- US-ईरान के प्रतिनिधिमंडल सोमवार को इस्लामाबाद में तनाव कम करने के लिए वार्ता का अगला दौर शुरू कर सकते हैं.
- अमेरिकी प्रशासन ने अभी वार्ता की औपचारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन बैक-चैनल कूटनीति तेज हो रही है.
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव जारी है, ईरान ने क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की मांग दोहराई है.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के तहत दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का अगला दौर सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हो सकता .। बातचीत से जुड़े ईरानी अधिकारियों ने CNN को यह जानकारी दी है. सूत्रों के मुताबिक, दोनों प्रतिनिधिमंडल रविवार को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं.
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से अब तक औपचारिक रूप से इस वार्ता की पुष्टि नहीं की गई है. बावजूद इसके, बैक-चैनल कूटनीति तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.
दोनों देशों में बातचीत पर मतभेद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते शुक्रवार को कहा था कि समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है, लेकिन एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने तेहरान द्वारा किसी बड़े समझौते या रियायत से इनकार किया है. इससे स्पष्ट है कि वार्ता के कई अहम मुद्दों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं.
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होर्मुज पर अब भी संकट के बादल
इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव जारी है. शुक्रवार को इस अहम समुद्री मार्ग से केवल सीमित जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई. ईरान के विदेश मंत्री ने इसे वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला बताया, जबकि ईरानी संसद के स्पीकर ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई, तो जलडमरूमध्य फिर से बंद किया जा सकता है. हालांकि ट्रंप ने भी ऐलान कर दिया है कि होर्मुज पूरी तरह खुला है.
मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशें तेज
क्षेत्रीय कूटनीति के मोर्चे पर भी हलचल तेज है. कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ से मुलाकात की. इस दौरान मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान आगे बढ़ाने के प्रयासों पर चर्चा हुई.
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उधर, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने तेहरान में ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबफ से मुलाकात की. इसे अमेरिका–ईरान वार्ता दोबारा शुरू कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
फेल हो चुकी एक राउंड की वार्ता
गौरतलब है कि 11-12 अप्रैल को आयोजित इस्लामाबाद पीस टॉक्स अमेरिका और ईरान के बीच 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली आमने-सामने उच्चस्तरीय बातचीत थी, हालांकि वह किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी.
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच घोषित 10 दिनों का युद्धविराम बड़े पैमाने पर लागू होता नजर आ रहा है, हालांकि लेबनान ने कुछ उल्लंघनों के आरोप लगाए हैं. यह मुद्दा भी अमेरिका-ईरान वार्ता में एक संवेदनशील बिंदु बना हुआ है.
कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका और इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में अहम साबित हो सकती है.













