ. अली लारीजानी ने इस घटना के बाद इजरायल पर निशाना साधते हुए कहा कि इजरायल मजबूर हो गया है, इसलिए ऐसी हरकतें कर रहा है. लेकिन वह भूल गया है कि ईरानी कभी हार नहीं मानते.

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बता दें कि 1985 में भी क़ुद्स डे के दौरान हमला हुआ था, जिसमें करीब 78 लोग मारे गए थे. 2017 में लंदन में निकाली गई क़ुद्स डे रैली पर भी हमला हुआ था, जिसमें एक बुज़ुर्ग की मौत हो गई थी.

भारत के विभिन्न शहरों में क़ुद्स डे पर प्रदर्शन

भारत के कश्मीर, लद्दाख, लखनऊ, दिल्ली, बेंगलुरु, अलीपुर, हैदराबाद सहित कई शहरों में मस्जिदों के बाहर क़ुद्स डे के समर्थन में प्रदर्शन हुए. लोगों ने फ़िलिस्तीन की आज़ादी की मांग की और मज़लूमों के साथ खड़े होने के नारे लगाए. साथ ही, अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा भी की.

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