- लाहौर हाईकोर्ट में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की याचिका दायर की गई है
- याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक, नैतिक और शैक्षिक विकास को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा
- ऑस्ट्रेलिया से लेकर फ्रांस तक में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने या लगाने की तैयारी का उदाहरण दिया गया
ऑस्ट्रेलिया के बाद पाकिस्तान में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी है. लाहौर हाईकोर्ट में (LHC) में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने वाली याचिका दायर की गई है. अब हाई कोर्ट ने बुधवार, 28 जनवरी पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और अन्य अधिकारियों से जवाब मांगा है. पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार इस याचिका को वकील शिजा कुरेशी के जरिए आलिया सलीम और याचिकाकर्ताओं ने दायर किया है. लाहौर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस आलिया नीलम ने मंगलवार को इसपर सुनवाई की.
सोशल मीडिया बैन की मांग के पीछे क्या तर्क दिया गया?
याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील ने हाईकोर्ट में दलील दी कि सोशल मीडिया बच्चों के मानसिक, नैतिक और शैक्षिक विकास को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है. उन्होंने कहा कि विकसित देश भी कम उम्र के बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर बैन लगा रहे हैं या फिर उसपर विचार कर रहे हैं. वकील ने कोर्ट को जानकारी दी कि ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 में बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था. जबकि फ्रांस, नॉर्वे, मलेशिया और न्यूजीलैंड इस मामले पर कानून बनाने की प्रक्रिया में हैं.
इसी आधार पर वकील कुरैशी ने कोर्ट से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का आदेश देने की मांग की. इसके बाद जज ने एक कानून अधिकारी को सरकार से निर्देश लेने और 16 फरवरी तक एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया. बता दें कि सितंबर 2025 में, लाहौर हाईकोर्ट ने ही बच्चों द्वारा फेसबुक और टिकटॉक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर शहबाज शरीफ सरकार और अन्य स्टेकहोल्डर्स को नोटिस जारी किया था.













